उत्तराखंड में मौसम का महाविस्फोट! टूटते पहाड़, उफनती नदियां और बद्रीनाथ-हेमकुंड साहिब में सीजन की पहली भारी बर्फबारी के बीच देवभूमि में हाहाकार मच गया है! अगले 48 घंटे उत्तराखंड के लिए बेहद खौफनाक होने वाले हैं, क्योंकि मौसम विभाग ने जारी कर दिया है मौत का ‘रेड और ऑरेंज अलर्ट’! Heavy Rain Alert In Uttarakhand बिना कोई रिस्क लिए धामी प्रशासन ने चारधाम यात्रा पर पूरी तरह ब्रेक लगा दिया है, ऋषिकेश में हजारों यात्रियों के कदम थम गए हैं और जलप्रलय से निपटने के लिए NDRF और SDRF की टीमें ग्राउंड जीरो पर हाई अलर्ट मोड पर हैं! उत्तराखंड के घाट-पिथौरागढ़ हाईवे पर मुन्ना बैंड के पास लगातार हो रहे भूस्खलन और पहाड़ी से गिरते पत्थरों के कारण मार्ग बेहद खतरनाक हो गया है, जिससे स्थानीय लोगों और यात्रियों की जान को लगातार खतरा बना हुआ है। बार-बार शिकायतों के बावजूद प्रशासन की अनदेखी से किसी बड़े हादसे की आशंका बढ़ गई है, तो दोस्तो उत्तराखंड की हसीन वादियां इस वक्त खौफ के साए में हैं। मौसम का मिजाज ऐसा बिगड़ा है कि शासन से लेकर प्रशासन तक के हाथ-पांव फूल गए हैं। देहरादून मौसम विज्ञान केंद्र ने अगले 48 घंटों के लिए राज्य के कई हिस्सों में भारी से अत्यंत भारी बारिश का रेड और ऑरेंज अलर्ट जारी किया है। पिछले 24 घंटों में कुमाऊं और गढ़वाल के कई इलाकों में मूसलाधार बारिश ने तबाही की दस्तक दे दी है। चंपावत, ऊधमसिंह नगर और पिथौरागढ़ में रिकॉर्ड तोड़ बारिश दर्ज की गई है। तो दोस्तो एक तरफ मौसम विभाग की इस खौफनाक चेतावनी का सीधा असर चारधाम यात्रा पर पड़ा है। ऋषिकेश, जो कि इस पावन यात्रा का मुख्य पड़ाव है, वहां से आगे किसी भी यात्री को जाने की इजाजत नहीं दी जा रही है। यात्रियों की जान-माल की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए प्रशासन ने चारधाम यात्रा को अस्थायी रूप से रोक दिया है। लगातार बदलते मौसम और संवेदनशील पहाड़ी रास्तों पर भूस्खलन यानी लैंडस्लाइड के खतरे को देखते हुए सरकार कोई भी जोखिम नहीं उठाना चाहती। ऋषिकेश और आसपास के इलाकों में रोके गए यात्रियों से संयम बरतने की अपील की जा रही है।
दोस्तो इतना भर नहीं है आफत सिर्फ मैदानी इलाकों की बारिश तक सीमित नहीं है, पहाड़ों के ऊंचे शिखरों पर कुदरत का अलग ही रंग देखने को मिल रहा है। चमोली जिले में मौसम ने ऐसी करवट ली है कि विश्व प्रसिद्ध बद्रीनाथ धाम और सिखों के पवित्र तीर्थस्थल हेमकुंड साहिब में भारी बर्फबारी शुरू हो गई है। चोटियों पर बर्फ की सफेद चादर बिछ चुकी है और समूची घाटी कोहरे और धुंध के आगोश में है। अचानक हुई इस बर्फबारी से तापमान में भारी गिरावट आई है और कड़ाके की ठंड की एंट्री हो गई है। हालांकि श्रद्धालु इस नजारे को देखकर उत्साहित हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर रास्ते बेहद जोखिम भरे हो गए हैं। दोस्तो अगर बात करें कि उत्तराखंड में आफत का सबसे ज्यादा खौफ कहां है, तो कुमाऊं के चंपावत, नैनीताल, ऊधमसिंह नगर, पिथौरागढ़ और बागेश्वर रेड जोन में हैं। वहीं गढ़वाल मंडल के चमोली, रुद्रप्रयाग, टिहरी, पौड़ी और राजधानी देहरादून में आसमानी बिजली गिरने और मूसलाधार बारिश का सबसे ज्यादा खतरा मंडरा रहा है। दोस्तो अल्मोड़ा में जहां एहतियातन स्कूलों को बंद कर दिया गया है, वहीं हरिद्वार में भी भारी जलभराव से सड़कें तालाब बन चुकी हैं। पहाड़ों में बहने वाली बरसाती नदियां और गधेरे उफान पर हैं, जिससे निचले इलाकों में बाढ़ का खतरा पैदा हो गया है। दोस्तो उत्तराखंड के लोगों और यहां आने वाले पर्यटकों को पल-पल सावधान रहने की जरूरत है। एनडीआरएफ (NDRF) और एसडीआरएफ (SDRF) की टीमों को संवेदनशील रास्तों पर मुस्तैद कर दिया गया है। मौसम विभाग के मुताबिक 28 सितंबर से ही बारिश की तीव्रता में कमी आएगी, तब तक देवभूमि का सफर जानलेवा साबित हो सकता है। प्रशासन की हिदायत साफ है—घर पर रहें, सुरक्षित रहें। दोस्तो कुदरत के इस अल्टीमेटम को हल्के में लेना भारी पड़ सकता है। अगर आप या आपके करीबी उत्तराखंड में हैं, तो यात्रा संबंधी सरकारी निर्देशों का पालन जरूर करें। मौसम सामान्य होने तक पहाड़ों की यात्रा से पूरी तरह बचें।