जी हां दोस्तो टीचर दो टीचर दो, आज दो अभी दो!’ ‘टीचर दो टीचर दो, आज दो अभी दो!’ सुनिए इन चीखों को! गौर से देखिए इन मासूम चेहरों को! ये किसी राजनीतिक दल का आंदोलन नहीं है, ये देश की वो बेटियां हैं जिन्हें आज क्लासरूम के अंदर कॉपी-किताब लेकर बैठना चाहिए था, लेकिन ये अफ़सरों और सरकार के निकम्मेपन की वजह से सड़कों पर रोने और चिल्लाने को मजबूर हैं! आखिर ऐसा क्या हुआ कि ये शर्मनाक वीडियो सोशल मीडिया पर Zen Alpha द्वारा पोस्ट किया गया है, तो अधिकारियों में खलबली मंच गई। दोस्तो उत्तराखंड के नैनीताल जिले के बेतालघाट का है। जहाँ राजकीय बालिका इंटर कॉलेज (GGIC) की छात्राएं पढ़ाई के अधिकार के लिए भीख मांग रही हैं! धिक्कार है ऐसे सिस्टम पर जो बड़े-बड़े मंचों से ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ का नारा तो देता है, लेकिन बेटियों को पढ़ने के लिए एक अदद टीचर तक नहीं दे पाता! दोस्तो सोचिए, जिस उम्र में इन छात्राओं को अपने भविष्य के सपने बुनने चाहिए, उस उम्र में ये छात्राएं अपने हाथों में ‘हमें शिक्षक दो’ की तख्तियां लेकर सड़कों की धूल छान रही हैं। नैनीताल जिले का बेतालघाट इलाका आज इस बात का गवाह बना है कि कैसे हमारा सिस्टम नौनिहालों के भविष्य की बलि चढ़ा रहा है या राजकीय बालिका इंटर कॉलेज (GGIC) में लंबे समय से शिक्षकों के पद खाली पड़े हैं। स्कूल की दीवारें तो खड़ी हैं, लेकिन उनके अंदर ज्ञान बांटने वाला कोई नहीं है, छात्राएं रोज़ स्कूल आती हैं, इस उम्मीद में कि आज कोई नया शिक्षक आएगा, लेकिन शाम को खाली हाथ और मायूस होकर घर लौट जाती हैं। दोस्तो भारत का संविधान हर बच्चे को बुनियादी शिक्षा का अधिकार देता है। सरकारें हर साल करोड़ों रुपये का बजट शिक्षा के नाम पर पास करती हैं। लेकिन ज़मीनी हकीकत क्या है? ज़मीनी हकीकत इस वायरल वीडियो में साफ़ दिखाई दे रही है। शिक्षकों की इस भारी कमी का सीधा असर इन छात्राओं की बोर्ड परीक्षाओं और उनके पूरे करियर पर पड़ रहा है। जब स्कूल में मुख्य विषयों के टीचर ही नहीं होंगे, तो ये बेटियां देश के बाकी बच्चों से मुकाबला कैसे करेंगी? क्या पहाड़ की बेटियों का कसूर सिर्फ इतना है कि वे इन सुदूर इलाकों में पैदा हुईं?
दोस्तो ये घटना उस उत्तराखंड की है जहाँ शिक्षा व्यवस्था को सुधारने के रोज़ नए-नए दावे किए जाते हैं। डिजिटल क्लासरूम और स्मार्ट स्कूल के बड़े-बड़े विज्ञापन छपवाए जाते हैं, लेकिन बेतालघाट की इन छात्राओं ने सरकार के उन तमाम खोखले विज्ञापनों की धज्जियां उड़ा कर रख दी हैं। जब बुनियादी चीज़ यानी ‘टीचर’ ही स्कूल में मौजूद नहीं है, तो आपकी डिजिटल पढ़ाई किस काम की? अफ़सर एसी कमरों में बैठकर ट्रांसफर-पोस्टिंग का खेल खेलते रहते हैं, और यहाँ पहाड़ की गरीब बेटियां सड़कों पर उतरकर इंसाफ की गुहार लगा रही हैं। दोस्तो छात्राओं का ये आक्रामक प्रदर्शन सिर्फ एक स्कूल की कहानी नहीं है। उत्तराखंड के पहाड़ के दर्जनों स्कूल आज शिक्षकों की कमी के कारण बंद होने की कगार पर पहुंच चुके हैं। ग्रामीण और परिजन भी अब इन छात्राओं के समर्थन में उतर आए हैं, उनका साफ़ कहना है कि जब तक स्कूल में पक्के तौर पर शिक्षकों की नियुक्ति नहीं की जाती, तब तक यह आंदोलन थमने वाला नहीं है। क्या प्रशासन इस गंभीर चेतावनी के बाद भी सोया रहेगा, या फिर इन बेटियों की आवाज़ देहरादून की सत्ता के गलियारों तक पहुंचेगी? दोस्तो बेतालघाट की इन बेटियों का ये रोष प्रशासन के मुँह पर एक करारा तमाचा है। आज पूरा देश देख रहा है कि देवभूमि में शिक्षा का क्या हाल है। हम मांग करते हैं कि इन मासूमों के भविष्य के साथ खिलवाड़ बंद हो और तुरंत यहाँ शिक्षकों की नियुक्ति की जाए। दोस्तो इस वीडियो को इतना शेयर कीजिए कि यह नैनीताल के डीएम से लेकर सूबे के शिक्षा मंत्री तक पहुँच जाए। इन बेटियों के हक के लिए कमेंट सेक्शन में #TeacherDo ज़रूर लिखें।