दोस्तो आज पूरी दुनिया कन्हा के जन्मदिन यानी जन्माष्टमी के जश्न में डूबी है, लेकिन ठीक इसी वक्त भगवान कृष्ण ने इस कलयुग में अपनी मौजूदगी का एक ऐसा साक्षात सबूत दिया है जिसे देखकर पूरी दुनिया दंग रह गई। नेपाल की वो मौ’त की सुरंग, जहाँ पिछले 216 घंटों से सिर्फ घुटन, कड़ाके की ठंड और मौत का सन्नाटा पसरा था। विज्ञान ने कह दिया था कि इतने दिनों बाद वहां किसी का बचना नामुमकिन है। लेकिन कैसे हुआ जन्माष्टमी के पावन दिन चमत्कार बताउंगा आपको पूरी खबर जब उस कालकोठरी को चीरकर नेपाली मजदूर संजय शाह जिंदा बाहर निकले, तो उन्होंने रोते हुए कैसे पूरी दुनिया के सामने ‘हरे कृष्णा’ महामंत्र की वो दिव्य शक्ति बताई जिसे सुनकर डॉक्टरों के होश उड़ गए! दोस्तो दोस्तो नेपाल की विनाशकारी बाढ़ के सबूत दशकों रहेंगे और पीड़ा का अंदाज लागाना भी मुश्किल है लेकिन आखिर बिना खाना, बिना पानी और बिना ऑक्सीजन के 9 दिनों तक नेपाली मजदूर संजय मौ’त के मुंह में कैसे मुस्कुराता रहा? कैसे जन्माष्टमी पर एक नया जीवन मिला? आज पूरी दुनिया योगेश्वर भगवान श्री कृष्ण का जन्मदिन यानी जन्माष्टमी मना रही है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि आज के ही दिन, ठीक इसी वक्त, भगवान ने अपनी मौजूदगी का एक ऐसा साक्षात सबूत दिया है जिसे देखकर नास्तिकों का भी सिर झुक जाएगा।
नेपाल की मौ’त की सुरंग, जहाँ पिछले 9 दिनों से सूरज की एक किरण तक नहीं पहुंची थी। जहाँ चारों तरफ सिर्फ घुटन, कड़ाके की ठंड और मौ’त का सन्नाटा था। विज्ञान कह रहा था कि वहां अब कोई जिंदा नहीं बचा होगा। लेकिन आज जन्माष्टमी के पावन दिन जब उस मलबे को चीरकर मैकेनिकल फोरमैन संजय शाह बाहर निकले, तो उन्होंने रोते हुए एक ऐसी बात कही जिसे सुनकर डॉक्टरों से लेकर रेस्क्यू टीम तक की आँखें भर आईं। आखिर 216 घंटे उस कालकोठरी में संजय ने खुद को कैसे जिंदा रखा? दोस्तो नेपाल-चीन बॉर्डर पर ग्लेशियर फटने के बाद त्रिशूली नदी में महातबाही आती है। त्रिशूली 3A हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट की सुरंग में अचानक पानी और मलबा भरने लगता है। उस वक्त संजय शाह कंट्रोल रूम में मौजूद थे, मौ’त सामने थी, लेकिन संजय ने खुद भागने के बजाय अपनी जान की परवाह न करते हुए, वहां मौजूद अपने बाकी साथी मजदूरों को चिल्लाकर बाहर भागने के लिए सचेत किया। संजय की इस जांबाजी की वजह से बाकी लोग तो टनल से बाहर निकल गए, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। एक बहुत बड़ा मलबा टनल के मुहाने पर गिर गया और संजय शाह हमेशा के लिए उस अंधेरी गुफा में दफन हो गए ये सब कितना डरावना था वो आप इस वीडियो को देख कर समझ सकते है। वहीं दोस्तो संजय शाह को लेकर डॉक्टरों के मुताबिक ऐसी स्थिति में 3 से 4 दिन में इंसान दम तोड़ देता है। लेकिन संजय शाह के पास एक ऐसी ताकत थी जिसे विज्ञान नहीं नाप सकता। अस्पताल ले जाते समय संजय ने बताया कि जब टनल पूरी तरह बंद हो गई, तो उन्हें समझ आ गया था कि अब इंसानी मदद पहुंचना नामुमकिन है। उन्होंने अपनी आँखें बंद कीं और पूरी श्रद्धा से एक ही महामंत्र का जाप शुरू कर दिया— ‘हरे कृष्ण, हरे कृष्ण, कृष्ण कृष्ण, हरे हरे’। संजय कहते हैं कि वो लगातार बिना रुके इस मंत्र को जपते रहे। इस मंत्र ने उन्हें न तो भूख लगने दी, न प्यास लगने दी और न ही डिप्रेशन में जाने दिया।
दोस्तो कहते हैं कि जो दूसरों के लिए अपनी जान दांव पर लगाता है, उसकी रक्षा खुद भगवान करते हैं। गीता में भगवान कृष्ण ने कहा है— “न मे भक्तः प्रणश्यति” यानी मेरे भक्त का कभी विनाश नहीं हो सकता और वही हुआ। शुक्रवार को जब देश-दुनिया में कान्हा के अवतरण की तैयारियां चल रही थीं, ठीक उसी दिन नेपाली सेना को टनल के भीतर से संजय की आवाज सुनाई दी। 50 मीटर से ज्यादा मलबे को हटाकर जब संजय शाह को सुरक्षित बाहर निकाला गया, तो लोगों के मुंह से बरबस ही निकल पड़ा— जय श्री कृष्णा! जन्माष्टमी के ही दिन संजय को यह नया जीवन मिलना किसी ईश्वरीय न्याय और चमत्कार से कम नहीं है। दोस्तो आज दुनिया भर के कृष्ण भक्त और इस्कॉन से जुड़े लोग इस घटना को ‘महामंत्र की शक्ति’ का साक्षात प्रमाण मान रहे हैं। संजय शाह की यह कहानी हमें सिखाती है कि जब चारों तरफ अंधेरा हो, जब सारे रास्ते बंद हो जाएं, तब भी अगर आपके पास ‘विश्वास’ की एक छोटी सी लौ है, तो वो मौत को भी मात दे सकती है। संजय शाह की सलामती ने टनल में फंसे बाकी 500 मजदूरों के परिवारों की उम्मीदों को भी जिंदा कर दिया है। दोस्तो जन्माष्टमी के दिन हुए इस अद्भुत और दिव्य चमत्कार पर आपकी क्या राय है? क्या आप भी मानते हैं कि आस्था में मौत को हराने की ताकत है? हमें कमेंट सेक्शन में ‘जय श्री कृष्णा’ लिखकर जरूर बताएं। वीडियो को लाइक और शेयर करना न भूलें। आप सभी को कृष्ण जन्माष्टमी की हार्दिक शुभकामनाएं।