जी हां दोस्तो जल जीवन मिशन में हो गई बड़ी गड़बड़ी, आखिर क्यों हाईकोर्ट को लेना पड़ा पड़ा एक्शन। जल जीवन मिशन के काम में सस्पेंस कैसा, क्यों हाईकोर्ट ने गड़बड़ी वाले ठेकेदारों का भुगतान रोका, दोस्तो खबर बेहद अहम है, जहां जल जीवन मिशन में बड़ी गड़बड़ी का मामला सामने आया है। Jal Jeevan Mission in Uttarakhand उत्तराखंड हाईकोर्ट ने जांच में पाई गई अनियमितताओं के चलते कई गांवों की पेयजल लाइनों के ठेकेदारों को भुगतान रोकने के निर्देश जारी किए हैं। इस फैसले से मिशन की प्रगति पर बड़ा असर पड़ सकता है। इस पूरे मामले को मेरी इस रिपोर्ट के जरिए आप बेहदर तरीके से समझ पाएंगे। वैसे दोस्तो इस जल जीवन मिशन को लेकर कई तरह के सवाल उठते रहे हैं। उन पर भी बात करूंगा लेकिन अभी खबर ये है कि उत्तराखंड हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार के द्वारा जारी जल जीवन मिशन के अंतर्गत टिहरी जिले के प्रताप नगर तहसील के 23 गांवों मे हर घर में जल ,व नल में जल की योजना में हुई भारी गड़बड़ियों और गबन के मामले में दायर जनहित याचिका पर सुनवाई की, तो मामले की सुनवाई करते हुए मुख़्य न्यायधीश जी नरेन्द्र व न्यायमूर्ति सुभाष उपाध्याय की खंडपीठ ने गड़बड़ी करने वाले पेयजल लाइनों के ठेकेदारों को भुगतान नहीं करने के निर्देश दिए हैं। साथ मे खण्डपीठ ने राज्य सरकार सहित उत्तराखंड पेयजल निगम से हलफनामा पेश करने को कह दिया।
दोस्तो इस मामले के अनुसार प्रतापनगर तहसील के भेलुंटा गांव के पूर्व प्रधान दिनेश चंद्र जोशी की ओर से दायर जनहित याचिका पर मुख्य न्यायाधीश जी नरेंदर और न्यायमूर्ति सुभाष उपाध्याय की खंडपीठ में सुनवाई हुई। जनहित याचिका में कहा गया कि प्रतापनगर तहसील में हर घर जल, हर घर नल योजना के तहत गांवों में पेयजल लाइन बिछाने का काम किया गया है, जो कार्य सम्बन्धित ठेकेदारों ने हवा हवाई तरीके से पूरा किया है, जो नल ढाई फिट जमीन के अंदर गड़ने चाहिए थे उन्हें ठेकेदार ने जमीन के ऊपर पेड़ों व जमीन पर गाड़ दिया है। जब इनका टेंडर हुआ था उसमें शर्ते यह थी कि जो भी पाइप लाइन बिछाई जएगी वह जमीन के अंदर ढाई फिट के अंदर होगी। पेयजल निगम व ठेकेदार तथा कार्यदायी संस्था ने इनका अनुपालन न करते हुए सम्बन्धित ठेकेदारों को लाभ पहुंचाने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाया। जिसकी वजह से उनके ग्रामों में आपदा के दौरान नियमित पानी की सप्लाई नहीं हो पा रही है। इसलिए इस प्रकरण की जांच कराई जाये, इसमें शामिल कर्मचारियों के खिलाफ एक्शन लिया जाये। जनहित याचिका में कहा गया है कि मानकों के अनुसार काम नहीं किया गया है। टिहरी जिले के प्रतापनगर तहसील के भेलुंटा गांव में जल जीवन मिशन के तहत किए गए पेयजल पाइपलाइन बिछाने के कार्य में भारी गड़बड़ी सामने आई है। इस मामले में भेलुंटा गांव के पूर्व प्रधान दिनेश चंद्र जोशी ने जनहित याचिका दायर की, जिसमें कहा गया कि योजना के तहत गांवों में पेयजल लाइनों का काम हवा-हवाई तरीके से किया गया है। नियम के अनुसार पाइपलाइन को जमीन के अंदर ढाई फीट गहरा बिछाना अनिवार्य था, लेकिन ठेकेदारों ने यह काम पूरी तरह से अनदेखा कर दिया और पाइपलाइन को जमीन के ऊपर पेड़ों के नीचे और सतह के करीब डाल दिया।
दोस्तो इतना भर नहीं था, गड़बड़ी न केवल योजना के मानकों के उल्लंघन का उदाहरण है, बल्कि इससे ग्रामीण इलाकों में आपदा के समय भी पानी की नियमित आपूर्ति में बाधा आ रही है। याचिका में यह भी आरोप लगाया गया कि पेयजल निगम, ठेकेदार और कार्यदायी संस्थान ने इस मामले को गंभीरता से नहीं लिया और दोषी ठेकेदारों को लाभ पहुंचाने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाए। याचिकाकर्ता ने कोर्ट से इस मामले की जांच कराने और दोषी कर्मचारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की। इस मामले की सुनवाई उत्तराखंड हाईकोर्ट की खंडपीठ में मुख्य न्यायाधीश जी नरेंदर और न्यायमूर्ति सुभाष उपाध्याय की अध्यक्षता में हुई। सुनवाई के दौरान अधिशासी अभियंता ने भी भेलुंटा, देवल, खेतगांव और खोलगढ़ जैसे गांवों में पेयजल लाइनों में गड़बड़ी की बात स्वीकार की। उन्होंने माना कि कई गांवों में पाइपलाइनें मानक के अनुरूप नहीं बिछाई गई हैं। दोस्तो खबर तो ये भी है कि सरकार ने भी इस बात को स्वीकार करते हुए कहा कि जिन गांवों में मानकों के अनुरूप काम नहीं हुआ है, वहां का भुगतान रोक दिया गया है। याचिकाकर्ता के अधिवक्ता पूरण सिंह रावत ने बताते है कि कोर्ट ने उन गांवों की पेयजल लाइनों के भुगतान रोकने के निर्देश दिए हैं, जहां गड़बड़ी पाई गई है। इससे साफ संकेत मिलता है कि जल जीवन मिशन के कार्यान्वयन में अनियमितताओं पर कोर्ट गंभीर है और इसे रोकने के लिए सख्त कदम उठाएगा। दोस्तो ये मामला न केवल जल जीवन मिशन की पारदर्शिता पर प्रश्नचिन्ह लगाता है, बल्कि ग्रामीण जनता के अधिकारों की रक्षा की भी मांग करता है। क्योंकि हर घर जल और हर घर नल योजना का उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में स्वच्छ और पर्याप्त पेयजल उपलब्ध कराना है, लेकिन यदि पाइपलाइनें सही तरीके से नहीं बिछाई जाएं, तो यह योजना अपने लक्ष्य को पूरा नहीं कर पाएगी।
इसलिए ये जरूरी है कि सरकार और संबंधित विभाग गड़बड़ी की जांच कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई करें, ताकि भविष्य में ऐसी लापरवाहियां न हों और ग्रामीण जनता को योजना का पूरा लाभ मिल सके। दोस्तो इस मामले की अगली सुनवाई 1 दिसंबर को निर्धारित की गई है। तब तक उम्मीद की जा रही है कि जांच पूरी हो जाएगी और उचित फैसले से जल जीवन मिशन की विश्वसनीयता बनी रहेगी। दोस्तो ये रिपोर्ट टिहरी के ग्रामीण इलाकों में पेयजल आपूर्ति से जुड़ी महत्वपूर्ण समस्या को सामने लाती है और उच्च न्यायालय के कदमों से इस मामले की गंभीरता का पता चलता है। दोस्तो टिहरी जिले के प्रतापनगर तहसील से सामने आया ये मामला एक बार फिर इस बात की याद दिलाता है कि जब जिम्मेदारी निभाने में लापरवाही होती है, तो उसका असर सीधे जनता पर पड़ता है — खासकर उन ग्रामीण परिवारों पर, जिनके लिए हर घर जल सिर्फ एक सरकारी नारा नहीं, बल्कि ज़िंदगी की ज़रूरत है। जल जीवन मिशन जैसी महत्वपूर्ण योजना, जिसका उद्देश्य देश के हर घर तक स्वच्छ और सुरक्षित पेयजल पहुंचाना है — अगर उसमें मानकों को ताक पर रखकर कार्य किया जाए, तो यह सिर्फ एक तकनीकी चूक नहीं बल्कि सामाजिक विश्वास का भी हनन है। हाईकोर्ट की खंडपीठ द्वारा मामले में संज्ञान लेना, सरकार द्वारा गड़बड़ी स्वीकारना और संबंधित गांवों में भुगतान रोकने का फैसला — ये सब दर्शाता है कि अब ऐसी लापरवाहियों को नजरअंदाज नहीं किया जाएगा, ये सिर्फ एक गांव की बात नहीं, बल्कि उन सैकड़ों गांवों की आवाज़ है जो योजनाओं के क्रियान्वयन में पारदर्शिता और ईमानदारी की उम्मीद रखते हैं। आगे इस मामले की सुनवाई 1 दिसंबर को होगी, लेकिन इससे पहले ज़रूरत इस बात की है कि जिम्मेदार एजेंसियां इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों को चिन्हित करें और भविष्य के लिए ऐसा सिस्टम तैयार करें जहां विकास की योजनाएं सिर्फ कागजों में पूरी न हों, बल्कि ज़मीन पर ईमानदारी से उतरें। मेरी नजर इस पूरी खबर पर बनी रहेगी, हर अपडेट आप तक पहुंचाता रहूंगा लेकिन आप क्या कहेंगे इस खबर को लेकर आप कमेंट के जरिए बता सकते हैं, क्योंकि इस योजना को लेकर कई सवाल अभी भी हैं जैसे कहीं नल नहीं पहुंचे। कहीं नल पहुंचे तो जल नहीं पहुंचा कही दोनों पहुंचे तो वहां पाइप लाइन बिछाने पर सवाल उठे हैं।