देहरादून से एक बार फिर वही सवाल गूंज रहा है—आखिर एंजेल चकमा को इंसाफ कब मिलेगा? चार महीने बीत गए, लेकिन मुख्य आरोपी यज्ञ अवस्थी अब भी पुलिस की गिरफ्त से बाहर क्यों है? क्या जांच में कहीं चूक हुई है या सिस्टम की सुस्ती इस केस पर भारी पड़ रही है?परिवार आज भी न्याय की आस में है—एक पिता सरहद पर देश की रक्षा कर रहा है, लेकिन अपने ही बेटे के लिए इंसाफ का इंतजार कर रहा है। क्या उत्तराखंड पुलिस इस मामले में जल्द कोई ठोस कार्रवाई कर पाएगी? और आखिर कब तक फरार रहेगा आरोपी? दोस्तो मै आपको एक छात्र की हत्या के आरोपियों की पुलिस की पकड़ दूरी क्यों है ये बताउँ उससे पहले थोड़ा इस नई और ताजा खबर देख लीजिए। दोस्तो देहरादून एसएसपी प्रमेंद्र डोबाल ने देहरादून जिले के पुलिस महकमे में बहुत बड़ा फेरबदल किया है। एक साथ 50 से ज्यादा थानाध्यक्षों और चौकी प्रभारियों का तबादला किया गया है. ये तबादले देर रात किए गए हैं। बताया जा रहा है कि नए एसएसपी ने देहरादून जिले की खस्ताहाल कानून व्यवस्था को मजबूत करने के लिए ये ट्रांसफर किए हैं। दोस्तो, SSP देहरादून ने 54 पुलिसकर्मियों का तबादला किया है। इनमें 6 इंस्पेक्टर, 40 दरोगा और 8 महिला दारोगा शामिल हैं, जिन थानाध्यक्षों और चौकी प्रभारियों का तबादला किया गया है और दोस्तो खुद देहरादून के एसएसपी को इस लिए लाया गया कि वो ऐसे मामले में तुरंत कार्रवाई करेंगे जो देहरादून के लिए बड़ी चुनौती बने हुए है, लेकिन बड़ी हैरान तब होती है जब उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में करीब चार महीने पहले त्रिपुरा के 24 वर्षीय चात्र एंजेल चकमा की हुई हत्या का मुख्य आरोपित यज्ञ अवस्थी अब तक पुलिस की गिरफ्त से बाहर है।
दोस्तो एंजेल का परिवार अब भी दावा कर रहा है कि उनके बेटे की हत्या नस्लीय कमेंट के विरोध करने पर हुआ था, लेकिन आज तक मुख्य आरोपी यज्ञ अवस्थी फरार है और पीड़ित परिवार न्याय का इंतजार कर रहा है। वहीं दोस्तो टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक एंजेल के पिता तरुण प्रसाद चकमा ने बताया कि वह फिलहाल त्रिपुरा में भारत-बांग्लादेश बॉर्डर पर तैनात हैं। उन्होंने कहा कि वह बहुत ही गहरे दुख और पीड़ा में हैं फिर भी अपनी ड्यूटी निभाने के लिए प्रतिबद्ध हैं। उन्होंने कहा, “मैं अंदर से पूरी तरह टूट गया हूं, लेकिन इस त्रासदी के बावजूद मैंने अपनी नेशनल ड्यूटी नहीं छोड़ी। न इस्तीफा दिया और न ही वीआरएस लिया. मैं अपनी पूरी सेवा अवधि पूरी करूंगा. मैं अपने देश की सीमाओं की रक्षा कर रहा हूं और उम्मीद करता हूं कि देश मुझे न्याय देगा।” दोस्तो पिता ने कहा- छोटा बेटा अपनी भाई की हत्या का जिम्मेदार खुद को मानता है। दोस्तो तरुण प्रसाद चकमा ने हाल ही में अपने परिवार की देखभाल के लिए मणिपुर से अपने गृह राज्य में ट्रांसफर लिया. उन्होंने बताया कि उनकी पत्नी और छोटा बेटा माइकल, जो 9 दिसंबर 2025 को हुई घटना के समय एंजेल के साथ था। वह अब तक इस सदमे से उबर नहीं पाए हैं। चकमा ने कहा, “मेरी पत्नी लगातार रोती रहती हैं। माइकल ज्यादातर समय चुप रहता है और खुद को एंजेल की मौत का जिम्मेदार मानता है। उन्हें इस हालत में देखकर मेरा दिल रो पड़ता है.” दोस्तो यहां आपको बता दूं कि एंजेल और उसके भाई माइकल पर छह आरोपियों ने नस्लीय टिप्पणियों का विरोध करने पर हमला किया था। एंजेल को गर्दन और पीठ के निचले हिस्से में गंभीर चोटें आई थीं. उसे एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां 26 दिसंबर को उसकी मौत हो गई। अंजेल के चाचा मोमेन चकमा ने कहा कि उन्हें उम्मीद है कि जल्द न्याय मिलेगा और मुख्य आरोपी अवस्थी को गिरफ्तार किया जाएगा, तो देहरादून का यह मामला सिर्फ एक हत्या का नहीं, बल्कि न्याय व्यवस्था और पुलिस की कार्रवाई पर उठते बड़े सवालों का बन चुका है। आखिर चार महीने बाद भी मुख्य आरोपी यज्ञ अवस्थी पुलिस की पकड़ से बाहर क्यों है? क्या जांच की रफ्तार धीमी है या कहीं कोई बड़ी चूक हो रही है? और सबसे अहम—क्या पीड़ित परिवार को समय पर इंसाफ मिल पाएगा?एक तरफ पिता Tarun Prasad Chakma सरहद पर देश की सेवा कर रहे हैं, तो दूसरी तरफ अपने ही बेटे के लिए न्याय का इंतजार कर रहे है। यह सवाल सिर्फ एक परिवार का नहीं, बल्कि पूरे सिस्टम पर है। अब देखना होगा कि उत्तराखंड पुलिस इस मामले में कब तक ठोस कार्रवाई करती है और फरार आरोपी को कानून के शिकंजे तक पहुंचाती है।