तेल संकट के बीच मंत्री जी स्कूटी पर! | Uttarakhand News | Ganesh Joshi | Dehradun News | Viral News

Spread the love

क्या देश में तेल संकट की आहट के बीच नेताओं ने अब संदेश देना शुरू कर दिया है?क्या उत्तराखंड के मंत्री का कार छोड़ स्कूटी से दफ्तर पहुंचना सिर्फ सादगी थी या जनता को बड़ा संकेत देने की कोशिश?लेकिन आखिर ऐसा क्या हुआ कि संदेश देने की जगह अब उनकी किरकिरी होने लगी? बताउँगा आपको पूरी खबर अपनी इस रिपोर्ट के जरिए। दोस्तो वैश्विक हालात और ईंधन संकट की चर्चाओं के बीच उत्तराखंड के कृषि मंत्री गणेश जोशी स्कूटी से अपने कैंप कार्यालय पहुंचे और इसका वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया।दोस्तो मंत्री का मकसद शायद तेल बचाने और सादगी का संदेश देना था, लेकिन लोगों की नजर एक ऐसी बड़ी चूक पर पड़ गई जिसके बाद सोशल मीडिया पर सवाल उठने लगे तो आखिर मंत्री जी से क्या गलती हो गई? क्या जनता ने उनके संदेश को गंभीरता से लिया या फिर यह उल्टा पड़ गया? दोस्तो मै आपको उत्तराखंड के मंत्री का विवादित संदेश दिखाउं उससे पहले जरा आप देश के दोस्तो वैसे ये कोई बयान नहीं है,एक अपील है जो पीएम मोदी देश को लगों को सचेत कर रहे हैं, लेकिन सवाल तो ये भी है क्यों ऐसी अपील की जा रही है। क्या देश पर कोई बड़ा संकट मंडरा रहा है जरा देखिए ना क्या क्या कहा है पीएम मोदी ने अपने भाषण में भारत के लोगों से पेट्रोल और डीज़ल को लेकर किफ़ायत बरतने को कहा है साथ ही एक साल तक सोना न ख़रीदने और खाने का तेल कम इस्तेमाल करने की अपील की और इस दौरान लोगों से विदेश यात्रा टालने की अपील भी की।

दोस्तो बीजेपी के कई नेताओं ने पीएम के इस भाषण को शेयर करते हुए उनकी अपील को दोहराया। कुछ विशेषज्ञों ने पीएम के भाषण को डीकोड करते हुए भारत को मुश्किल दिनों से तैयार रहने के लिए कहा तो वहीं विपक्ष ने आरोप लगाया कि ईरान वॉर से पैदा हुए हालात को सरकार ठीक से हैंडल नहीं कर पा रही है और इस मुश्किल को हैंडल करने की ज़िम्मेदारी जनता के कंधों पर डाल रही है। लेकिन दोस्तो पीएम मोदी के इसी संदेश को अमलिजामा पहाने के चक्कर में उत्तराखंड के मंत्री गणेश जोशी हड़बड़ी में गड़बड़ी कर गए। अब आपको बताता हूं वो गड़बड़ी जिससे एक बार फिर जोशी विपक्ष के साथ ही तमाम बुद्धिजिवियों के निशाने पर हैं। दोस्तो प्रदेश के कृषि मंत्री गणेश जोशी ने गढ़ी कैंट में आयोजित एक कार्यक्रम के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आह्वान पर पश्चिमी एशिया में जारी युद्ध एवं वैश्विक परिस्थितियों को देखते हुए पेट्रोल-डीजल की बचत का संदेश दिया। ठीक है संदेश दिया जहां जोशी ने अपने शासकीय वाहन का उपयोग न करते हुए दो पहिया वाहन स्कूटी से अपने कैंप कार्यालय पहुंचकर आमजन को ईंधन संरक्षण के प्रति जागरूक करने का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि वर्तमान वैश्विक परिस्थितियों में प्रत्येक नागरिक की जिम्मेदारी है कि वह संसाधनों का संयमित उपयोग करे और अनावश्यक ईंधन खपत से बचे, लेकिन दोस्तो ने जब जोशी जी की इस पहल को अपना चाहा तो पता चला की जोशी जी के संदेश का वीडियो बनाने वाले खुद कार मै बैठक कर वीडियो बना रहे हैं। जब वीडियो सूट हो रह है तो साफ दिखाई देता है कि वीडियो बनाने वाले वीडियो ग्राफर साहब कार बठे हैं।

अब इस संदेश को आज जन कैसे देखेगा, एक तरफ पेट्रोल-डीजल की खपत को कम करने का संदेश और दूसरी तरफ वीडियो बनाने के लिए लगा दी गई कार। वैसे जोशी जी ने प्रदेशवासियों से अपील करते हुए कहा कि छोटी दूरी के लिए यथासंभव दो पहिया वाहन, सार्वजनिक परिवहन या साझा वाहन का उपयोग करें, जिससे पेट्रोल-डीजल की बचत के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण में भी योगदान दिया जा सके, लेकिन तब क्यो हो जोशी जब वीडियो बनाने के लिए कार। अब ये संदेश तो हर कोई देना चाहता है, मेरे जासा लेकिन वो कार कहां से लाएगा जो साथ में चलते-चलते वीडियो बना पाएं। दोस्तो एक तरफ सोना नहीं करने वाली अपील पर जहां देश का सर्फा कारोबारी काफी नाराज दिखाई दे रहा है। वहीं सुनने में तो ये भी आया है कि उत्तराखंड के मानीय मंत्री विधायक नेता तमाम कर्मचारी, सराकारी वाहनों का इस्तेमाल बच्चों को स्कूल छोड़ने अपनी पत्नियों को कार्यलय छुड़वाने में कर रहे हैं, हालांकि दोस्तो बीच एक बात आपने खूब सुनी होगी। जिसके पास जितने मंत्रालय या विभाग हैं वो नेता या कर्मचारी उतनी विभागों की गाड़ी का इस्तेमाल कर रहा है, तब एक अपील उत्तराखंड शासन स्तर होती दिखाई दी, जिसमें ये कहा गया वो तामाम नेता अधिकारी एक ही वाहन का इस्तेमाल करेंगे, लेकिन बहुत कम लोगों ने इस नियम को फोलो किया। बांकि तो नियम कायदों ऊपर हो कर खूब सरकारी पेट्रोल-डीजल फूंक रहे हैं। दोस्तो, संदेश देना गलत नहीं है बल्कि वक्त की जरूरत है। अगर वैश्विक हालात को देखते हुए ईंधन बचाने की अपील की जा रही है, तो जाहिर है हर नागरिक की जिम्मेदारी भी बनती है कि संसाधनों का सोच-समझकर इस्तेमाल करे, लेकिन सवाल तब खड़े होते हैं। जब संदेश और ज़मीनी तस्वीर में फर्क दिखाई देने लगे, जनता अब सिर्फ भाषण या प्रतीकात्मक तस्वीरें नहीं बल्कि नेताओं और सिस्टम से व्यवहारिक उदाहरण भी देखना चाहती है।अगर आम लोगों से पेट्रोल-डीजल बचाने की अपील हो रही है, तो फिर सरकारी संसाधनों के इस्तेमाल को लेकर भी पारदर्शिता और सख्ती दिखनी चाहिए। वरना ऐसे संदेश सोशल मीडिया पर प्रेरणा कम और चर्चा ज्यादा बन जाते हैं फिलहाल इस पूरे मामले पर आपकी क्या राय है। क्या मंत्री जी की पहल सही थी या फिर संदेश देने के तरीके ने सवाल खड़े कर दिए?हमें कमेंट करके जरूर बताइए।