Uttarakhand के सपूत को राष्ट्रीय सम्मान | Padma Bhushan | Bhagat Singh Koshyari | Uttarakhand News

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उत्तराखंड की राजनीति से निकलकर राष्ट्रीय पटल तक अपनी अलग पहचान बनाने वाले पूर्व मुख्यमंत्री भगत सिंह कोश्यारी आज एक और बड़ी उपलब्धि अपने नाम कर चुके हैं। देश के प्रतिष्ठित पद्म भूषण सम्मान से उन्हें नवाजा गया है, और इस खबर के सामने आते ही देहरादून से लेकर दिल्ली तक चर्चाओं का दौर तेज हो गया। एक ऐसा नेता, जिसने संगठन से लेकर सरकार तक कई अहम जिम्मेदारियां निभाईं और अब अपने लंबे राजनीतिक सफर का एक और सुनहरा अध्याय जोडा राजनीति से सम्मान तक का यह सफर आखिर कितना खास रहा और किन उपलब्धियों ने उन्हें इस मुकाम तक पहुंचाया। देखिए मेरी ये रिपोर्ट मे। दोस्तो उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और महाराष्ट्र के पूर्व राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी को पद्म भूषण सम्मान से सम्मानित किया गया है..यह सम्मान राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु के हाथों मिला। भगत कोश्यारी को ये सम्मान पब्लिक अफेयर्स के क्षेत्र में उनके लंबे, समर्पित और प्रभावशाली योगदान के लिए दिया गया है। दोस्तो यहां मै आपको बता दूं कि भगत सिंह कोश्यारी को ‘भगत दा’ के नाम से जाना जाता है, जो सामाजिक कार्यकर्ता, शिक्षाविद्, पत्रकार और राष्ट्रवादी नेता के रूप में पहचाने जाते हैं। उन्होंने अपना जीवन जन सेवा और समाज के गरीब व पिछड़े वर्गों के उत्थान के लिए समर्पित किया। वे आरएसएस यानी राष्ट्रीय स्वयंसेवक के स्वयंसेवक भी हैं।

दोस्तो जब बात कोशिय़ारी की आती है तो उनके संघर्षमय जीवन को देखना लाजमी है। साल 1966 में पिथौरागढ़ जिले में ‘सरस्वती शिशु मंदिर’ की स्थापना की, जिससे दूरदराज के क्षेत्रों में शिक्षा के अवसरों को मजबूती मिली। साल 2008 में भगत सिंह कोश्यारी राज्यसभा के लिए चुने गए और साल 2014 में वो नैनीताल-उधम सिंह नगर निर्वाचन क्षेत्र से लोकसभा के लिए चुने गए। दोस्तो भगत सिंह कोश्यारी का जन्म 17 जून 1942 को बागेश्वर जिले के पहाड़ी इलाके के सुदूर गांव पलानधुरा में हुआ था। अपनी ग्रामीण पृष्ठभूमि के बावजूद उन्होंने उच्च शिक्षा हासिल की। साल 1964 में आगरा विश्वविद्यालय से संबद्ध अल्मोड़ा कॉलेज से अंग्रेजी साहित्य में स्नातकोत्तर की डिग्री ली। दोस्तो भगत सिंह कोशिय़ारी ने साल 1964-1965 के दौरान राजा का रामपुर (एटा, उत्तर प्रदेश) में लेक्चरर के रूप में अपने पेशेवर करियर की शुरुआत की। हालांकि, शिक्षा के माध्यम से राष्ट्र निर्माण की दृष्टि से प्रेरित होकर उन्होंने साल 1965 के बाद से खुद को पूरी तरह से शैक्षणिक और समाज सेवा के लिए समर्पित कर दिया। दोस्तो भगत कोश्यारी ने सरस्वती शिशु मंदिर कासगंज (उत्तर प्रदेश) में पढ़ाना शुरू किया। जहां उन्होंने छोटे बच्चों को आधुनिक शिक्षा के साथ भारतीय मूल्य प्रदान करने का काम किया। साल 1966 में उन्होंने पिथौरागढ़ में ‘सरस्वती शिशु मंदिर’ की स्थापना की।

इसके अलावा दोस्तो, पिथौरागढ़ में ही विवेकानंद इंटर कॉलेज की स्थापना में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और सरस्वती विहार (नैनीताल) से सक्रिय रूप से जुड़े रहे. उन्होंने कई सालों तक आरएसएस के विभाग कार्यवाहक के रूप में काम किया और बाद में उत्तरांचल उत्थान परिषद के सचिव बने, जो उत्तराखंड में प्राथमिक और माध्यमिक शिक्षा के विकास के लिए समर्पित संगठन है। दोस्तो साल 1979 से 1990 तक वे कुमाऊं विश्वविद्यालय की कार्यकारी परिषद के सदस्य रहे, जहां उन्होंने शैक्षिक नीति और संस्थागत विकास में अहम योगदान दिया। उन्होंने जागरूकता और सामाजिक चेतना को बढ़ावा देने के लिए पिथौरागढ़ से हिंदी साप्ताहिक ‘पर्वत पीयूष’ के प्रकाशन की भी शुरुआत की। दोस्तो आपातकाल के दौरान भगत दा को आंतरिक सुरक्षा रखरखाव अधिनियम (मीसा) के तहत गिरफ्तार भी किया गया था। तो इधर साल 1997 में उन्हें उत्तर प्रदेश विधान परिषद के लिए नामित किया गया। नवंबर 2000 में उत्तरांचल के गठन के बाद वे राज्य के पहले मंत्रिमंडल में कैबिनेट मंत्री बने। इसके बाद में थोड़े समय के लिए उत्तरांचल (अब उत्तराखंड) के मुख्यमंत्री के रूप में काम किया. उन्होंने उत्तराखंड विधानसभा में विपक्ष के नेता के रूप में भी काम किया।

साल 2008 में वे राज्यसभा के लिए चुने गए और 2014 में वे नैनीताल-उधम सिंह नगर निर्वाचन क्षेत्र से लोकसभा के लिए चुने गए। दोस्तो कोशियारी का समाजिक और राजनीतिक जीवन बड़ा ही दिलचस्प रहा है। दोस्तो उत्तराखंड में ऊर्जा मंत्री के रूप में उन्होंने लंबे समय से लंबित टिहरी हाइड्रो परियोजना को आगे बढ़ाने में अहम भूमिका निभाई, जिसमें टिहरी के ऐतिहासिक शहर और जिला मुख्यालय का स्थानांतरण शामिल था। उन्होंने राज्यसभा और लोकसभा दोनों में याचिका समिति के अध्यक्ष के रूप में भी काम किया। इतना ही नहीं दोस्तो इस दौरान उन्होंने ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेलवे लाइन समेत वन रैंक वन पेंशन, रेल कनेक्टिविटी और बुनियादी ढांचे के विकास जैसे महत्वपूर्ण सार्वजनिक मुद्दों पर विस्तृत सिफारिशें पेश कीं। इसके बाद भगत सिंह कोशियारी 5 सितंबर 2019 को महाराष्ट्र के राज्यपाल के रूप में नियुक्त किया गया। दोस्तो जहां कोशियारी ने प्रभावी ढंग से सेवा की और राज्य के करीबन सभी जिलों के साथ कई ऐतिहासिक रूप से महत्वपूर्ण किलों का दौरा किया। इसके अलावा अगस्त 2020 में भगत सिंह कोश्यारी के रूप में गोवा के राज्यपाल (अतिरिक्त प्रभार) के रूप में भी नियुक्त किया गया था। इसके अलावा दोस्तो शिक्षा और राजनीति में उनके योगदान के अलावा भगत सिंह कोश्यारी एक लेखक भी हैं.।उन्होंने ‘उत्तरांचल प्रदेश क्यों’ और ‘उत्तरांचल प्रदेश: संघर्ष एवं समाधान’ नामक दो किताबें लिखी एवं प्रकाशित की और आज उन्हें बड़ा सम्मान मिला है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु उन्हें पद्म भूषण से सम्मानित किया, तो दोस्तो एक शिक्षक से लेकर समाजसेवी, पत्रकार, विधायक, सांसद और फिर राज्यपाल तक का यह लंबा और संघर्षपूर्ण सफर आज एक और ऐतिहासिक सम्मान के साथ दर्ज हो गया है।भगत सिंह कोश्यारी, जिन्हें लोग प्यार से “भगत दा” के नाम से जानते हैं। उनके जीवन की सबसे बड़ी खासियत रही है—जनसेवा और शिक्षा के प्रति समर्पण।चाहे पहाड़ों में शिक्षा के लिए संस्थान खड़ा करना हो या फिर राजनीति में रहकर विकास की नई राहें खोलना उन्होंने हर भूमिका को जिम्मेदारी के साथ निभाया।और , राष्ट्रपति द्वारा पद्म भूषण सम्मान से नवाजे जाने के साथ उनका यह पूरा जीवन एक प्रेरणादायक मिसाल बन गया है।देहरादून से लेकर दिल्ली तक उनकी इस उपलब्धि की चर्चा है और यह सम्मान उनके लंबे सार्वजनिक जीवन की एक महत्वपूर्ण पहचान बनकर सामने आया है।