जी हां दोस्तो सियासी तस्वीरें भी बहुत कुछ कहती हैं, शब्दों से ज़्यादा असर कभी-कभी एक फ्रेम में कैद इशारे और चेहरे छोड़ जाते हैं। राजनीति में हर मुस्कान, हर मुलाकात और हर दूरी — अपने पीछे एक कहानी छुपाए होती है और इन तस्वीरों को पढ़ना ही असल में जनता का नया नज़रिया बन जाता है और आज कल ऐसा ही बहुत कुछ उत्तराखंड बीजेपी में चल रहा है। फिर वो चाहे गदरपुर के गुल्लरभोज का पावर सेंटर बनना हो या फिर उसके बाद गदरपुर पहुंचे दो बड़े नेतओं को शिखंडी और कालिचरण कहना हो। पूरी खबर बताउंगा आपको कैसे बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नीतिन नवीन के दौरे से ठीक पहले बीजेपी मे हुआ कुछ ऐसा की सीधे सीएम धामी को मोर्चा संबालना पड़ा। दोस्तो उत्तराखंड बीजेपी में जो हाल में कुछ मिलाकातें हुई उन्होंने सियासी चर्चाओं को बल दिया कि क्या बीजेपी के भीतर गुटबाजी अपने चरम पर पहुंच चुकी है। सबसे पहले में आपको कुछ पोस्ट दिखाता हूं, याद रखिएगा ये तब हो रहा है। जब बीजेपी की अंदुरुनी नब्ज को टटोलने के लिए नितिन नवीन तैयार हैं, ये पोस्ट देखिए लाल सिंह कोरंगा की है। ये कौन हैं बीजेपी में क्या पद रखते हैं वो बाद की बात हैं लेकिन इन्हों ने लिखा क्या बीच बीच में, गुट की टूट चुकी उम्मीदें, फिर कुलांचें भरने लगती है साफ किया है गया है कि विकास के कीर्तिमान स्थापित करने वाले लोकप्रिय के नेतृत्व में ही 2027 का विधानसभा चुनाव, लड़ा जाएगा। हाड़-तोड़ कोशिश में जुटे, गुट में मायूसी छा गई है बल। खीझयाया गैंग को याद रखना चाहिए, राज्य में #नकलरोधी कानून लाकर पारदर्शी व्यवस्था बनाई गई है। आपका हर नकल रोधी साजिश को रोक दिया जाएगा।
बगावती तेवर दिखाने वाले से मिले कालीचरण भोर शिरखंडी !लोकप्रिय की छवि खराब करने की हो रही साजिश। दोस्तो ये सब लिखा गया तो ये भी बता हूं ये हैं कौन ये हैं प्रदेश सह-संयोजक सोशल मीडिया बीजेपी उत्तराखंड, अब सवाल आता है कि ये लिखने की जरुरत क्यों पड़ी और किसके लिए लिखा गया। दोस्तो कहने वालों ने आकलन किया इसका कनैक्शन हाल में गदरपुर के विधायक अरिविंद पांडे से मिलने पहुंचे दो दिग्गज नेताओं से निकाला गया जहां पहुंचे पहले सांसद अनिल बलूनी और फिर दूसरे दिन पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत अब इनमें कौन क्या है ये तो आप लोग ही जानों लेकिन दोस्तो गदरपुर विधानसभा से उठी अंदरूनी खींचतान की कहानी अब प्रदेशभर में चर्चा का विषय बन चुकी है। विधायक अरविंद पांडेय के आवास तक पहुंची राजनीतिक हलचल के बाद, भाजपा के भीतर ही तीखी बयानबाज़ी और आरोप-प्रत्यारोप सामने आ रहे है। प्रदेश पदाधिकारी लालसिंह कोरंगा के सोशल मीडिया पोस्ट से लेकर पार्टी के ही कुछ नेताओं द्वारा वरिष्ठ चेहरों को लेकर उठाए जा रहे सवालों ने माहौल को और गर्म कर दिया है, जहां एक ओर संगठनात्मक एकजुटता की बात की जा रही है, वहीं दूसरी ओर असंतोष और बयानबाज़ी ने पार्टी नेतृत्व के सामने नई चुनौती खड़ी कर दी है खास बात यह है कि यह पूरा घटनाक्रम उस वक्त सामने आया है जब प्रदेश में एक अहम राजनीतिक डिनर डिप्लोमेसी की तैयारी चल रही है। दोस्तो जो अरविंद पांडे से मुलाकात करने के लिए बारी-बारी पहुंचे यानि की सांसद अनिल बलूनी और त्रिवेंद्र सिंह रावत पार्टी प्रदेश अध्यक्ष के साथ सीएम धामी के साथ मिलते मिलाते नजर आए। अब मेने कहा था शुरुआत में की तस्वीरें पहुंच कुछ कहती हैं यहां इतनी बड़ी तस्वीर पर इतने बड़े हंगामे के बाद वॉयस म्यूट थी लेकिन चेहरे पहुंत कुछ कह रहे थे। दोस्तो तो क्या कहती है ये वाली तस्वीर आप अपनी राय के जरिए कमेंट के जरिए जरूर बताना बीजेपी में सब कुछ ठीक है या फिर कुछ और कुमाऊं क्षेत्र से लगातार सामने आ रहे ऐसे बयानों ने राजनीतिक गलियारों में चर्चाओं को और तेज कर दिया है। अब निगाहें इस पर टिकी हैं कि पार्टी नेतृत्व इस अंदरूनी उथल-पुथल को कैसे संभालता है।