बर्फबारी, कड़ाके की ठंड और श्रद्धालुओं की लंबी कतार, बाबा केदार के दरबार में पहुंचीं सारा अली खान! नॉन-सनातनी विवाद और एफिडेविट की मांग के बीच बाबा के धाम पहुंचीं सारा! लेकिन इस बार सारा की केदारनाथ यात्रा सिर्फ दर्शन तक सीमित नहीं है। गैर-सनातनियों के प्रवेश और आस्था के शपथपत्र को लेकर चल रही बहस के बीच उनकी मौजूदगी ने कई सवाल खड़े कर दिए हैंआखिर बाबा केदार से सारा का रिश्ता इतना खास क्यों है? और बार-बार धाम पहुंचकर वह क्या संदेश देती हैं?देखिए, केदारनाथ से सारा अली खान की आस्था और विवाद की पूरी कहानी! दोस्तो आस्था जब अटूट हो, तो न मौसम की मार मायने रखती है और न ही सियासत का शोर! बॉलीवुड के नवाब सैफ अली खान की बेटी सारा अली खान एक बार फिर बाबा केदारनाथ के दर पर हाजिरी लगाने पहुंची हैं। लेकिन इस बार की उनकी यह यात्रा सिर्फ एक आम दर्शन नहीं है। केदारनाथ-बद्रीनाथ में ‘गैर-सनातनियों के प्रवेश’ और ‘आस्था के एफिडेविट’ को लेकर मचे भारी राष्ट्रीय विवाद के ठीक बीच, सारा अली खान ने रविवार को केदारधाम पहुंचकर सबको चौंका दिया है। दोस्तो हैरान करने वाली बात ये है कि वीआईपी होने के बावजूद, सारा कड़ाके की ठंड और बर्फबारी के बीच करीब आधे घंटे तक आम श्रद्धालुओं की कतार में खड़ी रहीं। इस दौरान कई लोग तो उन्हें पहचान भी नहीं पाए! आखिर जिस अभिनेत्री के नाम पर मंदिर समिति ने एफिडेविट देने की शर्त रख दी थी, उन्होंने बिना किसी शोर-शराबे के बाबा के दर पर सिर झुकाकर ट्रोलर्स को क्या संदेश दिया है? दोस्तो सिनेमाघरों में अपनी नई फिल्म ‘उड़ता तीर’ के रिलीज होने के तुरंत बाद, सारा अली खान रविवार को सीधे बाबा केदारनाथ के धाम पहुंचीं। पहाड़ों पर इस वक्त कड़ाके की ठंड है और तेज बर्फबारी हो रही है। शॉल, दस्ताने और ऊनी टोपी में लिपटीं सारा अली खान किसी वीआईपी प्रोटोकॉल की आड़ में नहीं छिपीं। वे चुपचाप आम भक्तों के बीच करीब आधे घंटे तक कतार में खड़ी रहीं और ठंड से ठिठुरते हुए बाबा के जयकारे लगाती रहीं।
दोस्तो सारा ने न केवल बाबा केदारनाथ के मुख्य गर्भगृह में विशेष पूजा-अर्चना की, बल्कि केदारनाथ के रक्षक माने जाने वाले बाबा भुकुंट भैरव के दर पर भी माथा टेका। लेकिन उनकी इस यात्रा के पीछे छिपी एक बड़ी सियासी और धार्मिक कॉन्ट्रोवर्सी इस वक्त देश में चर्चा का विषय बनी हुई है। वहीं दरअसल, दो्सोत कुछ समय पहले श्री बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति (BKTC) ने एक बेहद कड़ा प्रस्ताव पारित किया था। इस नियम के तहत धामों में गैर-सनातनियों के प्रवेश पर रोक और गैर-हिंदुओं के लिए ‘सनातन धर्म में आस्था’ का एक कानूनी शपथ पत्र यानी एफिडेविट देना अनिवार्य करने की बात कही गई थी। दोस्तो विवाद तब चरम पर पहुंच गया जब मंदिर समिति के अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी से मीडिया ने सीधे सारा अली खान के बारे में पूछा। तब समिति ने दोटूक कहा था कि अगर सारा अली खान केदारनाथ आती हैं, तो उन्हें भी एफिडेविट देकर अपनी आस्था स्पष्ट करनी होगी। इस मुद्दे पर पूरे देश में एक बड़ी बहस छिड़ गई थी। हालांकि, सारा ने कभी इन विवादों पर पलटवार नहीं किया, बल्कि उनका मानना है कि उनकी निजी आस्था सोशल मीडिया के ट्रोलर्स या कागजों की मोहताज नहीं है। दोस्तो सारा अली खान के लिए केदारनाथ सिर्फ एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि उनके जीवन का सबसे खास हिस्सा है। वो खुद मानती हैं कि वे अब तक 7 से अधिक बार बाबा के धाम आ चुकी हैं। इस पवित्र घाटी से सारा का रिश्ता साल 2017 में शुरू हुआ था, जब उन्होंने अपनी डेब्यू फिल्म ‘केदारनाथ’ की शूटिंग यहीं की थी। उस समय उनके साथ दिवंगत अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत भी थे। सारा ने कई बार भावुक होकर कहा है कि केदारनाथ की वादियों ने ही उन्हें अभिनय सिखाया, उन्हें पहचान दी और आज भी जब वे यहां आती हैं तो उन्हें सुशांत की याद आती है और ऐसा लगता है जैसे वे अपने घर लौट आई हैं। वे साल 2023, 2024, 2025 और अब 2026 में भी कड़ाके की ठंड के बावजूद लगातार बाबा के दर पर शीश नवा रही हैं।
दोस्तो सारा अकेली ऐसी हस्ती नहीं हैं जिनकी आस्था सीमाओं से परे है। मनोरंजन जगत से लेकर बड़े कारोबारी घरानों तक, कई ऐसी मुस्लिम हस्तियां हैं जिनकी सनातन संस्कृति और देवस्थलों के प्रति अगाध श्रद्धा ने देश का ध्यान खींचा है। हाल ही में अभिनेत्री नुसरत भरूचा भी केदारनाथ धाम के दर्शन करने पहुंची थीं, जहाँ उन्होंने कपाट के सामने बैठकर उस असीम शांति और स्थिरता को महसूस किया था। इसके अलावा रिलायंस इंडस्ट्रीज के बड़े हितधारक और मशहूर कारोबारी मुकेश अंबानी के बेटे अनंत अंबानी भी अक्सर अपनी मन्नतें लेकर केदारनाथ और बद्रीनाथ के द्वारों पर करोड़ों रुपये का दान देते नजर आते हैं। दोस्तो भले ही सोशल मीडिया पर कुछ लोग सारा अली खान की धार्मिक पहचान को लेकर सवाल उठाते हों और पूछते हों कि ‘तुम हिंदू हो या मुस्लिम’, लेकिन सारा की केदारनाथ के प्रति यह अटूट निष्ठा यह साबित करती है कि आस्था किसी विवाद या कागजी एफिडेविट के बंधनों में नहीं बंधती। जब तक बाबा का बुलावा आता रहेगा, पहाड़ की ये लाडली इसी तरह कतारों में खड़ी होकर महादेव का आशीर्वाद लेती रहेगी।