दोस्तो चमोली के जंगलों में मिला ‘इंसानी चेहरे’ वाला जीव, वैज्ञानिक भी हैरान! पीठ पर बनी है मुस्कुराती हुई ‘स्माइल’ कैसे बदला 125 साल का इतिहास। कैसे हवाई द्वीप के बाद सीधे उत्तराखंड के पहाड़ों में मिला ये अनोखा चमत्कार! बताउँगा आपको पूरी खबर। दोस्तो, चमोली के जंगलों से सामने आई एक ऐसी तस्वीर, जिसने वैज्ञानिकों तक की दिलचस्पी बढ़ा दी है! पीठ पर इंसानी चेहरे जैसी आकृति और रंग बदलने की अनोखी खूबी वाली इस मकड़ी को देखकर सवाल उठ रहा है—आखिर उत्तराखंड के जंगलों में ये कौन सा अनोखा जीव मिला है? क्या प्रकृति इंसानों के साथ कोई मज़ाक कर रही है, या फिर हमारे पहाड़ों में एक ऐसा अनोखा जीव पैदा हो चुका है जिसकी पीठ पर दूर से ही एक मुस्कुराता हुआ इंसानी चेहरा साफ-साफ दिखाई देता है? जी हां, दोस्तो उत्तराखंड के चमोली जिले के जंगलों से एक ऐसी विस्मयकारी और हैरान कर देने वाली वैज्ञानिक खोज सामने आई है, जिसने पूरी दुनिया के वैज्ञानिकों के होश उड़ा दिए हैं! एक नन्हीं सी मकड़ी, जिसकी पीठ पर दो आंखें और लाल रंग की मुस्कुराती हुई लिपस्टिक जैसी ‘स्माइल’ बनी हुई है। पिछले एक सौ साल से विज्ञान मानता था कि यह अनोखा जीव सिर्फ सात समंदर पार अमेरिका के हवाई द्वीपों में ही मिल सकता है, लेकिन अब यह रहस्यमयी ‘हैप्पी-फेस स्पाइडर’ हमारे देवभूमि के पहाड़ों में चहक रही है! वैसे दोस्ोत उत्तराखंड के चमोली जनपद की हसीन वादियां हमेशा से अपने भीतर प्रकृति के कई अनसुलझे रहस्य समेटे हुए हैं। लेकिन हाल ही में ‘फॉरेस्ट रिसर्च इंस्टीट्यूट’ (FRI) देहरादून के शोधकर्ता और देवी प्रियदर्शिनी की टीम ने चमोली के मंडल क्षेत्र में करीब 2000 मीटर यानी 6500 फीट से अधिक की ऊंचाई पर एक ऐसी मकड़ी को खोज निकाला है, जिसकी पीठ पर बनी प्राकृतिक आकृति हूबहू एक मुस्कुराते हुए इंसान के चेहरे जैसी दिखाई देती है।
दोस्तो इस नन्हीं सी मकड़ी को देखते ही पहली नज़र में ऐसा लगता है जैसे किसी ने इसके ऊपर कार्टून का स्माइली फेस पेंट कर दिया हो, लेकिन आप इसी एसे समझिये। नया वैज्ञानिक नाम- थेरिडियन हिमालयाना (Theridion himalayana)पुरानी मान्यता- 1900 से केवल अमेरिका के हवाई द्वीप (Hawaii) में होने का था दावा। DNA टेस्ट का सच- हवाई की मकड़ी से इसका DNA 8.5% अलग है, यानी यह विशुद्ध पहाड़ी है! दोस्तो इस खोज ने जीव विज्ञान के इतिहास को पूरी तरह से पलट कर रख दिया है। दरअसल, साल 1900 में पहली बार अमेरिका के हवाई द्वीप में ऐसी ‘हैप्पी-फेस स्पाइडर’ (Theridion grallator) देखी गई थी, और तब से वैज्ञानिक मानते थे कि यह दुर्लभ जीव सिर्फ वहीं पाया जाता है। लेकिन चमोली में मिली इस मकड़ी के जब डीएनए (DNA) की जांच की गई, तो पता चला कि यह हवाई की मकड़ी से करीब 8.5% अलग है। वैज्ञानिकों ने इसे एक बिल्कुल नई प्रजाति घोषित करते हुए इसका नाम ‘थेरिडियन हिमालयाना’ रखा है। यानी इस मुस्कुराते हुए चेहरे ने अब पूरी दुनिया में उत्तराखंड को अपना दूसरा परमानेंट घर बना लिया है। मकड़ी की अनोखी विशेषताएं रंगों का पैटर्न- लाल, काले और सफेद डॉट्स के साथ 32 अलग-अलग रंगों में उपलब्ध! फेक स्माइल का राज- केवल मादा (Female) मकड़ी की पीठ पर ही दिखता है मुस्कुराता चेहरा। वजह- शिकारियों और दुश्मनों को भ्रमित कर अपने अंडों की रक्षा करना।
दोस्तो वैज्ञानिकों की जांच में एक और बेहद चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। यह अनोखी मकड़ी लाल, काले और सफेद डॉट्स के अलग-अलग कॉम्बिनेशन के साथ कुल 32 रंगों के पैटर्न में खुद को ढाल सकती है। सबसे मजेदार बात यह है कि यह प्यारा सा मुस्कुराता हुआ चेहरा केवल 90% मादा (Female) मकड़ियों की पीठ पर ही पाया जाता है, जबकि नर मकड़ियां बिल्कुल सादे पीले रंग की होती हैं। जीव वैज्ञानिकों का मानना है कि प्रकृति ने मादा मकड़ी को यह ‘मुस्कुराता हुआ चेहरा’ इसलिए दिया है ताकि जब वह पत्ती के नीचे बैठकर अपने अंडों की रखवाली कर रही हो, तो खूंखार शिकारी जीव इस अजीब चेहरे को देखकर डर जाएं या भ्रमित होकर भाग जाएं। यह प्रकृति का एक बेहद एडवांस जेनेटिक डिफेंस मैकेनिज्म है। दोस्तो चमोली के मंडल और उखीमठ के जंगलों में मिली यह मकड़ी ज्यादातर जंगली केलों और ‘चंपा’ के पौधों की पत्तियों के नीचे उल्टी लटक कर अपना जाला बुनती है। लेकिन इस बड़ी वैज्ञानिक उपलब्धि के बीच वैज्ञानिकों ने एक गंभीर चिंता भी जताई है। जिस राष्ट्रीय राजमार्ग और वाइल्डलाइफ सेंचुरी के पास यह अति-दुर्लभ प्रजाति मिली है, वहां बढ़ता इंसानी हस्तक्षेप, अंधाधुंध निर्माण कार्य और बढ़ता धार्मिक व सामान्य पर्यटन इस नन्हे जीव के आशियाने को उजाड़ रहा है। अगर इन नाजुक हिमालयी माइक्रो-हैबिटैट्स को तुरंत संरक्षित नहीं किया गया, तो प्रकृति की यह अनमोल और मुस्कुराती हुई कलाकृति हमेशा के लिए विलुप्त हो जाएगी। दोस्तो चमोली के जंगलों से आई यह ‘हैप्पी-फेस स्पाइडर’ साबित करती है कि देवभूमि का हिमालय आज भी रहस्यों का एक ऐसा महासागर है जिसका बहुत बड़ा हिस्सा खोजना अभी बाकी है। प्रकृति की इस अनोखी स्माइल को बचाना अब हम सबकी जिम्मेदारी है। इस दुर्लभ और अद्भुत खोज पर आपकी क्या राय है? कमेंट बॉक्स में जरूर बताएं। उत्तराखंड के इस वैश्विक गौरव की कहानी को फेसबुक और यूट्यूब पर सबसे ज्यादा शेयर करें ताकि हर कोई हमारे पहाड़ों की इस अनमोल जैव-विविधता से रूबरू हो सके। हमारे चैनल को फॉलो करना न भूलें।