मां नंदा की यात्रा में रूट का महा-सस्पेंस! Chamoli | Nanda Devi | Uttarakhand News

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दोस्तो भक्तों का हुजूम, मां नंदा की डोली, लेकिन माता का ठिकाना कहां होगा? धरा तल्ला या नंदा धाम नंदकेसरी? दो अलग-अलग कार्यक्रम, दो अलग-अलग दावे और बीच में धर्मसंकट में फंसा प्रशासन और श्रद्धालु! क्या कुरुड़ मंदिर समिति के अध्यक्ष नरेश गौड़ के बड़े बयान ने लोकजात और राजजात के भ्रम को हमेशा के लिए दूर कर दिया है? क्या है मां नंदा की इस पावन यात्रा का पूरा सच। दोस्तो मां नंदा की यात्रा चल रही है पहाड़ों में महाकुंभ हो रहा है, लेकिन दोस्तो शुरुआत से लेकर अब तक कई तरफ के विवाद कई तरह का टकराव, मां नंदा की राजजात को लेकर बहस सब कुछ मैं नंदा की इस यात्रा के साथ चलता जा जा रहा है। आपने देखा होगा इससे पहले कोई कह रहा है कि ये नंदा राजजात नहीं है वो अगले साल होगी, कोई कह रहा है मां नंदा की यात्रा को सियासी छत्र में चलाया जा रहा है न जाने क्या क्या, लेकिन दोस्तो अभी हाल में एक विवाद और देखने को मिला। वो ये कि मां नंदा की इस महा यात्रा का रुट क्या होगा। दोस्तो आधे रास्ते में मां नंदा की यात्रा है और बहस और बवाल रुक को लेकर हो रही है, अभी तो ये बानगी भर लगती है, आगे क्या क्या होगा, वो मां नंदा ही जाने। दोस्तो आस्था और विश्वास का महासंगम! जैसे ही मां नंदा की पावन डोली चेपड़ो गांव पहुंची, पूरा इलाका मां के जयकारों से गूंज उठा। चेपड़ो और आसपास के गांवों से आए सैकड़ों देवी भक्तों ने यात्रा का भव्य स्वागत किया। रातभर नंदा जागरण और विशेष अनुष्ठानों से पूरा माहौल भक्तिमय बना रहा। लेकिन इस श्रद्धा के बीच, अब एक बड़ा सस्पेंस शनिवार के रूट को लेकर खड़ा हो गया है। दोस्तो शनिवार को यह यात्रा विकासखंड थराली को पीछे छोड़ते हुए विकासखंड देवाल के कोठी गांव पहुंच गई, जहां दोपहर के भोजन की व्यवस्था है। लेकिन कोठी गांव के बाद बधाण की डोली किस रास्ते आगे बढ़ेगी, इस पर संशय के बादल मंडरा ऐसा मंडराया कि सवाल ही सवाल थे। केंद्रीय लोकजात समिति देवराड़ा-थराली कहती दिखाई दी कि मां नंदा की डोली कोठी से आगे बढ़कर ‘धरा तल्ला’ गांव में रात्रि प्रवास करेगी।

वहीं, बड़ीजात समिति कुरूड़ का दावा है कि देव यात्रा का पड़ाव सीधे नंदा धाम ‘नंदकेसरी’ होगा। दोस्तो इस विरोधाभास ने भक्तों को असमंजस में डाल दिया है। दोस्तो इस बीच, नंदा देवी राजराजेश्वरी मंदिर समिति कुरूड़ के अध्यक्ष नरेश गौड़ ने एक बड़ा और स्पष्ट बयान देकर असमंजस को कम करने की कोशिश की। उन्होंने साफ किया कि यह ‘बधाण की नंदादेवी लोकजात यात्रा’ है, न कि बड़ी जात या राजजात। उन्होंने तर्क दिया कि अगर यह बड़ी राजजात यात्रा होती, तो शनिवार को अमावस्या की रात सूना गांव के सामने पिंडर नदी के पार, कुलसारी के दक्षिण कालिंका मंदिर परिसर में जाना पड़ता। वहां स्थापित रहस्यमयी भूमिगत ‘श्री यंत्र’ को खोलकर उसकी विशेष विधि-विधान से पूजा की जाती, चूंकि ऐसा नहीं हो रहा है, इसलिए यह साफ है कि बधाण की मां नंदा इस बार भी अपनी पारंपरिक लोकजात यात्रा पर ही हैं। दोस्तो परंपराएं और मान्यताएं अपनी जगह हैं, लेकिन दो समितियों के अलग-अलग दावों के बीच अब सबकी नजरें एक दिन पर टिकी हैं। दोस्तो पहाड़ की आराध्य देवी और अपनी ध्याणी बेटी मां नंदा की विदाई में उमड़ा आस्था का सैलाब! चमोली के सिद्धपीठ कुरुड़ से शुरू हुई ‘बड़ी लोकजात यात्रा’ अब अपने सबसे बड़े और रोमांचक पड़ाव पर पहुंच चुकी है! 13 सितंबर को रामणी में बंड और दशोली की डोलियों के ऐतिहासिक मिलन के बाद, अब ठीक दो दिन बाद यानी 15 सितंबर को ‘वाण’ में तीनों डोलियों का महासंगम होने जा रहा है! खतरनाक रास्तों, उफनते गधेरों और झमाझम बारिश के बीच भी भक्तों का जोश सातवें आसमान पर है।