देवभूमि में शर्मसार हुई अतिथि देवो भवः की परंपरा! | Rishikesh | Uttarakhand News | Shauni

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दोस्तो, उत्तराखंड की खूबसूरत वादियां, और उन्हीं वादियों में बिखरा प्लास्टिक कचरा! आखिर जिस देवभूमि की प्राकृतिक सुंदरता देखने दुनिया भर से पर्यटक आते हैं, उसी की सड़कों पर गंदगी देखकर उन्हें निराश क्यों होना पड़ रहा है? नरेंद्र नगर में हॉलैंड से आई पर्यटक शौनी ने कचरे पर नाराजगी जताई है। प्रतिष्ठित होटल आनंदा इन द हिमालय के मुख्य मार्ग पर बिखरी गंदगी ने सफाई व्यवस्था पर सवाल खड़े किए हैं। सवाल है— हाईकोर्ट के सख्त निर्देशों और स्वच्छता के दावों के बावजूद पहाड़ों को कचरे से मुक्ति क्यों नहीं मिल पा रही? क्या देवभूमि की सुंदरता बचाने की जिम्मेदारी सिर्फ प्रशासन की है, या हमारी भी? दोस्तो हम बड़े गर्व से ढिंढोरा पीटते हैं— ‘अतिथि देवो भवः’! हम दावा करते हैं कि हमारी देवभूमि दुनिया की सबसे खूबसूरत, शांत और स्वच्छ जगह है, जहाँ लोग मोक्ष और सुकून की तलाश में आते हैं। लेकिन आज जो कड़वी हकीकत सामने आई है, उसने हम सभी उत्तराखंडियों और देश के पर्यटकों का सिर शर्म से झुका दिया है! दोस्तो 19 अक्टूबर 2026 को नीदरलैंड यानी हॉलैंड से उत्तराखंड आई एक विदेशी मेहमान शौनी (Shauni) जब नरेंद्र नगर स्थित विश्व प्रसिद्ध फाइव स्टार होटल ‘आनंदा इन द हिमालय’ की ओर जा रही थीं, तो रास्ते में जगह-जगह फैले प्लास्टिक कचरे और गंदगी के अंबार को देखकर वो बुरी तरह निराश और दुखी हो गईं! जिस प्रकृति को हम मां कहते हैं, उसे चंद गैर-जिम्मेदार हुड़दंगी पर्यटक अपने हाथों से गंदा कर रहे हैं। आखिर ये कैसी मानसिकता है? जब गाड़ियां उत्तरकाशी, चमोली या नैनीताल की तरफ बढ़ती हैं, तो लोग अपनी गाड़ियों के शीशे नीचे करके बियर के केन और वेफर्स के रैपर सड़कों पर क्यों फेंक देते हैं? क्यों हमारा प्रशासन इन कचरा फैलाने वाले ‘पढ़े-लिखे गँवारों’ पर कड़ा जुर्माना नहीं ठोकता? मैं नरेंद्र नगर में यात्रा कर रही थी। और मैं यहाँ आई और मैं थोड़ी निराश हूँ क्योंकि मुझे यहाँ बहुत सारा कूड़ा दिख रहा है। यह एक प्राकृतिक क्षेत्र है और इसे साफ होना चाहिए। यह सब प्रदूषण और माइक्रोप्लास्टिक्स पैदा करेगा। यह प्रकृति के लिए अच्छा नहीं है और आखिरकार हमारे लिए भी अच्छा नहीं है। क्योंकि प्रकृति बहुत खूबसूरत है और अब यह सब कुछ से थोड़ी प्रदूषित हो गई है।)

दोस्तो उत्तराखंड का नरेंद्र नगर जिसे दुनिया भर में योग, अध्यात्म और प्रकृति के सर्वोच्च केंद्र के रूप में जाना जाता है। इसी इलाके में स्थित है विश्व विख्यात लग्जरी वेलनेस रिसॉर्ट ‘आनंदा इन द हिमालय’, जहां हॉलीवुड स्टार्स से लेकर विदेशी राष्ट्राध्यक्ष तक आते हैं। लेकिन 19 अक्टूबर 2026 को इसी रास्ते से एक ऐसी तस्वीर सोशल मीडिया पर वायरल हुई, जिसने देवभूमि के माथे पर कलंक लगा दिया। हॉलैंड से आई विदेशी मेहमान शौनी (Shauni) जब इस पावन धरा की खूबसूरती देखने इस मार्ग से गुजरीं, तो रास्तों पर बिखरा इंसानी लालच और प्लास्टिक का कचरा देखकर उनका दिल टूट गया। उन्होंने बेहद दुख के साथ पूछा कि जो लोग इस देवभूमि की शांति और स्वच्छ वातावरण को देखने आते हैं, वे खुद अपने ही हाथों से इस जन्नत को नरक में कैसे तब्दील कर सकते हैं? दोस्तो शौनी (Shauni) की यह निराशा उत्तराखंड की उस कड़वी हकीकत का आईना है, जिससे हमारा सिस्टम पिछले कई सालों से मुंह चुरा रहा है। उत्तराखंड का कोई भी संवेदनशील कोना आज इन असंवेदनशील पर्यटकों से अछूता नहीं है। केदारनाथ धाम का रिकॉर्ड पिछले यात्रा सीजन में रिकॉर्ड 17 लाख से ज्यादा श्रद्धालुओं ने बाबा केदार के दर्शन किए, लेकिन वे अपने पीछे 2300 टन कचरे का महा-पहाड़ छोड़ गए, जिसे साफ करने में सरकार के करोड़ों रुपये स्वाहा हो रहे हैं।

नैनीताल और मसूरी का हाल, सोशल मीडिया पर आए दिन वीडियो वायरल होते हैं जहाँ पढ़े-लिखे शहरों से आए पर्यटक खुलेआम वादियों में जन्मदिन का केक काटकर रैपर सड़कों पर फेंक देते हैं, और जब स्थानीय लोग टोकते हैं, तो वे उनसे लड़ने पर आमादा हो जाते हैं। दोस्तो हिमालय का इकोसिस्टम बेहद नाजुक है, लेकिन पर्यटकों के इस हुड़दंग की वजह से पहाड़ अब धीरे-धीरे ‘कचरे के डंपिंग ग्राउंड’ बनते जा रहे हैं। वैसे दोस्तो ऐसा नहीं है कि नियम नहीं बने। उत्तराखंड और पड़ोसी राज्य हिमाचल प्रदेश ने कड़ा नियम बनाया था कि राज्यों में प्रवेश करने वाली हर गाड़ी में एक डस्टबिन या गारबेज बैग होना अनिवार्य है। नियम न मानने पर भारी जुर्माने और एंट्री बैन का प्रावधान भी कागजों पर तय हुआ था। माननीय उत्तराखंड हाईकोर्ट ने भी सख्त टिप्पणी करते हुए कहा था कि देवभूमि कूड़े का बड़ा ढेर बनती जा रही है, और सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट के कानून धरातल पर पूरी तरह गायब हैं। दोस्तो जब नरेंद्र नगर जैसे हाई-प्रोफाइल वीआईपी रूट पर, जहां आनंदा होटल स्थित है, कूड़े की सफ़ाई नहीं हो पा रही, तो दूरदराज के उन ट्रेकिंग रूट्स की क्या हालत होगी जहां कोई अधिकारी झांकने तक नहीं जाता? वन विभाग और स्थानीय निकाय सिर्फ कागजी जागरूकता अभियान चलाकर सो जाते हैं, जबकि धरातल पर हकीकत शून्य है। दोस्तो जब सरकारें फेल हो जाती हैं, तो आम जनता को खुद ‘सफाई सेना’ बनना पड़ता है। हाल ही में देहरादून के सोशल एक्टिविस्ट अनूप नौटियाल का एक वीडियो वायरल हुआ था, जहां उन्होंने कार से कूड़ा फेंकने वाले पर्यटकों की गाड़ी रुकवाकर उनका कचरा उन्हें वापस सौंप दिया था। वहीं, तुंगनाथ ट्रैक पर एक रशियन महिला पर्यटक तान्या ने अकेले ही कई किलो प्लास्टिक कचरा उठाकर भारतीयों को आईना दिखाया था.. दोस्तो आज पूरे उत्तराखंड की जनता देश भर से आने वाले पर्यटकों से एक ही तीखी और आक्रामक अपील कर रही है— पहाड़ आएंगे, तो कूड़ा मत फैलाइए! अगर आप इन वादियों की खूबसूरती को संभाल नहीं सकते, तो आपको यहाँ आकर इसे गंदा करने का भी कोई हक नहीं है। यह देवभूमि हमारे देवताओं का वास है, इसे पिकनिक स्पॉट समझकर प्लास्टिक की गंदगी से अपवित्र करना बंद कीजिए! दोस्तो हॉलैंड से आई शौनी (Shauni) शायद अपने देश वापस लौट जाएगी, लेकिन वो अपने साथ देवभूमि की जो बदसूरत और गंदी तस्वीर लेकर जा रही है, वह पर्यटन के नक्शे पर उत्तराखंड की साख को बट्टा लगाने के लिए काफी है। अब देखना यह होगा कि इस थप्पड़ के बाद हमारा शासन-प्रशासन जागता है या फिर पहाड़ों में प्लास्टिक का यह स्लो-पॉइजन यूं ही बहता रहेगा। दोस्तो जब कोई विदेशी सैलानी हमारे घर आकर हमें सफाई का पाठ पढ़ाए, तो समझ लेना चाहिए कि पानी सिर से ऊपर जा चुका है। शौनी (Shauni) की यह निराशा हम सबके गाल पर एक करारा तमाचा है। अगर हम आज भी नहीं संभले, तो आने वाले दिनों में इन वादियों में सिर्फ प्लास्टिक के पहाड़ बचेंगे, हरी-भरी वादियां नहीं। हमारी सरकार से भी मांग है कि सिर्फ लाउडस्पीकर बजाने के बजाय, रास्ते में कचरा फेंकने वालों की गाड़ियों का तुरंत तगड़ा चालान काटा जाए।