दोस्तो सोचिए, एक ऐसा मंदिर जहां का मुख्य पुजारी भी भगवान के सामने जाने से पहले अपनी आंखों और मुंह पर मोटी पट्टी बांध लेता है! एक ऐसी जगह जहां साक्षात दर्शन करने का मतलब है हमेशा के लिए अंधा हो जाना! देवभूमि में है भारत का सबसे रहस्यमयी मंदिर! बताउंगा आपको आज मां नंदा के उस भाई की खौफनाक कहानी! जहां एक घड़े ने बदल दिया थी इतिहास। दोस्तो उत्तराखंड में मां नंदा की यात्रा चल रही है और इस यात्रा के बीच में आप एक नाम बार-बार सुन रहे होंगे, लाटु देवता, अब ये लाटू देवता कौन हैं। वो बताउंगा आपको बड़ी ही भयानक और रहस्यों से भरी कहानी है लाटू महाराज की। दोस्तो देवभूमि उत्तराखंड के चमोली जिले का वाण गांव, जहां सदियों से कैद हैं मां नंदा के धर्मभाई यानी लाटू देवता। आखिर एक विद्वान ब्राह्मण कैसे बन गया हिमालय की सबसे कठिन यात्रा का रक्षक? और वाण गांव में एक घड़े से शुरू हुई उस खौफनाक लोककथा का सच क्या है, जिसने इस मंदिर को दुनिया का सबसे अनोखा रहस्य बना दिया? विज्ञान के इस दौर में आस्था और डर का एक अद्भुत मिलन को समझेंगे तो ये रोंगटे खड़े कर देगा। दोस्तो उत्तराखंड के चमोली में समुद्र तल से करीब 8,500 फीट की ऊंचाई पर बसा है वाण गांव। इसी गांव में स्थित है लाटू देवता का यह अद्भुत मंदिर। हर साल वैशाख पूर्णिमा को जब इस मंदिर के कपाट खुलते हैं, तो पूरे देश के श्रद्धालु हैरान रह जाते हैं। यहां पूजा करने वाले पुजारी गर्भगृह के अंदर कदम रखने से पहले अपनी आंख और मुंह को सूती कपड़े से पूरी तरह ढक लेते हैं। मान्यता है कि गर्भगृह में लाटू देवता अपने विशाल नागराज रूप में विराजमान हैं और उनकी दिव्य मणि का तेज इतना प्रचंड है कि कोई भी साधारण इंसान उसे देखकर अंधा हो सकता है।
दोस्तो पुजारी अपने मुंह पर पट्टी इसलिए बांधते हैं ताकि उनकी सांसों की हवा से भगवान दूषित न हों लेकिन दोस्तो आखिर लाटू देवता कौन थे? पौराणिक लोककथाओं के अनुसार, लाटू देवता मूल रूप से उत्तर प्रदेश के कन्नौज के एक परम विद्वान ब्राह्मण थे। जब वे उत्तराखंड के इन पावन पहाड़ों में भ्रमण कर रहे थे, तो वे मां नंदा (भगवती पार्वती) की अलौकिक शक्ति और रूप से इतने प्रभावित हुए कि उन्होंने मां नंदा को अपनी सगी बहन मान लिया। मां नंदा ने भी उन्हें अपने धर्मभाई (बोलाया वीर) का दर्जा दिया। लेकिन दोस्तो फिर एक ऐसी घटना घटी जिसने इस भाई-बहन के पवित्र रिश्ते को हमेशा के लिए एक रहस्यमयी मोड़ पर लाकर खड़ा कर दिया। दोस्तो कहा जाता है कि एक बार लाटू देवता अपनी बहन मां नंदा से मिलने उनके मायके आ रहे थे। ऊंचे पहाड़ों की कठिन चढ़ाई चढ़ते-चढ़ते जब वे वाण गांव पहुंचे, तो उन्हें भीषण प्यास लगी। वे पानी की तलाश में गांव के एक घर में दाखिल हुए। वहां कोने में मिट्टी के दो घड़े रखे थे। लाटू देवता को अंदाजा नहीं था कि एक घड़े में शीतल जल है और दूसरे में स्थानीय स्तर पर बनी तीखी मदिरा यानी शराब है। भूलवश लाटू देवता ने मदिरा वाला घड़ा उठाकर पूरा पी लिया। नशे में धुत होते ही उनका मानसिक संतुलन बिगड़ गया और वे पूरे गांव में तांडव करने लगे।
दोस्तो जब मां नंदा को अपने भाई की इस अमर्यादित हरकत का पता चला, तो वे क्रोध से भर उठीं। उन्होंने लाटू देवता को श्राप दे दिया कि ‘तुम अपनी इस भूल के कारण हमेशा के लिए इसी वाण गांव में कैद रहोगे और कभी किसी को अपना चेहरा नहीं दिखा पाओगे। दोस्तो श्राप मिलते ही जब लाटू देवता का नशा उतरा, तो उन्हें अपनी बड़ी भूल का अहसास हुआ, वे रो पड़े और मां नंदा के चरणों में गिरकर क्षमा मांगने लगे। भाई को तड़पता देख मां नंदा का दिल पसीज गया। उन्होंने कहा कि ‘भले ही तुम इस श्राप से मुक्त नहीं हो सकते और तुम्हें अदृश्य रहना होगा, लेकिन मेरी हर 12 साल में होने वाली ऐतिहासिक ‘नंदा राजजात यात्रा’ तुम्हारे बिना अधूरी रहेगी।’ दोस्तो वाण गांव इस महायात्रा का आखिरी मानव बस्ती वाला पड़ाव है। इसके आगे केवल वीरान बुग्याल और बर्फीले पहाड़ शुरू होते हैं। मां नंदा ने लाटू देवता को इस दुर्गम क्षेत्र का मुख्य प्रहरी बनाया, जो आज भी अपनी बहन की डोली को आगे होमकुंड की तरफ सुरक्षित विदा करने के लिए अगवानी करते हैं। दोस्तों, विज्ञान चाहे कितनी भी तरक्की कर ले, लेकिन देवभूमि उत्तराखंड के इन आंचल में आज भी ऐसे रहस्य जिंदा हैं जो इंसानी सोच से परे हैं। लाटू देवता की ये कहानी हमें सिखाती है कि आस्था में नियम और मर्यादा का क्या महत्व है। 2027 में जब नंदा राजजात यात्रा एक बार फिर इस वाण गांव से गुजरेगी, तो लाटू देवता का ये मंदिर फिर से पूरी दुनिया के आकर्षण का केंद्र बनेगा। मां नंदा के इस अनोखे भाई और इस रहस्यमयी मंदिर पर आपकी क्या राय है? कमेंट में जरूर बताएं।