कपकोट के शामा क्षेत्र से एक हैरान कर देने वाली तस्वीर सामने आ रही है, जहां एक तरफ महिलाएं और ग्रामीण शराब के खिलाफ सड़कों पर उतरकर आंदोलन कर रहे है। वहीं दूसरी तरफ उसी इलाके में शराब के समर्थन में आवाजें भी बुलंद हो रही हैं। जी हां शामा में अब तस्वीर दो हिस्सों में बंट चुकी है एक तरफ विरोध और दूसरी तरफ समर्थन। हैरानी की बात ये है कि जिस शराब की दुकान को हटाने के लिए आंदोलन चल रहा है। उसी दुकान से करीब 2 करोड़ 21 लाख रुपये का कारोबार हो चुका है। यानि साफ है विरोध भी जारी है और खपत भी जारी है। शराब के समर्थन में उतरे लोगों का तर्क भी चौंकाने वाला है। उनका कहना है कि अगर उत्तराखंड में शराब की बिक्री बंद हो गई, तो सरकार चलाना मुश्किल हो जाएगा। अब सवाल ये उठता है कि क्या राजस्व के लिए समाज की बुनियाद दांव पर लगाई जा रही है? क्या विकास की कीमत नशे के सहारे चुकाई जाएगी? शामा से सामने आए ये विरोध और समर्थन के वीडियो अब समाज को एक नई बहस के अंधेरे मोड़ पर खड़ा कर रहे हैं। जहां तय करना होगा राजस्व बड़ा है या समाज?