दोस्तो खबर ये कि बागेश्वर में 15 दिन से लापता एक अधिवक्ता, पुलिस के सामने लगातार बढ़ते सवाल और अब सड़कों पर उतरा जनआक्रोश! धीरेंद्र परिहार आखिर कहां हैं? जिस इलाके में उनके मोबाइल की आखिरी लोकेशन मिली, वहां सीसीटीवी कैमरों के तार कटे मिलने की बात सामने आई है। पुलिस के सामने यह भी जांच का विषय है कि कैमरों से छेड़छाड़ और गुमशुदगी के बीच कोई संबंध है या नहीं। हालात ऐसे बने कि विधायक पार्वती दास को भी सड़क पर धरने पर बैठना पड़ा। आखिर धीरेंद्र का सुराग कब मिलेगा? उत्तराखंड के बागेश्वर जिले की रहस्यमयी खबर सामने आ रही है! क्या उत्तराखंड में अब कानून के रखवाले यानी वकील भी सुरक्षित नहीं हैं? आखिर 15 दिन बीत जाने के बाद भी पुलिस के हाथ पूरी तरह खाली क्यों हैं? यह सुलगते सवाल इस वक्त बागेश्वर का बच्चा-बच्चा पुलिस प्रशासन से पूछ रहा है! दोस्तो मामला बागेश्वर के पूर्व नगरपालिका सभासद और पेशे से अधिवक्ता धीरेंद्र परिहार (उर्फ कक्कू परिहार) का है, जो बीते 17 अक्टूबर से रहस्यमयी ढंग से लापता हैं। दो हफ्ते से ज्यादा का समय बीत गया, लेकिन खाकी अब तक धीरेंद्र का कोई सुराग नहीं लगा पाई है। पुलिस की इसी सुस्ती और नाकामी से गुस्साए वकीलों, परिजनों और व्यापारियों का धैर्य आज जवाब दे गया! सोमवार को गुस्साए लोगों ने बागेश्वर के मुख्य एसबीआई तिराहे पर शव की तरह चक्काजाम कर दिया। हालात इतने तनावपूर्ण हो गए कि खुद क्षेत्रीय विधायक पार्वती दास भी जनता के साथ बीच सड़क पर धरने पर बैठ गईं! विधायक ने साफ चेतावनी दी है कि अगर जल्द ही धीरेंद्र परिहार की बरामदगी नहीं हुई, तो पूरा बागेश्वर उग्र आंदोलन की आग में झुलसने के लिए मजबूर होगा!
दोस्तो आखिर 17 अक्टूबर की शाम बाजार जाने की बात कहकर निकले धीरेंद्र कहां विलीन हो गए? नुमाइशखेत इलाके में सीसीटीवी कैमरों के तार काटे जाने के पीछे का सच क्या है? बागेश्वर का सबसे व्यस्त रहने वाला एसबीआई तिराहा आज पूरी तरह से जंग का मैदान बन गया. 17 अक्टूबर से लापता 35 वर्षीय युवा अधिवक्ता धीरेंद्र परिहार की सकुशल बरामदगी की मांग को लेकर आज पूरे जिले का गुस्सा सड़कों पर फूट पड़ा। सुबह से ही बार एसोसिएशन के अधिवक्ताओं, स्थानीय व्यापारियों और परिजनों ने मुख्य चौराहे को चारों तरफ से घेरकर चक्काजाम कर दिया। इस आंदोलन को उस वक्त भारी राजनीतिक और सामाजिक समर्थन मिला, जब बीजेपी विधायक पार्वती दास खुद प्रशासनिक लचरता के खिलाफ प्रदर्शनकारियों के साथ धरने पर बैठ गईं। दोस्तो धीरेंद्र परिहार के अचानक गायब होने से उनका पूरा परिवार सदमे और दहशत में है। तल्ली बाजार, बागनाथ वार्ड निवासी धीरेंद्र की बुजुर्ग मां नंदी परिहार ने कोतवाली में रोते हुए गुहार लगाई है कि उनके बेटे को ढूंढकर लाया जाए। लेकिन इस पूरे मामले में पुलिस की कार्यप्रणाली पर तब गंभीर सवालिया निशान खड़े हो गए, जब जांच के दौरान नुमाइशखेत इलाके में, जहां धीरेंद्र के मोबाइल की आखिरी लोकेशन मिली थी, वहां अज्ञात बदमाशों द्वारा कई सीसीटीवी कैमरों के तार काटने और उन्हें जलाने का सनसनीखेज सच सामने आया!
दोस्तो सीसीटीवी कैमरों के साथ की गई यह छेड़छाड़ किसी बड़ी और खौफनाक साजिश की तरफ इशारा कर रही है। क्या धीरेंद्र परिहार का अपहरण किया गया है? या फिर इस गुमशुदगी के पीछे कोई गहरा रंजिशी एंगल है? इन तमाम सवालों के बीच पुलिस बैकफुट पर नजर आ रही है। इधर दोस्तो पुलिस भले ही जल्द खुलासे का दावा कर रही हो, लेकिन 15 दिन का लंबा समय बीत जाना कानून व्यवस्था पर एक बड़ा तमाचा है। वकीलों और व्यापार मंडल ने दो टूक कह दिया है कि आश्वासन का दौर अब खत्म हो चुका है और उन्हें सिर्फ धीरेंद्र परिहार की सकुशल वापसी चाहिए। दोस्तो बागेश्वर का यह ‘धीरेंद्र परिहार गुमशुदगी प्रकरण’ अब महज़ एक मिसिंग केस नहीं रह गया है, बल्कि यह देवभूमि की सुरक्षा और पुलिस की साख की सबसे बड़ी अग्निपरीक्षा बन चुका है। जहां एक तरफ टूटे हुए सीसीटीवी कैमरे किसी बड़ी अनहोनी की गवाही दे रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ विधायक और जनता का यह उग्र चक्काजाम सरकार के लिए खतरे की घंटी है। अब देखना यह होगा कि इस चौतरफा दबाव के बाद बागेश्वर पुलिस सोती हुई नींद से कब जागती है और धीरेंद्र परिहार का सुराग कब तक मिल पाता है।