देखते ही सिहर उठंगे,सब कुछ खाक! | Pithoragarh | Ramnagar News | Uttarakhand News

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जी हां दोस्तो 24 घंटे से जलते धधकते जंगल तो इधर किसान भी हो गए बर्बाद। क्या उत्तराखंड में आग अब सिर्फ जंगलों तक सीमित नहीं रही? क्या अब इसका असर सीधे किसानों की जिंदगी और उनकी मेहनत पर पड़ रहा है?पहाड़ से लेकर मैदान तक आग का ऐसा तांडव देखने को मिल रहा है, जिसने हर किसी को हिला कर रख दिया है। 24 घंटे से धधकते जंगल और उसी आग की चपेट में आकर किसानों की महीनों की मेहनत राख में तब्दील हो रही है। पूरी खबर कैसे देखते ही सिहर उठेंगे आप, सब कुछ हुआ खाक। दोस्तो अगर गर्मी आती नहीं उत्तराखंड की परेशानियां भी सातवें आसमान पर पहुंच जाती है, तो क्या यह सिर्फ प्राकृतिक आपदा है या कहीं लापरवाही भी इसकी बड़ी वजह बन रही है? और आखिर क्यों हर साल आग का यह खतरा और भयावह होता जा रहा है? कितना नुकसान हुआ है, और क्या प्रशासन के पास इसे रोकने की ठोस तैयारी है?कैसे आग ने पहाड़ और मैदान दोनों को अपनी चपेट में ले लिया है। दोस्तो मै आपको किसानों की बर्बादी की कहानी बताउँ कैसे किसानों की दसवीं बीघे फसल को महज कुछ हीं मिंटों में राख दिया, लेकिन उससे पहले में आपको एक तस्वीर पहाड़ों की। दोस्तो ये बयावह तस्वीरें उत्तराखंड के पिथौरागढ़ जिले के अस्कोट की हैं जहां वन्यजीव अभ्यारण्य के जंगलों में भीषण आग लगने से हड़कंप मच गया है। आग की भयावहता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि पिछले करीब 24 घंटे से जंगल लगातार धधक रहे हैं और कई हेक्टेयर वन क्षेत्र जलकर राख हो चुका है। आगजनी से दुर्लभ वन्यजीवों पर खतरा मंडरा रहा है। यह अभ्यारण्य उत्तराखंड के राज्यीय पशु और दुर्लभ कस्तूरी मृग के रूप में जाना जाता है।

दोस्तो अभ्यारण्य के अंतर्गत कोली कन्याल क्षेत्र में रविवार को लगी आग ने तेजी से विकराल रूप धारण कर लिया। चीड़ और बांज के घने जंगलों में लगी आग तेज हवाओं के चलते लगातार फैलती जा रही है। दोस्तो स्थानीय के अनुसार जंगल में आग लगी हुई है, जो लगातार बढ़ती जा रही है। पहाड़ियों से उठती आग की ऊंची लपटें और धुएं का गुबार कई किलोमीटर दूर से साफ देखा जा सकता है। दोस्तो ये अभ्यारण्य खास तौर पर कस्तूरी मृग के संरक्षण के लिए जाना जाता है। इसके अलावा यहां हिम तेंदुआ, भालू और कई दुर्लभ पक्षियों की प्रजातियां भी पाई जाती हैं। ऐसे में दोस्तो आग से न केवल वन संपदा को भारी नुकसान हुआ है, बल्कि इन दुर्लभ वन्यजीवों के अस्तित्व पर भी संकट खड़ा हो गया है, लेकिन दोस्तो जंगलों में लगने वाली आग तो चुनौती है ही लेकिन लेकिन जो तस्वीर नैनीताल जिले के रामनगर से आई उसने भी कई किसानों को परेशानी में डाल दिया। दोस्तो, रामनगर के करनपुर क्षेत्र में खेतों में आग लगी। इस अग्निकांड में किसानों की पूरी फसल जलकर राख हो गई। आरोप है कि बिजली विभाग की लापरवाही के चलते यह हादसा हुआ, जिससे किसानों को भारी नुकसान झेलना पड़ा है.उस समय अफरा-तफरी माहौल हो गया, जब गेहूं की तैयार फसल के खेत में अचानक से आग लग गई। कुछ दी देर में आग पूरे खेत में फैल गई और 12 बीघा में फैली गेहूं की फसल जलकर राख हो गई दोस्तो मौके पर मौजूद लोगों की माने तो आग इतनी तेजी से फैली कि कुछ ही मिनटों में पूरी फसल जलकर खाक हो गई। ग्रामीणों को आग बुझाने का मौका तक भी नहीं मिला। ग्रामीणों के मुताबिक आग लगने की वजह बिजली के पोल में शॉर्ट सर्किट बताई जा रही है। पीड़ित किसान का कहना है कि एक दिन पहले ही उन्होंने बिजली विभाग को इस समस्या की जानकारी दी थी, लेकिन कोई भी अधिकारी मौके पर नहीं पहुंचा। आज सुबह 11 हजार वोल्ट की लाइन में जम्फर फटने से चिंगारी निकली और उसी चिंगारी ने खेतों में आग लगा दपड़ी। किसान के अनुसार महज एक मिनट के भीतर पूरी फसल जलकर राख हो गई।

आग लगते ही ग्रामीण मौके पर पहुंचे और पानी की बाल्टियों से आग बुझाने की कोशिश की। कुछ लोगों ने ट्रैक्टर चलाकर आग को रोकने का प्रयास भी किया, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी और पूरी फसल जल चुकी थी। ग्रामीणों का आरोप है कि सूचना देने के बावजूद न तो अग्निशमन विभाग मौके पर पहुंचा और न ही कोई अन्य जिम्मेदार अधिकारी समय पर आया। जल संस्थान की जेई को भी पानी के टैंकर के लिए कहा गया था, लेकिन उन्होंने टैंकर उपलब्ध न होने की बात कहकर पल्ला झाड़ लिया.दोस्तो इस आग से किसानों को बड़ा आर्थिक नुकसान हुआ है और उन्होंने प्रशासन से मुआवजे की मांग की है। वहीं काफी देर बाद मौके पर पहुंचे पटवारी ने निरीक्षण कर मुआवजा दिलाने का आश्वासन दिया है। एक तरफ पहाड़ों में जलते जंगल, जहां वन संपदा और दुर्लभ वन्यजीवों पर संकट गहरा रहा है और दूसरी तरफ मैदान में किसान, जिनकी महीनों की मेहनत कुछ ही मिनटों में राख हो गई। अस्कोट वन्यजीव अभ्यारण्य से लेकर रामनगर तक आग का यह तांडव आखिर कब थमेगा?सबसे बड़ा सवाल यही है—क्या हर साल इस तरह की घटनाओं को “मौसम” कहकर टाल दिया जाएगा, या फिर जिम्मेदार विभागों की जवाबदेही भी तय होगी?क्या बिजली विभाग की लापरवाही पर कार्रवाई होगी? क्या किसानों को समय पर मुआवजा मिल पाएगा? और क्या जंगलों में आग रोकने के लिए इस बार कोई ठोस रणनीति बनाई जाएगी?या फिर हर साल की तरह, तस्वीरें बदलेंगी नहीं, सिर्फ नुकसान बढ़ता जाएगा?इन सवालों के जवाब अब बेहद जरूरी हैं।