दोस्तो, रात में मशालें जल रही हैं दिन में सड़कों पर हुंकार है, लगता है उत्तराखंड में अब युवाओं का सब्र जवाब दे रहा है,कभी कैंडल, कभी मशाल, कभी जुलूस तो कभी सड़क पर प्रदर्शन सवाल एक ही है—आखिर पेपर लीक पर जवाब कब मिलेगा? पहाड़ से लेकर एक ही मांग पेपर लीक पर कब होगा इंसाफ। दोस्तो कुछ लोग ये कहते हैं, जब मेहनत हार जाए और व्यवस्था जीत जाए तब विरोध जन्म लेता है। अब हालात ऐसे हैं कि जिस मुद्दे को कुछ लोग कुछ दिनों की नाराज़गी समझ रहे थे। वही अब शहर-शहर जनाक्रोश बनता दिखाई दे रहा है। कहीं मशाल मार्च निकल रहा है, कहीं पुतले जल रहे हैं तो कहीं केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग गूंज रही है। दोस्तो दिल्ली के जंतर-मंतर पर छात्र आंदोलन के समर्थन में को हल्द्वानी का माहौल भी गर्म दिखाई दिया। एमबीपीजी कॉलेज परिसर से बड़ी संख्या में छात्र एकत्र हुए और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान की प्रतीकात्मक अर्थी के साथ विरोध मार्च निकाला। हाथों में तख्तियां, मुंह पर नारे और सरकार के खिलाफ गूंजते विरोध के बीच छात्र शहर की सड़कों पर अपनी मांगों को बुलंद करते नजर आए। जैसे ही प्रदर्शनकारी तिकोनिया चौराहे के पास पहुंचे, पुलिस ने मार्च को आगे बढ़ने से रोकने का प्रयास किया। इस दौरान छात्रों और पुलिस के बीच तीखी नोकझोंक और धक्का-मुक्की की स्थिति बन गई। दोस्तो प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि पुलिस ने उनकी प्रतीकात्मक अर्थी अपने कब्जे में ले ली, जिससे छात्रों का आक्रोश और बढ़ गया। हालांकि पुलिस ने मौके पर स्थिति को नियंत्रित रखने का प्रयास किया और सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी। देशभर में पेपर लीक के मुद्दे पर जारी विरोध प्रदर्शन की गूंज अब उत्तराखंड के केदारघाटी तक पहुंच गई है। रुद्रप्रयाग के अगस्त्यमुनि में युवाओं और छात्राओं ने प्रदर्शन कर अपना विरोध दर्ज कराया और जंतर-मंतर की घटना को लेकर नाराजगी जताई। प्रदर्शनकारियों ने सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए अपनी मांगों को उठाया।
इतना ही नहीं दोस्तो उत्तराखंड के पहाड़ों में कैसे दिल्ली के जंतर-मंतर की तरह ही गूंज सुनाई दे रही है इसकी बानगी साफ तौर पर आप इन तस्वीरों के जिरए देख सकते हैं समझ सकते हैं युवाओं के साथ खड़े हो रहे समाज को दिल्ली के जंतर-मंतर पर नीट पेपर लीक मामले को लेकर प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर हुए कथित लाठीचार्ज के विरोध की गूंज अब उत्तराखंड में भी सुनाई दे रही है। चमोली के गोपेश्वर में युवाओं और छात्रों ने विरोध प्रदर्शन कर अपना आक्रोश जताया। प्रदर्शनकारियों ने सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए छात्र हितों की रक्षा और निष्पक्ष परीक्षा व्यवस्था की मांग उठाई। पेपर लीक के मुद्दे पर उत्तराखंड में विरोध प्रदर्शन लगातार तेज होता जा रहा है। हरिद्वार में बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं सड़कों पर उतर आए और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर जोरदार प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए परीक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की मांग उठाई। दोस्तो, मशालें सिर्फ अंधेरा दूर करने के लिए नहीं जलाई जातीं, कई बार वे व्यवस्था को आईना दिखाने के लिए भी उठती हैं। उत्तराखंड में जो तस्वीरें सामने आ रही हैं, वे बता रही हैं कि यह मुद्दा अब किसी एक शहर या एक कॉलेज तक सीमित नहीं रहा। हल्द्वानी से हरिद्वार, गोपेश्वर से अगस्त्यमुनि तक, युवाओं की एक ही आवाज सुनाई दे रही है—पेपर लीक पर जवाब चाहिए और दोषियों पर कार्रवाई चाहिए।अब सबसे बड़ा सवाल यही है। क्या सरकार इस गुस्से को सिर्फ राजनीतिक शोर मानकर नजरअंदाज करेगी या फिर युवाओं के भरोसे को लौटाने के लिए ठोस कदम भी उठाएगी? क्योंकि परीक्षा सिर्फ एक पेपर नहीं होती यह लाखों युवाओं के भविष्य, उनके संघर्ष और उनके सपनों का सवाल होती है।फिलहाल उत्तराखंड में विरोध की आवाजें लगातार बुलंद हो रही हैं। अब देखना होगा कि इन आवाजों की गूंज सत्ता के गलियारों तक कितनी मजबूती से पहुंचती है और क्या इन सवालों का कोई ठोस जवाब भी मिलता है।