जी हां अपने उत्तराखंड के लिए शराब जरूरी हो गई बल एक तरफ ठेका बचाने के लिए शासन प्रशासन ने पूरी ताकत झोक दी। वहीं शराब पर नया विवाद सामने आया है, राज्य के एक शराब ठेके से 21 करोड़ की कमाई होने के बावजूद हाल ही में गंगा किनारे शराब पार्टी की तस्वीरें और वीडियो सामने आए हैं, तो फिर हो गया गया हंगामा। Liquor party on the banks of the Ganges दोस्तो कितनी गजब बात है ना, एक शराब का ठेका जो तीर्थनगरी ऋषिकेश के सीमा पर है वो सीमा पर इसलिए क्योंकि धार्मिक क्षेत्र में शराब की दुकान खोलने में मनाही है, लेकिन यहां शराब पीने और उसके बाद बवाल करने की छूट है। जब धार्मिक क्षेत्र ऋषिकेश में शराब की दुकान नहीं खुल सकती है तो वहां जुगाड़ ये कि दूसरे जिले की ऋषिकेश से लगती सीमा पर ठेका खोल दो, अभी यहां इस ठेके के विवाद ने कई सवालों को जन्म दिया और एक युवक की मौत भी हो चुकी इस ठेके से ली गई शराब की वजह से हुए विवाद की वजह से लेकिन अभी वहीं गंगा के किनारे हो रही है शराब पार्टी। दगड़ियो दरअसल ये तस्वीर और ये लोग ऋषिकेश से करीब 20 किलोमीटर दूर शिवपुरी में गंगा किनारे तीन पर्यटक शराब पीते हुए पकड़े गए हैं। एक राफ्टिंग गाइड ने देखा तो उसने राफ्ट किनारे लगाकर विरोध किया। मौके पर अपने बचाव में दारुबाज पर्यटक खुद को लोकल बताने लगे। राफ्टिंग गाइड ने सख्ती दिखाई तो दारूबाजों ने हकीकत उगल दी। दोस्तो ये घटना राज्य की पर्यटन नगरी ऋषिकेश में सुरक्षा और नियमों को लेकर नए सवाल खड़े कर रही है, लेकिन यही नहीं, ऋषिकेश के ढालवाला में स्थित शराब की दुकान इस वक्त प्रदेश का बड़ा सियासी मुद्दा भी बन चुकी है। ढालवाला शराब दुकान का विवाद इस हफ्ते और बढ़ गया, जब दुकान के नजदीक एक युवक की हत्या हो गई। इसके बाद स्थानीय लोग और सामाजिक संगठन दुकान बंद करने की मांग लेकर सड़कों पर उतर आए। शुरुआती विरोध में स्थानीय महिलाएं भी शामिल हुईं और उन्होंने दुकान के खिलाफ आवाज उठाई और अब कैसे यहां पहुंचने वाले पर्यटक गांगा के घाट को पिकनिंक स्पोट समझ बैठे हैं वो ये तस्वीर बता रही है जो मै आपको दिखा रहा हूं। दोस्तो हाल ही में मुनि की रेती नगर पालिका ने भी इस शराब दुकान को बंद करने का प्रस्ताव पारित कर दिया है। ये दुकान मुनि की रेती नगरपालिका क्षेत्र में स्थित है, जो तीर्थ क्षेत्र के अंतर्गत आता है, जबकि जिले के प्रशासनिक क्षेत्र में ये टिहरी जिले में आता है। यही वजह है कि तीर्थ नगरी में शराब की दुकान को लेकर विरोध और तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है। दोस्तो जैसा मेने आपको बताया कि ढालवाला शराब दुकान विवाद सिर्फ स्थानीय ही नहीं बल्कि राजनीतिक स्तर पर भी चर्चा में है। अब तक भारी पुलिस फोर्स और आबकारी विभाग की टीम दुकान पर तैनात है ताकि हालात नियंत्रण में रह सकें। दोस्तो जब ऋषिकेश में शराब पीने के बाद विवाद में एक युवक ने जान गवा दी तो लगा कि अब यहां इस मामले को गंभीरता से लिया जाएंगा लेकिन ऐसा होता अब तक कम ही दिखाई दे रहा है। हाल में हुई घटना पर आबकारी आयुक्त अनुराधा पाल ने इस मामले पर स्पष्टीकरण देते हुए कहा है कि दुकान खोलने का निर्णय हाईकोर्ट के निर्देशों के अनुसार लिया गया है और इसमें युवक की हत्या या स्थानीय विरोध का कोई लेना-देना नहीं है। साथ ही आयुक्त ने कहा कि जबरदस्ती किए गए प्रायोजित आंदोलन से प्रशासन और पुलिस को निपटना होगा और हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया है कि किसी को भी दुकान के सामने प्रदर्शन करने की अनुमति नहीं है, अगर प्रदर्शन करना है तो किसी अन्य सुरक्षित स्थान पर किया जाए। अब ये गजब तर्क दिया गया था। ठीक है हाईकोर्ट ने कहा है लेकिन कानून व्यवस्था को बिगड़ता क्या आयूक्त साहिबा देख सकती हैं, क्या शराब पीने के बाद हुए विवाद में युवक की जान चली जाना, क्या कोई मामूली बात है, तो फिर अब ऐसे बाहरी पार्टी बाजों पर कैसे कर्रवाई होगी। जो यहां तीर्थनगरी में आते हैं शराब खरीदते हैं और भी गंगा जी के घाट पर ही पार्टी करते हैं। तो दोस्तों, एक ओर गंगा किनारे पकड़े गए तीन पर्यटकों का मामला है और दूसरी ओर ढालवाला शराब दुकान का विवाद जो प्रदेश में अब खूब उबाल मार रहा है, और ये शराबी मुद्दा लोगों के सीर चढ़ रहा है बल। ऋषिकेश जैसी तीर्थ नगरी में नियम और कानून का पालन करना जरूरी है, ताकि पर्यटक और स्थानीय दोनों सुरक्षित महसूस करें। प्रशासन और आबकारी विभाग की नजर अब लगातार इन घटनाओं पर बनी हुई है, ये बार कहा जात है, लेकिन ना ही इन अधिकारियों को शारब की पार्टी दिखती है और ना ही शराब की बाल्टी दिखती है। बाल्टी का मतलब ठेके से है। दोस्तों, उत्तराखंड के ऋषिकेश और हरिद्वार तीर्थ क्षेत्र में शराब की दुकान खोलना प्रतिबंधित है, लेकिन टिहरी जिले के ढालवाला में स्थित एक शराब दुकान विवादों में है। ये वही दुकान है, जिसका विरोध स्थानीय लोग, महिलाएं और मुनि की रेती नगर पालिका तक कर रहे हैं, विरोध की वजह सिर्फ धार्मिक और सामाजिक नहीं बल्कि सुरक्षा और कानून का पालन भी है। इसके बावजूद, आबकारी विभाग को इस दुकान से सालाना करीब 21 करोड़ रुपए की कमाई भी होती है, जो अब प्रशासन के लिए चिंता का विषय बन गई है। ढालवाला शराब दुकान विवाद तब और गर्मा गया, जब दुकान के पास एक युवक की हत्या की घटना हुई। इसके बाद स्थानीय लोग, सामाजिक संगठन और महिलाओं ने दुकान बंद करने की मांग शुरू कर दी। मुनि की रेती नगरपालिका ने भी शराब की इस दुकान को बंद करने का प्रस्ताव पारित किया है बल लेकिन आबकारी आयुक्त अनुराधा पाल का कहना है कि दुकान को हाईकोर्ट के निर्देशों के तहत खोलने का आदेश है और हत्या या विरोध का दुकान से कोई लेना-देना नहीं है। इस विवाद में आबकारी विभाग की चिंता सिर्फ कानून का पालन नहीं बल्कि कमाई भी है। सालाना 21 करोड़ रुपए की कमाई वाली इस दुकान से राज्य को बड़ी आमदनी होती है। लेकिन धार्मिक नगरी में शराब की दुकान का विरोध और स्थानीय विरोध प्रदर्शन इसे सियासी और सामाजिक दृष्टि से भी चुनौतीपूर्ण बना देते हैं।
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