Uttarkashi Udari जब आधी रात दरका पहाड़! LIVE तस्वीरे । Landslide । Uttarakhand News

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सोचिए, आधी रात, चारों तरफ सन्नाटा और अचानक पहाड़ दरकने की जोरदार आवाज! उत्तरकाशी के उडरी गांव में लोग नींद से जागे तो सामने था मलबे का सैलाब। जान बचाने के लिए ग्रामीण घरों से बाहर भागे। आखिर रातों-रात ऐसा क्या हुआ कि पूरा गांव दहशत में आ गया? देखिए उडरी से आई खौफनाक तस्वीरें! दोस्तो देवभूमि उत्तराखंड से मौदूजा वक्त में सबसे खौफनाक और रोंगटे खड़े कर देने वाली खबर, तस्वीरें सामने आ रही है! उत्तरकाशी का उडरी गांव, दोस्तो जहाँ विकास के दावों की धज्जियां उड़ाते हुए पहाड़ का एक बहुत बड़ा हिस्सा ताश के पत्तों की तरह भरभराकर जमींदोज हो गया! जब आप और हम अपने घरों में चैन की नींद सो रहे थे, तब उडरी गांव के बेकसूर लोग अपनी जान बचाने के लिए नंगे पैर जंगलों और पहाड़ियों की तरफ भाग रहे थे! कंक्रीट के बने मकान देखते ही देखते मलबे के ढेर में तब्दील हो गए। लेकिन सवाल सिर्फ इस कुदरती कहर का नहीं है, सवाल सिस्टम की उस अंधी और बहरी नीति का है जिसने इन संवेदनशील गांवों को मौ’त के मुहाने पर लावारिस छोड़ दिया है! दोस्तो उत्तरकाशी के डुण्डा विकासखंड का उडरी गांव कल रात अचानक चीख-पुकार से गूंज उठा। पिछले कई दिनों से हो रही मूसलाधार बारिश ने पहाड़ी को इस कदर खोखला कर दिया कि आधी रात को पूरा पहाड़ नीचे खिसक आया। ग्रामीणों को संभलने का मौका तक नहीं मिला। लोग अपने मासूम बच्चों और बुजुर्गों को गोद में उठाकर जान बचाने के लिए भागने लगे। कई घर पूरी तरह मलबे में समा चुके हैं और करोड़ों की संपत्ति पल भर में स्वाहा हो गई। उडरी गांव के लोगों की ये चीखें कोई अचानक नहीं गूंजी हैं।

इस गांव के चारों तरफ का पहाड़ी क्षेत्र पहले से ही बेहद संवेदनशील और ‘डेंजर जोन’ घोषित था। ग्रामीण पिछले कई महीनों से प्रशासन से सुरक्षात्मक कार्य और विस्थापन की गुहार लगा रहे थे। लेकिन फाइलों में दबे अफसरों के कानों पर जूं तक नहीं रेंगी! जब तक आपदा नहीं आती, तब तक हमारा सिस्टम जागता नहीं है। क्या प्रशासन इस बात का इंतजार कर रहा था कि यहाँ कोई बड़ी जनहानि हो जाए? दोस्तो  उडरी गांव तो सिर्फ एक बानगी है। हकीकत ये है कि उत्तरकाशी के दर्जनों गांव इस वक्त बारूद के ढेर पर बैठे हैं। ऑल वेदर रोड के नाम पर पहाड़ों की अनियंत्रित कटान और ब्लास्टिंग ने अंदरूनी पहाड़ियों को खोखला कर दिया है। भूवैज्ञानिक चेतावनी दे रहे हैं कि अगर तुरंत इन गांवों का ट्रीटमेंट या विस्थापन नहीं किया गया, तो आने वाले दिनों में उडरी गांव से भी बदतर तस्वीरें सामने आ सकती हैं। आपदा प्रबंधन के बड़े-बड़े बजट आखिर जा कहाँ रहे हैं? उडरी गांव की इस तबाही ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि पहाड़ पर रहने वाले लोग आज भी भगवान भरोसे ही जी रहे हैं। आपदा आती है, घर उजड़ जाते हैं, नेता आते हैं, मुआवजे का मरहम लगाते हैं और फिर अगले साल की आपदा का इंतजार शुरू हो जाता है। कब तक उत्तराखंड के पहाड़ों में बेकसूर लोगों के आशियाने इस तरह उजाड़ होते रहेंगे?क्या उडरी गांव के इन बेघर हुए परिवारों को तुरंत उचित विस्थापन और न्याय मिलेगा? या फिर इस रिपोर्ट के बाद भी सिस्टम कुंभकर्णी नींद सोता रहेगा? इस लापरवाही के जिम्मेदार अफसरों पर कब कार्रवाई होगी? जवाब तो देना ही होगा! इस वीडियो को इतना शेयर कीजिए कि देहरादून के एसी कमरों में बैठे हुक्मरानों की नींद टूट जाए। अपनी राय कमेंट में लिखना न भूलें।