दोस्तो अबी हाल में सोशल मीडिया पर वायरल एक वीडियो ने उत्तराखंड के एक गांव की तस्वीर ऐसी दिखाई, मानो लोग आज भी सड़क और स्वास्थ्य जैसी बुनियादी सुविधाओं के लिए 100 किलोमीटर तक संघर्ष कर रहे हो, लेकिन जब SDM खुद मौके पर पहुंचे, तो सामने आई तस्वीर ने वायरल दावों की पूरी कहानी ही पलट दी! दावे और हकीकत के बीच निकला पूरा 96 किलोमीटर का फर्क! आखिर वायरल वीडियो में कितना सच था और ग्राउंड पर क्या मिला? क्या सोशल मीडिया पर चंद लाइक्स, शेयर और व्यूज बटोरने के लिए अब हमारे शांत पहाड़ों की झूठी बदहाली परोसने का धंधा शुरू हो चुका है? पिछले कुछ दिनों से इंटरनेट पर एक वीडियो जमकर वायरल हो रहा था, जिसमें दावा किया गया कि उत्तराखंड के ग्राम कमलिया पल्ला के लोग स्वास्थ्य और सड़क जैसी मूलभूत सुविधाओं के लिए 80 से 100 किलोमीटर दूर तड़पने को मजबूर हैं। लेकिन दोस्तो जब इस वायरल वीडियो की गूंज शासन-प्रशासन तक पहुंची, तो खुद SDM और पटवारी की टीम ने बिना कोई वक्त गंवाए सीधे ग्राउंड ज़ीरो का रुख किया। और जब अधिकारियों ने मौके पर जाकर फीता नापा और पूर्व प्रधान से बात की, तो जो सच सामने आया उसने वीडियो बनाने वालों के दावों की धज्जियां उड़ा कर रख दीं! आखिर क्या था उस वायरल वीडियो का झूठ और क्या है कमलिया पल्ला गांव की असली जमीनी हकीकत ये देखिए, सोशल मीडिया की ताकत जितनी बड़ी है, उतनी ही खतरनाक है इस पर फैलने वाली आधी-अधूरी और बढ़ा-चढ़ाकर परोसी गई जानकारियां।
हाल ही में उत्तराखंड के ग्राम कमलिया पल्ला का एक वीडियो इंटरनेट पर वायरल हुआ, जिसमें गांव की दुर्दशा और सुविधाओं के अभाव को लेकर बड़े-बड़े दावे किए गए थे। वीडियो के वायरल होते ही प्रशासन तुरंत हरकत में आया। SDM ने क्षेत्र के पटवारी और पूरी राजस्व टीम के साथ खुद दुर्गम रास्तों को नापते हुए ग्राम कमलिया पल्ला का स्वयं स्थलीय निरीक्षण किया, ताकि सड़क संपर्क और आवश्यक सेवाओं से संबंधित दावों का मौके पर ही दूध का दूध और पानी का पानी किया जा सके। वीडियो का दावा- गांव पूरी तरह सड़क से कटा है! प्रशासन का फैक्ट चेक- निकटतम पक्की सड़क (मिसिंग लिंक) की दूरी 1 KM से भी कम!वर्तमान स्थिति- 1.5 KM की कच्ची सड़क पूरी तरह मोटर चलने योग्य है। दोस्तो जब SDM की टीम ने मौके पर जाकर फीता नापा, तो पहला बड़ा खुलासा सड़क को लेकर हुआ। वीडियो में दावा किया गया था कि गांव पूरी तरह कटा हुआ है, लेकिन धरातल पर कमलिया पल्ला से निकटतम पक्की सड़क, यानी भगवती तलिया मिसिंग लिंक की दूरी 1 किलोमीटर से भी कम पाई गई। हालांकि वर्तमान में यह लगभग 1.5 किलोमीटर लंबी कच्ची सड़क है, लेकिन स्थलीय निरीक्षण में राजस्व टीम ने इसे पूरी तरह से मोटर चलने योग्य और ग्रामीणों के आवागमन के लिए बिल्कुल सुलभ पाया। यानी सड़क बंद होने का दावा पूरी तरह बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया गया था। इससे पहले क्या कहा गया था. वीडियो का दावा- अस्पताल के लिए जाना पड़ता है 80 से 100 KM दूर! प्रशासन का फैक्ट चेक- अतिरिक्त प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (PHC) मात्र 4 KM दूर! ब्लड टेस्ट की दूरी- 24 KM दूर PHC बैजरो (100 KM का दावा पूरी तरह झूठ)। दोस्तो अब बात करते हैं उस सबसे सनसनीखेज दावे की, जिसे लेकर सोशल मीडिया पर सहानुभूति बटोरी जा रही थी।
वीडियो के कैप्शन में चिल्ला-चिल्ला कर कहा गया था कि ग्रामीणों को इलाज के लिए 80 से 100 किलोमीटर का सफर तय करना पड़ता है। लेकिन SDM के निरीक्षण में यह दावा भी पूरी तरह ताश के पत्तों की तरह ढह गया। असलियत यह है कि कमलिया पल्ला के सबसे निकटतम अतिरिक्त प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र यानी एडिशनल PHC की दूरी 4 किलोमीटर से भी कम है। हाँ, यह बात सच है कि ब्लड टेस्ट जैसी बड़ी सुविधाओं के लिए ग्रामीणों को लगभग 24 किलोमीटर दूर PHC बैजरो जाना पड़ता है, लेकिन यह 24 किलोमीटर की दूरी भी वीडियो में बताए गए 100 किलोमीटर के झूठे दावे के आस-पास भी नहीं ठहरती दोस्तो प्रशासन ने यह भी साफ किया कि सरकार क्षेत्र के विकास के लिए लगातार काम कर रही है। घेरखाल लिंक रोड से कमलिया पल्ला–सिल्ली तक एक और नई सड़क का निर्माण कार्य वर्तमान में तेजी से प्रगति पर है। इसके लिए प्रस्ताव और फाइल को आवश्यक वन स्वीकृति यानी फॉरेस्ट क्लीयरेंस और अनुमति प्राप्त करने के लिए केंद्र सरकार और वन विभाग को भेजा जा चुका है। जैसे ही वहां से हरी झंडी मिलेगी, निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार आगे का काम भी पूरा कर लिया जाएगा। दोस्तो सबसे बड़ी बात यह है कि इस पूरे स्थलीय सत्यापन के दौरान गांव के पूर्व ग्राम प्रधान भी राजस्व टीम के साथ मौके पर खुद मौजूद थे और उन्होंने भी माना कि सोशल मीडिया की वीडियो में स्थिति को बहुत ज्यादा तोड़-मरोड़कर और बढ़ा-चढ़ाकर प्रस्तुत किया गया था। दोस्तो पहाड़ों की समस्याओं को उठाना पत्रकारिता और सजग नागरिकता का धर्म है, लेकिन सिर्फ व्यूज, लाइक्स और सनसनी फैलाने के लिए झूठे आंकड़े परोसना और व्यवस्था को बेवजह बदनाम करना कहीं से भी जायज नहीं है, लेकिन दोस्तो ये खबर मेने भी दिखाई थी। मेने भी कई कड़वे सवाल किए थे, लेकिन मेने वो उस तक्वीर पर किए थे जो पहाड़ की नीयती बन चुका है। इसलिए इस खबर से जुड़ी इस खबर को भी आपको दिखाना कर्तव्य था, लेकिन दोस्तो यहां एक बात कहना चाहुंगा सरकार सिस्टम हर उस वीडियो को फेक्ट चैक करे जो डोली। डंडी कंडी पर मरीज को अपस्पातल पहुंचाते हैं। क्या हर जगह हर तस्वीर झूठी होगी या निकलेगी, मुझे नहीं लगता आपको क्या लगता है।