Dehradun Fact Check छात्र की पिटाई पर पुलिस ने तोड़ी चुप्पी! । Dehradun Police । Uttarakhand News

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सड़क पर युवकों की मारपीट का वीडियो सामने आया, तो आरोप सीधे पुलिस पर लगे और मामला देखते ही देखते गरमा गया। लेकिन अब इसी घटनाक्रम में एक ऐसा मोड़ सामने आया है, जिसने पूरी कहानी पर सवाल खड़े कर दिए हैं। आखिर LLM छात्र और पुलिस के बीच उस रात हुआ क्या था? क्या पुलिस पर लगे बर्बरता के आरोप सही हैं, या फिर कहानी का दूसरा पहलू कुछ और है? देखिए इस पूरे मामले का असली सच। दोस्तो देहरादून के प्रेमनगर विवाद पर पुलिस ने तोड़ी चुप्पी, सामने आया पहला आधिकारिक बयान। सोशल मीडिया पर जब किसी घटना की आधी-अधूरी तस्वीरें वायरल होती हैं, तो हर कोई पुलिसिया बर्बरता के नारे लगाने लगता है। देहरादून के प्रेमनगर में 17 अगस्त को हुए एक हाई-वोल्टेज चेकिंग विवाद के बाद भी कुछ ऐसा ही हुआ! इंटरनेट पर पुलिस पर गंभीर आरोप लगे, युवकों के साथ मारपीट की कहानियां बनाई गईं, लेकिन अब इस पूरे मामले पर देहरादून पुलिस ने अपनी चुप्पी तोड़ते हुए एक ऐसा विस्फोटक खंडन जारी किया है, जिसने पूरी कहानी का रुख ही पलट कर रख दिया है! जी हां, जिस घटना को पुलिसिया ज्यादती बताया जा रहा था, उसकी जब असली वस्तुस्थिति सामने आई, तो पता चला कि कानून के ही एक छात्र ने वर्दी पर हाथ डालने की हिमाकत की थी! आखिर क्या हुआ था उस वीवीआईपी चेकिंग के दौरान, और पुलिस के इस पहले बयान के बाद कैसे पूरा मामला पलट गया है? दोस्तो 17 अगस्त का दिन,। देहरादून का प्रेमनगर क्षेत्र जहां एक वीवीआईपी कार्यक्रम के मद्देनजर सुरक्षा एजेंसियां और पुलिस की टीम अलर्ट पर थी और चप्पे-चप्पे पर सघन चेकिंग अभियान चलाया जा रहा था। इसी दौरान बिधोली क्षेत्र में एक ऐसा विवाद खड़ा होता है जो देखते ही देखते सोशल मीडिया पर पुलिसिया बर्बरता और युवकों के साथ मारपीट के आरोपों के साथ वायरल हो जाता है। इंटरनेट पर तरह-तरह की थ्योरी तैरने लगती हैं, लेकिन अब इस पूरे बवाल पर देहरादून पुलिस ने बाकायदा आधिकारिक खंडन जारी करते हुए घटना की पूरी वस्तुस्थिति और कड़वा सच जनता के सामने रख दिया है। शुरुआती विवाद- बिधोली क्षेत्र में बिना हेलमेट वाहन चलाने पर दो पक्षों में मारपीट! सड़क की स्थिति- धक्का-मुक्की के कारण बीच सड़क पर लगा भारी जाम, यातायात बाधित।’

दोस्तो पुलिस द्वारा जारी की गई वस्तुस्थिति के अनुसार, इस पूरे फसाद की जड़ पुलिस नहीं, बल्कि दो वाहन सवार युवकों के बीच की आपसी रंजिश और कानून का उल्लंघन था। बिधोली क्षेत्र में बिना हेलमेट वाहन चलाने को लेकर दो पक्षों के बीच सड़क पर ही तीखी बहस शुरू हो गई। देखते ही देखते यह बहस गाली-गलौज और बीच सड़क पर खुलेआम लात-घूंसों और धक्का-मुक्की में तब्दील हो गई। इस सड़क छाप लड़ाई की वजह से पूरे मार्ग पर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं और यातायात बुरी तरह बाधित हो गया। जब मौके पर तैनात पुलिसकर्मियों ने दोनों पक्षों को शांत कराने और समझाने का प्रयास किया, तो मामला सुलझने के बजाय और बिगड़ गया। अब तो ऊल्टा पुलिस का आरोप है कि जब कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए जवानों ने बीच-बचाव किया, तो दोनों पक्षों के युवक पुलिस पर ही भड़क गए। इस दौरान अमृतम अंशुमल नामक एक युवक ने खुद को कानून यानी एलएलएम (LLM) का छात्र बताते हुए ऑन-ड्यूटी पुलिसकर्मियों के साथ ही धक्का-मुक्की शुरू कर दी और खाकी वर्दी के लिए बेहद अभद्र और अमर्यादित भाषा का इस्तेमाल किया। जो कानून का छात्र दूसरों को न्याय का पाठ पढ़ाने का दावा कर रहा था, वो खुद बीच सड़क पर कानून की धज्जियां उड़ा रहा था। पुलिसिया बर्बरता का नैरेटिव गढ़ने वालों के सामने जब यह सच आया, तो पूरा मामला ही पलट गया। दोस्तो इलाके में वीवीआईपी मूवमेंट और शांति भंग होने की गंभीर आशंका को देखते हुए पुलिस ने बिना कोई वक्त गंवाए सख्त रुख अख्तियार किया। पुलिस ने तत्काल कार्रवाई करते हुए दोनों पक्षों के कुल तीन व्यक्तियों को भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता यानी BNSS की धारा 170, 126 और 135 के तहत हिरासत में ले लिया। नियमानुसार, हिरासत में लिए गए सभी लोगों का पहले सरकारी अस्पताल में विस्तृत मेडिकल परीक्षण कराया गया, ताकि मारपीट या चोट के दावों की सच्चाई साफ हो सके, और उसके बाद उन्हें सक्षम मजिस्ट्रेट के समक्ष पेश किया गया। पुलिस के इस पहले आधिकारिक बयान ने उन सभी अफवाहों पर पूरी तरह विराम लगा दिया है जो सोशल मीडिया पर पुलिस को कटघरे में खड़ा कर रही थीं।

तो दोस्तों, अब सवाल सिर्फ इतना नहीं है कि इस पूरे मामले में कौन सही है और कौन गलत? अगर पुलिस के आधिकारिक बयान के मुताबिक कुछ युवकों ने कानून तोड़ा और पुलिसकर्मियों से धक्का-मुक्की की, तो उस पर कानून के मुताबिक कार्रवाई होनी ही चाहिए। लेकिन सवाल यह भी है कि क्या हर विवाद के बाद मित्र पुलिस की कार्यशैली पर सवाल खड़े होना महज एक संयोग है?कहीं ऐसा तो नहीं कि घटनाओं की शुरुआत भले ही किसी और पक्ष की गलती से हो, लेकिन पुलिस की कार्रवाई और व्यवहार ही पूरे मामले को एक नए विवाद में बदल देता है? कानून सबके लिए बराबर है—युवक हो या पुलिसकर्मी, गलती पर जवाबदेही दोनों की होनी चाहिए। इसलिए जरूरी है कि सोशल मीडिया के अधूरे वीडियो या एकतरफा दावों के बजाय पूरी घटना की निष्पक्ष जांच सामने आए।आखिर सच क्या है, कौन सही है और कौन गलत—इसका फैसला आरोपों से नहीं, बल्कि तथ्यों और निष्पक्ष जांच से होना चाहिए। क्योंकि कानून का सम्मान तभी कायम रहेगा, जब कानून लागू करने वालों पर भी जनता का भरोसा कायम रहे।