Badrinath में हुड़दंग की परमिशन किसकी थी| Chamoli | Cultural Festival | CM Dhami | Uttarakhand News

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दोस्तो, पहाड़ पर बारिश ने ऐसा कहर बरपाया कि कहीं सड़कें मलबे में दब गईं, तो कहीं रास्ते पूरी तरह बंद हो गए। आखिर डुंगरी तल्ला में ऐसा क्या हुआ कि मंत्री को खुद ग्राउंड जीरो तक पहुंचना पड़ा? और केदारनाथ मार्ग पर लैंडस्लाइड के बाद कितनी बड़ी चुनौती खड़ी हो गई? दोस्तो एक बार फिर देवभूमि इस वक्त प्रकृति के सबसे खौफनाक और आक्रामक रूप का सामना कर रही है। पिछले 48 घंटों से जारी मूसलाधार बारिश ने पहाड़ से लेकर मैदान तक हाहाकार मचा दिया है। नदियां उफान पर हैं, पहाड़ दरक रहे हैं और जिंदगी मलबे के साए में जीने को मजबूर है। आपदा के इस खौफनाक मंजर के बीच सरकार और सिस्टम भी अलर्ट मोड पर है। कैबिनेट मंत्री धन सिंह रावत खुद लिफ्ट लेकर, जान की परवाह न करते हुए बेहद दुर्गम और आपदा प्रभावित डुंगरी तल्ला गांव पहुंचे हैं। मंत्री ने अपनी आंखों से तबाही का वो खौफनाक मंजर देखा, जिसने हर किसी का दिल दहला दिया है। लेकिन सिर्फ डुंगरी तल्ला ही नहीं, रुद्रप्रयाग से लेकर चंपावत और उत्तरकाशी तक कुदरत का कहर टूट रहा है। उत्तराखंड में लगातार हो रही भारी बारिश से जन-जीवन अस्त-व्यस्त हो गया है। नैनीताल के धारी इलाके के इस वीडियो में, एक घर के नीचे की दीवार ढह गई, जिससे घर पर खतरा मंडराने लगा है। उत्तराखंड में लगातार हो रही बारिश के चलते बद्रीनाथ-ऋषिकेश नेशनल हाईवे सिरोबगड़ के पास बंद हो गया है. भूस्खलन की आशंका वाले इस इलाके में हाईवे बाधित होने से यात्रियों और श्रद्धालुओं से भरे बड़ी संख्या में वाहन सड़क पर फंस गए हैं. बारिश के कारण आवाजाही प्रभावित है और लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। दोस्तो ये हाल हैं उत्तराखंड का जब मौसून की विदाई होने वाली है।

दोस्तो देवभूमि उत्तराखंड पर प्रकृति का ऐसा आक्रामक प्रहार हुआ है कि पूरा पहाड़ कांप उठा है। पिछले दो दिनों से जारी मूसलाधार बारिश आफत का सबब बन चुकी है। सड़कें टूट चुकी हैं, संपर्क मार्ग जमींदोज हो चुके हैं और कई गांव पूरी दुनिया से कट गए हैं। लेकिन इस महासंकट के बीच जब रास्ते बंद थे, तब जनता का दर्द बांटने के लिए सूबे के कैबिनेट मंत्री धन सिंह रावत ने एक बड़ा और साहसिक फैसला लिया। मंत्री रावत किसी भी तरह आपदा प्रभावितों तक पहुंचना चाहते थे, और इसके लिए उन्होंने लिफ्ट ली और सीधे पहुंच गए सबसे ज्यादा प्रभावित पौड़ी गढ़वाल के डुंगरी तल्ला। दोस्तो डुंगरी तल्ला गांव में जब मंत्री धन सिंह रावत पहुंचे, तो वहां तबाही का मंजर देखकर हर कोई सन्न रह गया। दर्जनों परिवारों के आशियाने मलबे के ढेर में तब्दील हो चुके थे। मंत्री ने अपनी आंखों से आपदा का वो खौफनाक मंजर देखा और सीधे प्रभावित ग्रामीणों के बीच बैठ गए। उन्होंने हर पीड़ित परिवार से मुलाकात की और साफ शब्दों में कहा कि सरकार संकट की इस घड़ी में हर नागरिक के साथ चट्टान की तरह खड़ी है। मंत्री ने अधिकारियों को दो टूक लहजे में निर्देश दिए कि पुनर्वास और राहत कार्यों में एक सेकंड की भी देरी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। सड़कों को तत्काल खोला जाए और पीड़ितों को तुरंत मुआवजा और आर्थिक मदद पहुंचाई जाए। बाइट होगी लगाना एक बार मांग लेना।

दोस्तो डुंगरी तल्ला में जहां प्रशासनिक मशीनरी युद्धस्तर पर जुटी है, वहीं उत्तराखंड का दूसरा हिस्सा रुद्रप्रयाग इस वक्त सबसे बड़े खतरे का सामना कर रहा है। केदारनाथ यात्रा मार्ग पर चीरबासा के पास इतना भयानक लैंडस्लाइड हुआ कि पूरी पहाड़ी का एक बड़ा हिस्सा सड़क पर आ गिरा। पहाड़ी से लगातार हो रही पत्थरों की बारिश के कारण केदारनाथ पैदल मार्ग पूरी तरह ठप हो गया, जिसके चलते करीब 1,500 से लेकर 4,000 श्रद्धालु रास्ते में ही फंस गए। हालात इतने बेकाबू हो गए कि जिला प्रशासन को तुरंत सुरक्षा के लिहाज से ऐतिहासिक चारधाम यात्रा पर ब्रेक लगाना पड़ा। हालांकि, संकट के इन क्षणों में SDRF, NDRF और स्थानीय पुलिस के जांबाज जवानों ने देवदूत बनकर मोर्चा संभाला और जान जोखिम में डालकर इन फंसे हुए श्रद्धालुओं को सुरक्षित स्थानों और गौरीकुंड की तरफ रेस्क्यू किया। दोस्तो कुदरत का यह आक्रामक तांडव सिर्फ रुद्रप्रयाग और पौड़ी तक सीमित नहीं है। मौसम विभाग के आंकड़ों के मुताबिक, चंपावत में रिकॉर्ड 160 मिलीमीटर, काशीपुर में 133 मिलीमीटर और उधम सिंह नगर में 120 मिलीमीटर से ज्यादा बारिश दर्ज की जा चुकी है, जिसने मैदानी इलाकों को जलमग्न कर दिया है। इधर मौसम विभाग ने उत्तरकाशी, देहरादून और हरिद्वार समेत गढ़वाल के कई जिलों में भारी से बहुत भारी बारिश का अलर्ट जारी रखा है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी खुद 24 घंटे इस पूरी स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं और उन्होंने साफ कर दिया है कि जब तक मौसम पूरी तरह शुष्क नहीं हो जाता, तब तक कोई भी ढिलाई नहीं बरती जाएगी। कुदरत उत्तराखंड की परीक्षा ले रही है, लेकिन फौलादी इरादों वाले जवान और संवेदनशील सरकार हर मोर्चे पर डटकर इस आसमानी आफत को मात देने के लिए तैयार खड़ी है।