“बच्चे का बाप कौन?” Mahendra Bhat के सवाल से क्यों मचा बवाल! | Harak Singh Rawat । Uttarakhand News

Spread the love

उत्तराखंड की सियासत में एक पुराने विवाद ने फिर मचा दी हलचल! जैनी प्रकरण पर बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट ने ऐसा सवाल दागा कि कांग्रेस नेता हरक सिंह रावत भावुक हो गए। कैमरे के सामने आंसू छलके, केदारनाथ बाबा की सौगंध खाई और बीजेपी को सीधी चुनौती दे डाली! लेकिन महेंद्र भट्ट का वो कौन-सा सवाल था, जिसने सालों पुराने इस मामले को फिर सुर्खियों में ला दिया? आखिर जैनी प्रकरण की पूरी कहानी क्या है? और क्यों बीजेपी के अध्यक्ष ने पूछ बच्चे का बाप कौन है। दोस्तो देवभूमि की सियासत से इस वक्त की सबसे बड़ी और सबसे सनसनीखेज खबर! वो राज जिसे दफन मान लिया गया था, वो फाइल जो बंद हो चुकी थी। आज उसी फाइल ने उत्तराखंड के सियासी गलियारों में वो बारूद भर दिया है, जिससे कभी भी बड़ा धमाका हो सकता है! जी हां, हम बात कर रहे हैं उत्तराखंड के सबसे चर्चित और विवादित ‘जैनी प्रकरण’ की! एक बार फिर यह मामला बीजेपी और कांग्रेस के बीच आर-पार की जंग का मैदान बन चुका है। बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट ने सीधे कांग्रेस के कद्दावर नेता हरक सिंह रावत को कटघरे में खड़ा कर दिया है और एक ऐसा चुभता हुआ सवाल पूछा है, जिसने पूरी कांग्रेस को हिलाकर रख दिया है। महेंद्र भट्ट पूछ रहे हैं कि भले ही डीएनए टेस्ट में हरक सिंह पाक-साफ निकले, लेकिन जब जैनी उन्हीं के घर में रहती थी, तो आज तक जनता को यह क्यों नहीं बताया गया कि आखिर उस बच्चे का असली पिता कौन है? उत्तराखंड की राजनीति में भूचाल लाने के लिए सिर्फ एक नाम ही काफी है और वो नाम है- ‘जैनी प्रकरण’। साल 2003 की एनडी तिवारी सरकार के वक्त से शुरू हुआ यह विवाद आज 2026 में भी रुकने का नाम नहीं ले रहा है। चुनावी माहौल के बीच बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट के एक तीखे बयान ने इस मामले की सुलगती आग में घी डालने का काम कर दिया है। भट्ट ने सीधे तौर पर हरक सिंह रावत की घेराबंदी करते हुए बच्चे के पिता की पहचान सार्वजनिक करने की मांग कर डाली है।

दोस्तो क्या यह जैनी प्रकरण कांग्रेस के कार्यकाल का काला सच है। दोस्तो बीजेपी के इस सीधे हमले के बाद कांग्रेस नेता हरक सिंह रावत का गुस्सा सातवें आसमान पर पहुंच गया। खुद पर लगे इन पुराने दागों को फिर से उछाले जाने पर हरक सिंह रावत मीडिया के सामने न सिर्फ आगबबूला हुए, बल्कि बेहद भावुक होकर रो पड़े। उन्होंने केदारनाथ बाबा की कसम खाते हुए मुख्यमंत्री और बीजेपी को खुली चुनौती दे डाली। दोस्तो इस पूरे मामले ने अब एक कानूनी और पारिवारिक जंग का रूप भी ले लिया है, जहां हरक सिंह रावत की पत्नी दीप्ति रावत ने भी जमीन विवाद और इन आरोपों को लेकर कोर्ट जाने की चेतावनी दे दी है। लेकिन जनता के मन में आज भी वही सबसे बड़ा कौतूहल और जिज्ञासा बनी हुई है कि आखिर इस हाई-प्रोफाइल केस का असली सच क्या है? दोस्तो  तो आपने देखा, जैनी प्रकरण का यह जिन्न एक बार फिर बोतल से बाहर आ चुका है। एक तरफ बीजेपी है जो इसे कांग्रेस की नैतिकता का पतन बताकर घेर रही है, तो दूसरी तरफ हरक सिंह रावत हैं जो अपने सर्वनाश तक की कसम खाकर अपनी बेगुनाही का दावा ठोक रहे हैं। अब देखना यह होगा कि क्या चुनाव से पहले इस मामले के तथ्य सार्वजनिक होते हैं, या फिर यह विवाद सिर्फ सियासी रोटियां सेकने का जरिया बनकर रह जाएगा।