दोस्तो, चुनावी दहलीज पर पहुंचते ही बीजेपी के अंदर बगावत की ऐसी चिंगारी भड़की है, जिसने उत्तराखंड की सियासत में हलचल मचा दी है!रामशरण नौटियाल ने बीजेपी से इस्तीफा देकर सीधे संगठन पर सवालों की बौछार कर दी है!नौटियाल का दावा—संगठन में छिपे हैं कई ‘विभीषण’जिन्होंने चुनाव हरवाया, आज उन्हीं को जहाज में घुमाया जा रहा है!तो सवाल अब सिर्फ इस्तीफे का नहीं है। सवाल ये है कि क्या बीजेपी के भीतर ये बगावत सिर्फ एक ट्रेलर है?और सबसे बड़ा सियासी सवाल—क्या रामशरण नौटियाल अब कांग्रेस का हाथ थामने की तैयारी में हैं?जहाँ सम्मान नहीं, वहाँ रुकना नहीं—नौटियाल के इस बयान ने चुनाव से पहले सियासी पारा चढ़ा दिया है!पूरी खबर में जानिए। बीजेपी से बगावत के पीछे आखिर क्या है पूरा खेल? उत्तराखंड की सियासत में इस वक्त वो भूचाल आया है जिसकी तपिश सीधे देहरादून से लेकर दिल्ली दरबार तक महसूस की जा रही है। विधानसभा चुनावों की दहलीज पर खड़ी भारतीय जनता पार्टी को अपने ही घर में एक ऐसा जख्म मिला है, जिसे भरना आसान नहीं होगा। चक्रौता से लेकर जौनसार-बावर तक गहरी राजनीतिक पैठ रखने वाले वरिष्ठ नेता रामशरण नौटियाल ने बीजेपी से आधिकारिक तौर पर इस्तीफा दे दिया है! और इस्तीफा भी ऐसा-वैसा नहीं। बल्कि सीधे प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट और संगठन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करते हुए दिया है। नौटियाल ने साफ कहा है कि बीजेपी के अंदर कई ‘विभीषण’ बैठे हैं, जो पीठ में छुरा घोंप रहे हैं। क्या यह बीजेपी में शुरू हुई एक बड़ी बगावत का सिर्फ ट्रेलर है? ये दोस्तो “हां, इस्तीफा मैंने दिया है! ये वो शब्द हैं जिन्होंने उत्तराखंड बीजेपी के भीतर खलबली मचा दी है। हमेशा खुद को सबसे अनुशासित और एकजुट बताने वाली बीजेपी का आंतरिक कलह अब सरेआम चौराहे पर आ चुका है। जौनसार क्षेत्र के कद्दावर नेता और मशहूर बॉलीवुड गायक जुबिन
नौटियाल के पिता रामशरण नौटियाल ने आखिरकार बीजेपी को ‘अलविदा’ कह दिया है। ‘उत्तराखंड न्यूज़’ को दिए अपने बेहद तीखे और एक्सक्लूसिव इंटरव्यू में रामशरण ने साफ कर दिया कि जहां आत्मसम्मान न हो, वहां रुकने का कोई मतलब नहीं बनता। उन्होंने सीधे प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट को चुनौती देते हुए कहा है कि अब खुद भट्ट साहब जनता को बताएं कि आखिर मैंने इस्तीफा क्यों दिया?” रामशरण नौटियाल उत्तराखंड की राजनीति का कोई छोटा नाम नहीं हैं। अगर उनके सियासी करियर पर नज़र डालें, तो वो लंबे समय से जौनसार-बावर क्षेत्र में सामाजिक और राजनीतिक रूप से सक्रिय रहे हैं। साल 2022 के उत्तराखंड विधानसभा चुनाव में बीजेपी ने उन्हें चक्रौता जैसी कठिन और कांग्रेस का गढ़ मानी जाने वाली सीट से अपना उम्मीदवार बनाया था। हालांकि, बेहद कड़े मुकाबले में उन्हें हार का सामना करना पड़ा। लेकिन बीजेपी छोड़ने के बाद जो आरोप उन्होंने लगाए हैं, वो बेहद गंभीर हैं। नौटियाल का दर्द छलका कि जिन्होंने पार्टी के भीतर रहकर उन्हें चुनाव हरवाने का काम किया, संगठन आज उन्हें सजा देने के बजाय हवाई जहाजों की सैर करा रहा है! बीजेपी जिस ‘विभीषण’ थ्योरी का इस्तेमाल दूसरी पार्टियों को तोड़ने के लिए करती थी, आज वही विभीषण खुद बीजेपी के अपने ही घर को लंका की तरह ढहाने में लगे हैं। नौटियाल का दावा है कि उन्होंने संगठन के बड़े आकाओं को उन नेताओं के नाम भी बताए थे जो भीतरघात कर रहे हैं, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई।
अब जब राज्य में चुनावी बिगुल फूंकने की तैयारी हो रही है, तब जौनसार के इस क्षत्रप का जाना बीजेपी के वोट बैंक में बड़ी सेंध लगा सकता है। चक्रौता और आसपास की सीटों पर नौटियाल का व्यक्तिगत प्रभाव है, जिससे बीजेपी का चुनावी समीकरण पूरी तरह बिगड़ सकता है।” तो दोस्तो क्या अब रामशरण नौटियाल का अगला ठिकाना कांग्रेस होने वाला है? क्या वो हाथ का साथ थामकर बीजेपी को और बड़ा जख्म देंगे? इस सवाल पर फिलहाल नौटियाल ने अपने पत्ते पूरी तरह से नहीं खोले हैं। उनका कहना है कि अभी किसी अन्य दल में जाने का उनका कोई प्लान नहीं है। लेकिन राजनीति में ‘अभी नहीं’ का मतलब ‘कभी नहीं’ बिल्कुल नहीं होता। चुनावी दहलीज पर खड़ा उत्तराखंड यह अच्छी तरह जानता है कि यह इस्तीफा सिर्फ एक शुरुआत है। टिकट बंटवारे और चुनाव पास आते-आते बीजेपी के भीतर गुटबाजी का यह जो सिर्फ एक ट्रेलर दिखा है, वह आने वाले दिनों में पूरी फिल्म में तब्दील हो सकता है