दोस्तो, ज़रा सोचिए, अगर आधी रात को सोते हुए अचानक ऐसा धमाका हो कि पूरा पहाड़ आपके घर पर टूट पड़े तो क्या होगा? कुछ ही सेकंड में खुशियों का आशियाना मलबे में बदल जाए और परिवार की ज़िंदगी दांव पर लग जाए। आखिर ऐसी खौफनाक रात मसूरी में क्यों आई? कैसे रात के अंधेरे में मलबे का सैलाब घर पर टूट पड़ा? और कैसे पूरा परिवार मौत के इतने करीब पहुंचकर भी बाल-बाल बच गया? बताऊंगा आपको पूरी कहानी दोस्तो, लगातार हो रही मूसलाधार बारिश ने मसूरी में एक परिवार के लिए ऐसी रात ला दी, जिसे शायद वे जिंदगीभर नहीं भूल पाएंगे। देर रात जेपी बैंड के पास अचानक पहाड़ी से भारी मलबा और बोल्डर घर पर आ गिरे। देखते ही देखते घर का बड़ा हिस्सा क्षतिग्रस्त हो गया। गनीमत रही कि घर के अंदर मौजूद सभी लोग समय रहते सुरक्षित बाहर निकल आए और एक बड़ा हादसा टल गया। दोस्तो ये तस्वीरें पहाड़ों की रानी मसूरी में लगातार हो रही बारिश की है और उसके बाद लोगों पर पड़ रही भारी मूसीबत की। बारिश अब लोगों के लिए मुसीबत का सबब बनती जा रही है। एक ओर मसूरी-देहरादून मार्ग पर पानी वाले बैंड के पास भारी भूस्खलन से सड़क का बड़ा हिस्सा क्षतिग्रस्त हो गया है, वहीं दूसरी ओर जेपी बैंड क्षेत्र में देर रात हुए मलबा प्रवाह ने कई परिवारों की जिंदगी को मुश्किल में डाल दी। दोस्तो देर रात हुई तेज बारिश के दौरान जेपी बैंड के पास पहाड़ी से भारी मात्रा में मलबा और पत्थर नीचे आ गए। ये मलबा सीधे पीडब्ल्यूडी आवासों तक पहुंच गया, जिससे कई कमरों और घरों में मलबा घुस गया। घरों में रखा फर्नीचर, बिस्तर, इलेक्ट्रॉनिक सामान, कपड़े और दैनिक उपयोग की वस्तुएं पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गईं। दोस्तो जिस समय यह घटना हुई, उस दौरान एक ही परिवार के पांच बच्चे और दंपति घर के अंदर मौजूद थे। अचानक घर में मलबा घुसने से अफरा-तफरी मच गई। परिवार के सदस्यों ने किसी तरह घर से बाहर निकलकर अपनी जान बचाई।
स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि कुछ मिनट और देरी हो जाती तो बड़ा हादसा हो सकता था। वहीं दोस्तो पीड़ित परिवारों ने इस घटना के लिए क्षेत्र में चल रहे निर्माण कार्यों को जिम्मेदार ठहराया है। उनका आरोप है कि घरों के ऊपर बड़े पैमाने पर निर्माण किया जा रहा है और निर्माणकर्ताओं द्वारा निकाला गया मलबा जंगलों, ढलानों और प्राकृतिक नालों में डाला गया है। साथ ही पीड़ित परिवार ये कहता है कि इस संबंध में कई बार प्रशासन और संबंधित विभागों से शिकायत की गई, लेकिन समय रहते कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई, लेकिन इस घटना की खबर मिलते ही क्षेत्रीय सभासद पहुंची प्रभावित परिवारों से मुलाकात कर नुकसान का जायजा लिया। साथ ही कहा कि जेपी बैंड के ऊपर चल रहे निर्माण कार्यों के दौरान मलबा वैज्ञानिक तरीके से निस्तारित नहीं किया गया, जिसके कारण यह स्थिति उत्पन्न हुई है।सभासद ने कहा कि वह दोषी लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग करेंगी। साथ ही प्रभावित परिवारों को हर संभव सहायता दिलाने का प्रयास किया जाएगा। इतना ही नहीं इस हादसे ने प्रशानिक अमले को भी सोचने पर मजबूर कर दिया। क्योंकि वहीं घटना का संज्ञान लेते हुए नगर पालिका अध्यक्ष मीरा सकलानी और एसडीएम मसूरी राहुल आनंद ने भी अपनी टीम को मौके पर भेजा। अधिकारियों ने प्रभावित परिवारों से बातचीत कर नुकसान का आकलन शुरू कर दिया है। प्रशासन की ओर से आश्वासन दिया गया है कि पीड़ितों को हर संभव राहत और सहायता उपलब्ध कराई जाएगी। दोस्तो यहां मै आपको बता दूं कि मसूरी में पिछले कई दिनों से लगातार बारिश हो रही है, जिससे भूस्खलन और मलबा आने की घटनाएं बढ़ती जा रही हैं। पानी वाले बैंड पर सड़क धंसने और अब जेपी बैंड क्षेत्र में हुए नुकसान ने एक बार फिर पहाड़ी क्षेत्रों में अनियोजित निर्माण और मलबा निस्तारण की व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि समय रहते नालों की सफाई, ढलानों की सुरक्षा और निर्माण गतिविधियों की निगरानी नहीं की गई तो आने वाले दिनों में और भी बड़े हादसे हो सकते हैं। फिलहाल प्रभावित परिवार प्रशासन से राहत, मुआवजे और भविष्य में ऐसी घटनाओं की रोकथाम के लिए ठोस कार्रवाई की उम्मीद लगाए बैठे हैं, लेकिन एक तरफ से आसमानी आफत तो वहीं दूसरी तरफ प्रशासनिक चूंक लोगों पर भारी पड़ती दिखाई दे रही है।