Bageshwar ‘वोट चाहिए तो सड़क दो!’ | Malla Danpur | Kapkot | Road Protest | BJP | Uttarakhand News

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दोस्तो क्या आज के डिजिटल इंडिया में भी किसी गांव को सिर्फ 8 किलोमीटर की सड़क के लिए देवताओं की कसम खाकर आंदोलन करने पर मजबूर होना चाहिए? उत्तराखंड को बने 26 साल हो गए, लेकिन बागेश्वर के कपकोट विधानसभा का मल्ला दानपुर क्षेत्र आज भी आदिम युग में जीने को मजबूर है! जनप्रतिनिधियों के खोखले आश्वासनों से तंग आकर अब यहाँ की जनता ने भूमिया देवता को याद कर आर-पार की लड़ाई का शंखनाद कर दिया। पिछले एक महीने से ‘फुलवाड़ी, फलाचौरा और खालीधार सड़क संघर्ष समिति’ के बैनर तले ग्रामीण धरने पर बैठे हैं, और अब यह गुस्सा गांव-गांव फैलने लगा है। सबसे बड़ी बात यह है कि इस आंदोलन को बीजेपी के ही पूर्व विधायक का खुला समर्थन मिल रहा है, जो वर्तमान व्यवस्था की पोल खोलता है! आखिर क्यों मल्ला दानपुर के लोग आज भी उपेक्षित हैं? बताउंगा आपको। दोस्तो उत्तराखंड के बागेश्वर जिले का कपकोट विधानसभा क्षेत्र और इस क्षेत्र का सबसे दुर्गम इलाका मल्ला दानपुर, यहाँ के ग्रामीण आज भी एक अदद पक्की सड़क के लिए तरस रहे हैं। सालों-साल जनप्रतिनिधियों के दफ्तरों के चक्कर काटने और सिर्फ झूठे आश्वासन मिलने के बाद, अब ग्रामीणों का सब्र का बांध टूट गया है। लोक आस्था के प्रतीक भूमिया देवता का स्मरण कर ग्रामीणों ने फुलवाड़ी, फलाचौरा और खालीधार सड़क संघर्ष समिति के बैनर तले महा-आंदोलन शुरू कर दिया है। पिछले एक महीने से चल रहा यह धरना अब एक बड़ी जन-क्रांति का रूप ले चुका है।

दोस्तो इस जन-आंदोलन की कमान किसी नेता ने नहीं, बल्कि देश की रक्षा कर चुके सेना से सेवानिवृत्त सूबेदार कैप्टन रतन सिंह दानू ने संभाली है। कैप्टन रतन सिंह दानू के नेतृत्व में अब क्षेत्र के पूर्व अध्यापक, जैसे चंचल सिंह, और जागरूक सामाजिक कार्यकर्ता भी सड़कों पर उतर आए हैं। ग्रामीणों की साफ मांग है कि क्षेत्र के लिए प्रस्तावित लगभग 8 किलोमीटर के मोटर मार्ग का निर्माण कार्य तुरंत, यानी बिना किसी देरी के शुरू किया जाए। अगर काम शुरू नहीं हुआ, तो यह आंदोलन मल्ला दानपुर के हर एक गांव और हर एक घर तक फैलाया जाएगा। दोस्तो इस आंदोलन ने तब सबसे बड़ा राजनीतिक मोड़ ले लिया, जब सत्ताधारी दल के ही पूर्व विधायक शेर सिंह गढ़िया और स्थानीय सक्रिय बीजेपी नेता प्रेम सिंह भी आंदोलन स्थल पर पहुंच गए और ग्रामीणों को अपना खुला समर्थन दे दिया। मीडिया से बातचीत करते हुए खुद बीजेपी के इन नेताओं और आंदोलनकारियों ने वर्तमान विधायक पर क्षेत्र की घोर उपेक्षा का आरोप लगाया, उनका सीधा कहना है कि मल्ला दानपुर के ग्रामीणों की मूलभूत समस्याओं को मौजूदा नेतृत्व ने कभी गंभीरता से लिया ही नहीं, जिसके कारण आज पूरी घाटी में सरकार और स्थानीय प्रशासन के खिलाफ भारी नाराजगी और गुस्सा उबल रहा है।

दोस्तो सड़क न होने का सबसे बड़ा दंश पहाड़ की मातृशक्ति को झेलना पड़ता है। बीमार बुजुर्गों को डोली में लादकर मुख्य सड़क तक पहुंचाना हो या गर्भवती महिलाओं को अस्पताल ले जाना, बिना सड़क के जिंदगी नर्क जैसी हो जाती है। आंदोलन में डटीं तारा देवी और राधा दानू की हुंकार साफ बता रही है कि अब महिलाएं पीछे हटने वाली नहीं हैं,उन्होंने साफ चेतावनी दे दी है कि चुनाव में वोट मांगने आने वाले नेताओं को इस बार मल्ला दानपुर की सीमा में घुसने भी नहीं दिया जाएगा, जब तक कि सड़क निर्माण की पहली ईंट नहीं रख दी जाती। दोस्तो 8 किलोमीटर की सड़क के लिए एक महीने से बुजुर्गों, महिलाओं और फौजियों का धरने पर बैठना हमारी व्यवस्था के मुंह पर एक बहुत बड़ा तमाचा है। देखना होगा कि इस जन-आक्रोश रैली और गांव-गांव फैलते आंदोलन के बाद शासन-प्रशासन की नींद कब टूटती है। बागेश्वर के मल्ला दानपुर के इन लोगों की आवाज को देहरादून और दिल्ली के गलियारों तक पहुंचाने के लिए इस वीडियो को फेसबुक और यूट्यूब पर ज्यादा से ज्यादा शेयर करें। कमेंट बॉक्स में अपनी राय जरूर दें।