जी हां दोस्तो उत्तराखंड बीजेपी में बड़ा कन्फ्यूजन चल रहा है, कैसे किया जाय क्या किया जाय। अब तक तो सब प्रदेश स्तर पर देखने को मिल रहा था लेकिन जैसे उत्तराखंड पहुंचे बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन तो किसी को कुछ समझ नहीं आ रहा था। एक बारगी लगा नितिन नवीन साहब भी असहज हो गए। अब जिन नेताओं को पार्टी ने किनारे कर दिया था, उन्हीं से राष्ट्रीय अध्यक्ष का स्वागत क्यों कराया गया?क्या ये कोई रणनीति थी या फिर संगठन के भीतर का अंदरूनी संदेश? स्वागत की तस्वीरों ने अब कई बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं और सियासी गलियारों में चर्चा तेज हो गई है कि आखिर इस पूरी सियासी तस्वीर के पीछे की असली कहानी क्या है? पूरी खबर बताता हूं। जी हां दोस्तो तो क्या बीजेपी की ये कौन सी रणनीति है क्या ये नाराज चल रहे है नेताओं को मनाने की कोशिश है या, या फिर नितिन नवीन को ये ये बताने की कोशिश की ये ही हैं जो बात बात में उखड़ रहे हैं। बीच में है नितिन नवीन और उनके अगल बगल सीएम धामी और प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट लेकिन स्वागत के लिए सबसे पहले आते हैं बिशन सिंह चुफाल साहब बड़े ही कन्फ्यूजन में हैं क्या किया जाय क्या नहीं नीतीन नवीन भी इंतजार कर रहे हैं अब जो हाथ में लाये हो वो दे तो आगे बढ़िये फिर एक अलश लेकर आते हैं विनोद चमोली। उनके चेहरे के हावभाव भी वैसे नहीं हैं जैसे अक्सर वो दिखाई देते हैं। अब तीसरी तस्वीर देखिए तीसरे नंबर एंट्री होती है, गदर पुर बीजेपी के विधायक अरविंद पांडे की उनको भी कुछ समझ नहीं आ रहा है कि जिस कतार में पार्टी ने उनको खड़ा किया है वहां किया जाय और क्या नहीं।
हां दोस्तो इस वीजियो में अरविंद पांडे के हाथ में कुछ नहीं था और एक और नेता जी हैं आदेश चौहान वो भी बस रश्म अदायगी कर रहे हैं। देहरादून से इस वक्त की बड़ी सियासी तस्वीरें सामने आई है जो अब राजनीतिक गलियारों में कई सवाल खड़े कर रही हैं। सवाल यह है कि क्या उत्तराखंड बीजेपी ने जानबूझकर उन विधायकों से राष्ट्रीय अध्यक्ष का स्वागत कराया, जिनके नाराज़ होने की चर्चाएँ लंबे समय से सियासी गलियारों में चल रही थीं?तस्वीरों में साफ देखा गया कि वरिष्ठ नेता बिशन सिंह चुफाल, विनोद चमोली, अरविंद पांडे और आदेश चौहान ने राष्ट्रीय अध्यक्ष का स्वागत किया और यही तस्वीरें अब चर्चा का केंद्र बन गई हैं हालांकि अरविंद पांडे का बयान भी आया नितीन नवीन के के उत्तराखंड दौरे को लेकर। दोस्तो इतना ही नहीं, मुख्यमंत्री और अन्य वरिष्ठ नेताओं के स्वागत की तस्वीरों में भी कुछ ऐसे ही संकेत देखने को मिले हैं, जिससे पार्टी की अंदरूनी रणनीति पर सवाल उठने लगे हैं।क्या यह सिर्फ एक सामान्य संगठनात्मक कार्यक्रम था? या फिर इसके पीछे कोई खास राजनीतिक संदेश छुपा हुआ है?क्या नाराज़ माने जाने वाले नेताओं को मंच पर लाकर पार्टी ने एकजुटता का संदेश देने की कोशिश की है, या फिर यह सिर्फ एक संयोग है?इन तमाम सवालों के बीच अब राजनीतिक हलकों में चर्चाओं का बाजार गर्म है, और हर कोई इस सियासी तस्वीर के पीछे की असली कहानी जानना चाहता है।