Chamoli डाक विभाग की बड़ी चूक! | Tungeshwar | India Post | Postal Department | Uttarakhand News

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दोस्तो क्या आप यकीन करेंगे कि जिन जरूरी दस्तावेज़ों का लोग महीनों से इंतज़ार कर रहे थे, वो लोगों तक पहुंचने के बजाय बोरियों में बंद पड़े मिले? चमोली के तुंगेश्वर डाकघर से सामने आया है एक ऐसा मामला जिसने डाक विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। आधार कार्ड, पैन कार्ड, ATM कार्ड और स्पीड पोस्ट की सैकड़ों डाक कथित तौर पर पोस्टमैन के कमरे में बरामद हुई। दोस्तो हद हो रही है उत्तराखंड के डाक विभाग में और नए नए कारनामे कर रहे हैं। बाहरी पोस्ट मैन। दोस्तो कुछ दिन पहले आपने देखा होगा कि पिथौड़गड़ के धारचुला के एक पोस्ट ऑफिर में कैसे हंगामा हुआ था, जहां तैनात एक हरियाणा की महिला डाक कर्मचारी ने ये तक कह दिया था कि ज्यादा हल्ला करोगे तो तो लड़की हूं फंसा दुंगी, उसके बाद विभाग को शिकायत हुई और विभागीय जांच में ये पाया गया कि, हरियाणा की महिला डाक कर्मी के कमरे से बोरों में भरी डांक मिली थी, जिसमें कई दस्तावेज थे जिनको महीनों से बांटा ही नहीं गया था। जी हां दोस्तो इस तस्वीर में आपको जो बोरे भर कर कागज-पतर, चिट्ठी पत्री देख रहे हैं ये उत्तराखंड के ग्रामीणों की हैं। दोस्तो क्या आपने कभी सोचा है कि आपका आधार कार्ड, पैन कार्ड, एटीएम कार्ड या कोई बेहद जरूरी स्पीड पोस्ट महीनों तक आपके पास न पहुंचे और बाद में पता चले कि वह किसी डाकिए के कमरे में बोरियों में बंद पड़ी थी? दोस्तो सुनने में यह किसी फिल्म की कहानी लग सकती है, लेकिन उत्तराखंड के चमोली जिले के तुंगेश्वर क्षेत्र से सामने आया मामला कई गंभीर सवाल खड़े कर रहा है। आरोप है कि, साल 2025 से अब तक की सैकड़ों महत्वपूर्ण डाक लोगों तक पहुंचाने के बजाय पोस्टमैन ने अपने निजी कमरे में रख छोड़ी।

इस खुलासे के बाद पूरे क्षेत्र में आक्रोश है और लोग जवाब मांग रहे हैं। दोस्तो मामला चमोली जनपद के थराली विकासखंड के तुंगेश्वर क्षेत्र का है। ग्रामीणों का आरोप है कि लंबे समय से उन्हें आधार कार्ड, पैन कार्ड, बैंक एटीएम, बैंकिंग दस्तावेज और स्पीड पोस्ट जैसी जरूरी डाक समय पर नहीं मिल रही थी, लेकिन यह मामला तब चर्चा में आया जब स्थानीय निवासी विनोद पांडे को अपनी बेटी का आधार कार्ड सड़क किनारे पड़ा हुआ मिला। सवाल उठना स्वाभाविक था कि आखिर इतना महत्वपूर्ण दस्तावेज सड़क पर कैसे पहुंचा? दोस्तो स्थानीय ग्रामीणों ने जब उन्होंने पोस्टमैन से जवाब मांगा तो कथित तौर पर संतोषजनक उत्तर नहीं मिला। इसके बाद ग्रामीणों ने पोस्टमैन के कमरे का निरीक्षण किया। आरोप है कि वहां तीन से चार बोरियों में बड़ी मात्रा में डाक रखी हुई मिली, जो महीनों से लोगों तक नहीं पहुंची थी। दोस्तो अगर ये आरोप सही हैं, तो सोचिए उन परिवारों का क्या हुआ होगा जो अपने जरूरी दस्तावेजों का इंतजार करते रहे होंगे? दोस्तो अब सबसे बड़ा सवाल, क्या किसी का बैंक एटीएम समय पर नहीं मिलने से उसका आर्थिक काम प्रभावित हुआ होगा? क्या किसी छात्र का प्रवेश, किसी बुजुर्ग की पेंशन या किसी सरकारी योजना का लाभ सिर्फ इसलिए अटक गया क्योंकि दस्तावेज समय पर नहीं पहुंचे? क्या डाक विभाग के पास ऐसी कोई व्यवस्था नहीं थी जिससे महीनों तक डाक वितरण न होने की जानकारी मिल सके? और दोस्तो सबसे अहम बात ये है कि क्या यह सिर्फ एक कर्मचारी की लापरवाही है या पूरे सिस्टम की निगरानी में कहीं बड़ी चूक हुई है? क्योंकि इससे पहले ऐसे कई मामले सामने आ चुके हैं दोस्तो जहां लापरवाहियां बड़ी थी। यहां तक की कई डाक कर्मी स्थानीय को धमकाते और डराते भी दिखाई दिए हैं, लेकिन ऐसी लापरवाहियों पर कोई ठोस कार्रवाई आखिर क्यों नहीं होती, यहां दोस्तो इस मामले में ग्रामीणों का कहना है कि पिछले लगभग डेढ़ वर्ष से नियमित डाक वितरण नहीं हुआ। यदि ऐसा है तो क्या किसी अधिकारी ने कभी यह जांचने की कोशिश नहीं की कि क्षेत्र में डाक सही तरीके से बांटी जा रही है या नहीं?

यह मामला केवल एक गांव का नहीं है, बल्कि पूरे डाक तंत्र की जवाबदेही पर सवाल खड़ा करता है और वहीं जब विभाग से सवाल किया जाता है तो क्या कहा जता है, वो तो आपने देखा होगा कि मामला बेहद संवेदनशील है। ऐसी लापरवाही को बर्दास्त नहीं किया जाएगा, लेकिन फिर एक और और कारनामा कर दिया जाता है। इस मामले में दोस्तो चमोली के अधीक्षक डाकघर अजय कुमार ने माना है कि पोस्टमैन द्वारा अपने कमरे में डाक रखना नियमों के विरुद्ध है। उन्होंने बताया कि मामले की जांच कराई गई है और संबंधित पोस्टमैन के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की जा रही है। दोस्तो यानी विभाग ने प्रथम दृष्टया इस मामले को गंभीर माना है, लेकिन सवाल अभी भी बाकी हैं। क्या केवल विभागीय कार्रवाई काफी होगी?क्या जिन लोगों को नुकसान हुआ, उनकी जिम्मेदारी तय होगी?क्या भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए नई निगरानी व्यवस्था बनाई जाएगी?और सबसे महत्वपूर्ण। क्या जनता का डाक व्यवस्था पर भरोसा फिर से बहाल हो पाएगा? दोस्तो आधार कार्ड हो, पैन कार्ड हो, एटीएम हो या कोई कानूनी दस्तावेज—ये सिर्फ कागज नहीं होते, बल्कि आम लोगों की जिंदगी से जुड़े अहम दस्तावेज होते हैं। यदि इनके वितरण में इस तरह की लापरवाही होती है तो उसका असर सीधे नागरिकों के अधिकारों और सुविधाओं पर पड़ता है।अब सभी की नजर जांच और विभागीय कार्रवाई पर है। उम्मीद यही है कि दोष तय होगा, जिम्मेदारी तय होगी और भविष्य में ऐसी लापरवाही दोबारा देखने को नहीं मिलेगी। दोस्तो फिलहाल तुंगेश्वर का यह मामला पूरे प्रदेश में चर्चा का विषय बना हुआ है और लोगों के मन में सिर्फ एक सवाल गूंज रहा है—अगर हमारी डाक भी कहीं बोरियों में बंद पड़ी हो, तो उसकी जिम्मेदारी आखिर किसकी है?