दोस्तो वीरों की भूमि, संतों की भूमि और देवभूमि कहे जाने वाले उत्तराखंड का राजा आखिर कौन है? क्या कोई एक व्यक्ति खुद को इस पूरे राज्य का किंग घोषित कर सकता है? योगनगरी ऋषिकेश में इन दिनों एक नाम को लेकर जबरदस्त उबाल है, और वो नाम है—जग्गा! पुराना टिहरी बस स्टैंड के पास एक भवन के गेट पर बकायदा ‘किंग ऑफ उत्तराखंड जग्गा’ का बोर्ड चमका दिया गया! जैसे ही स्थानीय जागरूक युवाओं की नजर इस पर पड़ी, उनका खून खौल उठा। आखिर एक शांत और धार्मिक नगरी में खुद को उत्तराखंड का सुल्तान बताने की जुर्रत किसने की? युवाओं का हुजूम सीधे ऋषिकेश कोतवाली जा पहुंचा और कोतवाल यशपाल सिंह बिष्ट का घेराव कर दिया! आज मै आपको अपनी इस खास रिपोर्ट में दिखाउंग कि इस ‘किंग’ के बोर्ड के पीछे की असली हकीकत क्या है और पुलिस अब इस जग्गा पर क्या कड़ा हंटर चलाने वाली है! जी हां दोस्तो ये ऋषिकेश है, जिसे दुनिया योग की राजधानी और गंगा की पवित्र त्रिवेणी के रूप में जानती है, लेकिन इसी ऋषिकेश में पिछले कुछ समय से कानून को खुली चुनौती दी जा रही थी।
पुराना टिहरी बस स्टैंड के पास बने एक भवन के मुख्य गेट पर एक सिक्ख युवक द्वारा बकायदा बोर्ड टांगा गया, जिसपर लिखा था—’किंग ऑफ उत्तराखंड जग्गा’। इस बोर्ड ने न सिर्फ स्थानीय लोगों का ध्यान खींचा, बल्कि देवभूमि के स्वाभिमान को भी ठेस पहुंचाई। स्थानीय जनता का पूछना है कि जिस उत्तराखंड को हजारों शहीदों और आंदोलनकारियों ने अपने खून से सींचा है, वहां रातों-रात कोई खुद को ‘किंग’ कैसे घोषित कर सकता है? दोस्तो एक सिक्ख युवक द्वारा अपने आपको किंग ऑफ उत्तराखंड पर नाराज ऋषिकेश के स्थानीय निवासियों और जागरूक युवाओं का सब्र आखिरकार टूट गया। युवाओं का एक बड़ा दस्ता सीधे ऋषिकेश कोतवाली जा पहुंचा, युवाओं ने वहां जमकर नारेबाजी की और साफ शब्दों में कहा कि तीर्थनगरी में किसी भी तरह की गुंडागर्दी या खुद को राज्य का राजा बताने की इस घटिया मानसिकता को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। युवाओं का कहना है कि यह देवभूमि के सामूहिक गौरव का अपमान है और ऐसे भड़काऊ बोर्ड तुरंत हटाए जाने चाहिए।
दोस्तो मामला जैसे ही कोतवाली प्रभारी यशपाल सिंह बिष्ट के पास पहुंचा, उन्होंने स्थिति की गंभीरता को भांप लिया। कोतवाल यशपाल सिंह बिष्ट ने युवाओं को शांत कराया और साफ शब्दों में संदेश दे दिया कि उत्तराखंड में सिर्फ और सिर्फ कानून का राज चलेगा, किसी व्यक्ति विशेष का नहीं! पुलिस ने तुरंत मामले का संज्ञान लेते हुए जांच शुरू कर दी है और स्थानीय टीम को उस भवन पर जाकर कानूनी कार्रवाई करने के निर्देश दे दिए हैं। कोतवाल के इस कड़े तेवर ने साफ कर दिया है कि देवभूमि की शांति भंग करने की कोशिश करने वालों को बख्शा नहीं जाएग। इतना ही नहीं है दोस्तो लोगों ने कहा यहां का किंग कोई और कैसे हो सकता है जहां किंग भगवान बद्री को माना जाता है, मै आपको आक्रोशित युवाओं की जुबनी सुना रहा हूं, कैसे ये मामला तूल पकड़ता जा रहा है। तो क्या खुद को सोशल मीडिया या किसी बोर्ड पर ‘किंग’ लिख देने से कोई कानून से ऊपर हो जाता है? ऋषिकेश के युवाओं ने आज यह साफ कर दिया है कि देवभूमि का राजा यहाँ का आम नागरिक और यहाँ की संस्कृति है, कोई जग्गा या बग्गा नहीं! अब देखना यह होगा कि ऋषिकेश पुलिस इस मामले में कितनी जल्दी इस विवादित बोर्ड को हटाकर आरोपी युवक पर क्या एक्शन लेती है। इस पूरे ‘किंग ऑफ उत्तराखंड’ विवाद पर आपकी क्या राय है?