दोस्तो क्या साल 2026 के भारत में आज भी किसी नेता की जाति देखकर जगह को अपवित्र मान लिया जाता है? या फिर धर्म की आड़ में राजनीति का सबसे गंदा खेल खेला जा रहा है? उत्तराखंड के हल्द्वानी से एक ऐसी खबर आई है, जिसने देश के लोकतंत्र और सामाजिक ताने-बाने को झकझोर कर रख दिया है! Kharge’s rally in Haldwani कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने जहां रैली की, वहां दो दिन बाद बकायदा गंगाजल छिड़का गया, मंत्र पढ़े गए और यज्ञ-हवन करके उस जगह को ‘शुद्ध’ किया गया! अब कैसे हुआ संसद से हल्द्वानी तक महा-संग्राम! दोस्तो “तारीख थी 8 अगस्त 2026। जगह—हल्द्वानी का ऐतिहासिक रामलीला मैदान, कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे मंच पर दहाड़ रहे थे। उत्तराखंड चुनाव 2027 का बिगुल फूंक रहे थे… रैली खत्म हुई, नेता चले गए, लेकिन ठीक दो दिन बाद, 11 अगस्त को इसी मैदान में जो हुआ, उसने पूरे देश की राजनीति में बारूद का काम कर दिया!
‘श्री राम सेना धर्मार्थ सेवा न्यास’ नाम के एक संगठन के लोग ढोल-नगाड़ों और पंडितों के साथ इस मंच पर पहुंचते हैं। बकायदा वैदिक मंत्रोच्चार होता है, गंगाजल का छिड़काव होता है और एक बड़ा यज्ञ करके मंच का ‘शुद्धीकरण’ किया जाता है! सवाल ये है कि आखिर इस शुद्धीकरण की नौबत क्यों आई? दोस्तो इस तस्वीर पर अब हंगामा है.. इस घटना की खबर जैसे ही दिल्ली पहुंची, भूचाल आ गया। खुद मल्लिकार्जुन खड़गे ने देश की सबसे बड़ी पंचायत यानी राज्यसभा में खड़े होकर बेहद भावुक और आक्रामक अंदाज में अपनी बात रखी। खड़गे ने साफ कहा कि ये देश के करोड़ों दलितों का अपमान है! सुनिए खड़गे का वो बयान जिसने सरकार को बैकफुट पर ला दिया। कांग्रेस ने सीधा आरोप लगाया है कि ये घिनौनी हरकत बीजेपी और आरएसएस की शह पर काम करने वाले संगठनों ने की है। कांग्रेस का कहना है कि बीजेपी की मानसिकता आज भी दलित विरोधी है।
दोस्तो “विवाद इतना बढ़ा कि मानसून सत्र के आखिरी दिनों में संसद की कार्यवाही रोकनी पड़ी। विपक्ष के तीखे हमलों के बाद खुद केंद्रीय मंत्री और बीजेपी अध्यक्ष जेपी नड्डा को मोर्चा संभालना पड़ा। नड्डा ने इस घटना पर खेद जताते हुए साफ किया कि बीजेपी ऐसी किसी भी हरकत का समर्थन नहीं करती। यह घटना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। हमारी सरकार और हमारी पार्टी सामाजिक समरसता में विश्वास रखती है। इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाएगी और दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा। “तो क्या हल्द्वानी में जो हुआ वो वाकई सिर्फ ‘मंच की धार्मिक पवित्रता’ को वापस पाने की कोशिश थी? या फिर 2027 के चुनाव से ठीक पहले उत्तराखंड की राजनीति को ध्रुवीकरण की आग में झोंकने की एक सोची-समझी साजिश? चाहे जो भी हो, लेकिन इस घटना ने यह साबित कर दिया है कि देश में विकास और मुद्दों की राजनीति चाहे जितनी बात कर ली जाए, अंत में लड़ाई जाति और धर्म के उसी पुराने दलदल में आकर फंस जाती है। इस पूरे शुद्धीकरण कांड पर आपकी क्या राय है? क्या आपको लगता है कि यह खड़गे जी का अपमान है? कमेंट बॉक्स में अपनी राय जरूर दें।