दोस्तो शांत बैठी उत्तराखंड की सियासत में अचानक से बवाल हो गया, बवाल उत्तराकंड में ही नहीं देश में भी बड़ी तेजी की साथ आग की तरह फैलात दिखाई दिया। जहां हुई थी कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष की रैली उसे मैदान को गंगाजल से साफ कर उसका शुद्धिकरण कर डाला गया और जहां कांग्रेस का आरोप है कि ये दलितों का अपमान है तो वहीं कैसे बीजेपी ने इस मामले से अपना झाड़ा और जिसने शुद्धीकरण किया उनकी वो दो टूक बात क्या है, जिससे उत्तराखंड में खलबली है, तो दोस्तो सबसे पहले वो तस्वीर देखनी चाहिए जिस पर देश की संसद में गूंज सुनाई दी। तो दोस्तो क्या उत्तराखंड की देवभूमि अब सियासी अखाड़े में तब्दील हो चुकी है? हल्द्वानी के रामलीला मैदान से उठी चिंगारी ने पूरी राज्य की राजनीति में बारूद भर दिया है! कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे की जनसभा क्या खत्म हुई, पीछे से एक संगठन ने मैदान पर गंगाजल छिड़क कर उसका ‘शुद्धीकरण’ कर दिया! कांग्रेस का खून खौल उठा है, वो इसे सीधे-सीधे देश के सबसे बड़े दलित नेता का अपमान बता रही है और बीजेपी को कटघरे में खड़ा कर रही है! लेकिन ठहरिए। इस कहानी में एक बहुत बड़ा ट्विस्ट आ गया है! शुद्धीकरण करने वाली संस्था ने सामने आकर ऐसा बयान दे दिया है, जिसने कांग्रेस के आरोपों की दिशा ही मोड़ दी है! आखिर क्या है हल्द्वानी के इस ‘शुद्धीकरण कांड’ का पूरा सच?
दोस्तो 8 अगस्त को हल्द्वानी के रामलीला मैदान में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने 2027 के चुनाव के लिए हुंकार भरी थी। रैली कामयाब रही, लेकिन दो दिन बाद यानी 11 अगस्त को इसी मैदान में कुछ ऐसा हुआ जिसने उत्तराखंड की सियासत में भूचाल ला दिया। ‘श्री राम सेना धर्मार्थ सेवा न्यास’ के कार्यकर्ताओं ने मंच पर जाकर बकायदा यज्ञ-हवन किया और गंगाजल से पूरे इलाके को धो डाला। इसे नाम दिया गया—मंच का शुद्धीकरण! इस एक घटना ने देवभूमि की शांत वादियों में राजनीतिक आग लगा दी। दोस्तो इस घटना सामने आते ही कांग्रेस का गुस्सा सातवें आसमान पर पहुंच गया। उत्तराखंड कांग्रेस के दिग्गजों से लेकर दिल्ली तक के नेताओं ने इसे सीधे तौर पर जातिवाद से जोड़ दिया। कांग्रेस का आरोप है कि मल्लिकार्जुन खड़गे दलित समाज से आते हैं, इसलिए बीजेपी के इशारे पर उनका यह अपमान किया गया है। दोस्तो कांग्रेस ने जैसे ही इस मुद्दे को बीजेपी और आरएसएस की साजिश बताया, वैसे ही शुद्धीकरण करने वाली संस्था ‘श्री राम सेना’ ने सामने आकर एक ऐसा बयान दे दिया, जिसने कांग्रेस के दावों की हवा निकाल दी। संस्था ने साफ किया कि उनका इस राजनीति से कोई सरोकार नहीं है और ना ही वो किसी नेता की जाति के खिलाफ हैं। तो दोस्तो सुना आपने इस पूरे घटनाक्रम से बीजेपी का दूर-दूर तक कोई लेना-देना नहीं है। हम किसी राजनीतिक दल के इशारे पर काम नहीं करते। हमारा विरोध मल्लिकार्जुन खड़गे की जाति से बिल्कुल नहीं था। हमारा विरोध उस मंच से लगे सनातन विरोधी और विशेष समुदाय के नारों से था।
रामलीला मैदान एक पवित्र धार्मिक स्थल है, जिसे कांग्रेसियों ने अपवित्र किया था। हमने सिर्फ उस स्थान की धार्मिक पवित्रता को बहाल करने के लिए सनातन पद्धति से हवन-पूजन किया है। इसे राजनीति का रंग न दिया जाए। दोस्तो इस पूरे मामले में उत्तराखंड बीजेपी खुद को बैकफुट पर पा रही है। एक तरफ कांग्रेस उसे दलित विरोधी साबित करने पर तुली है, तो दूसरी तरफ हिंदूवादी संगठन अपने दम पर इस कार्रवाई को सही ठहरा रहा है। हालांकि, दिल्ली की संसद में भी इस मुद्दे पर थोड़ी गरमा-गरमी जरूर दिखी, जहां बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा ने इस घटना को दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए जांच का भरोसा दिया। वहीं उत्तराखंड बीजेपी ने भी इस विवाद से खुद को पूरी तरह अलग कर लिया है। तो दोस्तो सच्चाई आपके सामने है। एक तरफ कांग्रेस इसे 2027 के चुनाव से पहले दलित अस्मिता और सम्मान की लड़ाई बना रही है, तो दूसरी तरफ शुद्धीकरण करने वाले इसे सिर्फ और सिर्फ सनातन और मैदान की मर्यादा की रक्षा बता रहे हैं। लेकिन सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या 2027 के उत्तराखंड विधानसभा चुनाव से ठीक पहले, विकास, बेरोजगारी और पलायन जैसे मुद्दों को पीछे छोड़कर, देवभूमि की राजनीति को जाति और धर्म के इसी खतरनाक चक्रव्यूह में फंसाने की तैयारी हो चुकी है? इस पूरे ‘शुद्धीकरण कांड’ पर आपकी क्या सोच है? क्या कांग्रेस का आरोप सही है या संस्था का तर्क? अपनी राय कमेंट में जरूर लिखें।