Paper Leak पर बड़ा हंगामा! Dehradun #NSUI Protest Uttarakhand News

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दोस्तो, आखिर कब तक पेपर लीक का यह सिलसिला यूं ही छात्रों के भविष्य से खेलता रहेगा? क्या परीक्षा व्यवस्था पूरी तरह सवालों के घेरे में आ चुकी है? दून की सड़कों परजो गदर देखने को मिला, क्या वह सिर्फ गुस्सा था या फिर सिस्टम के खिलाफ फूट पड़ा भरोसे का विस्फोट? पूरी खबर बताउंगा आपको कि कैसे छात्रों ने लगा दिए बड़े आरोप है कि बार-बार पेपर लीक होने के बावजूद जिम्मेदारों पर कोई बड़ी कार्रवाई नहीं हो रही है। दोस्तो वैसे हमारे देश की बिगड़ती जा रही व्यवस्था को कौन सुधारेगा? और जब हालात सड़कों तक पहुंच गए, पुलिस से नोकझोंक हुई और इस्तीफे की मांग उठी, तो क्या यह आंदोलन अब एक बड़े सियासी तूफान में बदलने जा रहा है? क्योंकि दोस्तो ऐसा ही आक्रोश बीते कुछ वक्त में अलग अलग प्रदेशों में देखने को मिला था जब हजारों की संख्या में छात्रा पेपर लीक के खिलाफ सड़क पर उतर आए थे और अभी हाल में दिल्ली के जंतर-मंतर पर भी कॉक्रोच जानता पार्टी के बेनर तले हजारों युवाओं ने पेपर लीक को लेकर सवाल किया था और केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा मांगा था। ऐसा ही नाजारा अब उत्तराखंड में देखने को मिल रहा है। दोस्तो ये कहने को कांग्रेस के युवाओँ का प्रदर्शन है एनएसयूआई का लेकिन युवाओं को कांग्रेस के दिग्गजों का साथ भी खूब मिला। नीट पेपर लीक को लेकर विपक्ष ने केंद्र सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल रखा है। आज 8 जून सोमवार को एनएसयूआई के कार्यकर्ताओं ने देहरादून में विरोध प्रदर्शन किया।

इस दौरान कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने उत्तराखंड सचिवालय कूच करते हुए केंद्रीय शिक्षा मंत्री धमेंद्र प्रधान का इस्तीफा मांगा। दोस्तो एनएसयूआई ने सचिवालय घेराव करने का प्रयास किया, लेकिन पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को सचिवालय से पहले सुभाष रोड पर बेरिकेडिंग लगाकर रोक दिया। इस दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों की तीखी नोकझोंक भी हुई, बात धक्का-मुक्की तक भी पहुंची गई थी। दोस्तो इतना ही नहीं तने में कुछ प्रदर्शनकारी बेरिकेडिंग के ऊपर चढ़ गए और सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी करते हुए पेपर लीक मामलों पर अपना आक्रोश व्यक्त किया। प्रदर्शनकारियों को बेरिकेडिंग से नीचे उतरने के लिए पुलिस को वाटर कैनन का इस्तेमाल भी करना पड़ा, लेकिन प्रदर्शनकारी बेरिकेडिंग के ऊपर डटे रहे और लगातार नारेबाजी करते रहे। छात्रों के समर्थन में पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत, कांग्रेस पार्टी के चुनाव प्रबंधन समिति के अध्यक्ष हरक सिंह रावत, चुनाव अभियान समिति के अध्यक्ष प्रीतम सिंह भी प्रदर्शन में शामिल हुए. इस दौरान हंगामा बढ़ता देख पुलिस ने एनएसयूआई कार्यकर्ताओं समेत प्रीतम सिंह को पुलिस लाइन भेज दिया। कांग्रेस नेताओं और छात्र संगठन से जुड़े नेताओं का आरोप है कि आज देश भर में परीक्षा प्रणाली संदेह के घेरे में आ गई है लगभग सभी पेपर संपन्न होने से पहले ही लीक हो जा रहे हैं और इसमें कहीं ना कहीं भाजपा से जुड़े लोगों की साठ गांठ है। सचिवालय कूच के दौरान कांग्रेस नेताओं ने मांग की कि देश के शिक्षा मंत्री को अपने पद पर रहने का कोई अधिकार नहीं है. तमाम आरोप लग रहे हैं फिर भी एक भी भाजपा का नेता उस पर स्पष्टीकरण देने के लिए आगे नहीं आ रहा है।

आखिर इस चुप्पी को क्या समझें, इसके अलावा कांग्रेस ने आरोप लगाया कि पूरे देश भर में सैकड़ों बच्चे पेपर लीक का शिकार होकर जान गवां चुके हैं। सरकार से जुड़ा कोई भी नेता उनको सांत्वना देने न तो उनके घर गया और न ही कोई मदद की। घोषणा की सरकार की या बेरुखी भी दर्शाती है कि कहीं ना कहीं इस पूरे प्रकरण में भाजपा के लोग शामिल हैं लिहाजा भाजपा उन्हें बचाना चाहती है। इसीलिए कांग्रेस इस मुद्दे को लेकर सड़कों पर रहेगी और जब तक देश के शिक्षा मंत्री अपने पद से इस्तीफा नहीं देंगे तब तक आंदोलन अनवरत चलता रहेगा इसके लिए चाहे उन्हें जेल की सलाखों के पीछे भी जाना पड़े। एनएसयूआई ने यह भी ऐलान किया कि आज तो उत्तराखंड सचिवालय घेरने आए हैं। आगे जरूरत पड़ी तो केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के घर का भी घेराव किया जाएगा, तो दोस्तो, सवाल अब भी वहीं खड़ा है—क्या पेपर लीक की यह समस्या वाकई सिस्टम की बड़ी विफलता है या फिर राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप के बीच छात्रों का भविष्य कहीं पीछे छूट रहा है?दून की सड़कों पर जो गुस्सा देखने को मिला, वह सिर्फ एक प्रदर्शन था या फिर आने वाले बड़े आंदोलन की आहट?पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच हुई नोकझोंक, सचिवालय घेराव की कोशिश और इस्तीफे की मांग—इन सबके बीच सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर इस पूरे विवाद का समाधान कब और कैसे निकलेगा?और सबसे अहम सवाल—क्या सरकारें इस आवाज को गंभीरता से लेंगी या फिर यह आंदोलन और तेज होता जाएगा?फिलहाल नजरें टिकी हैं आगे की कार्रवाई और सरकार के रुख पर।