दोस्तो देहरादून में एक बड़ा और चौंकाने वाला मामला सामने आया था, लेकिन क्या अब कानून के शिकंजे में आएगा दबंग बिल्डर? क्या DRDO वैज्ञानिक से मारपीट का मामला बनेगा नजीर? तड़ीपार की कार्रवाई से जाएगी साफ संदेश—कानून से ऊपर कोई नहीं? कैसे विवादित बिल्डर पर पुलिस करने जा रही है बड़ा वार। दोस्तो देहरादून में एक बिल्डर है जिस पर एक नहीं तीन तीन मुकदमे दर्ज हैं लेकिन फिर भी कोई ठोस और बड़ी कार्रवाई देखने को नहीं मिली, लेकिन अब खबर बड़ी आ रही है कि डीआरडीओ वैज्ञानिक अनिरुद्ध शर्मा के साथ मारपीट के मामले में विवादित बिल्डर पुनीत अग्रवाल पर पुलिस ने शिकंजा कसना शुरू कर दिया है। गुंडा एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज हो चुका है और अब तड़ीपार की तैयारी भी तेज बताई जा रही है। दोस्तो उत्तराखंड के देहरादून में रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) के एक वैज्ञानिक पर हमला करने के आरोपी बिल्डर पुनीत अग्रवाल पर गुंडा अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया गया है। बिल्डर से 7 दिन के अंदर जवाब मांगा गया है। पुनीत अग्रवाल को देहरादून से जिला बदर किए जाने की भी संभावना है।
दोस्तो एक सरकारी विज्ञप्ति के अनुसार, देहरादून के जिलाधिकारी सविन बंसल ने हिंसा और खुलेआम लोगों को प्रताड़ित करने की घटनाओं में बिल्डर पुनीत अग्रवाल की संलिप्तता का स्वतः संज्ञान लिया है और कार्रवाई शुरू की है। दोस्तो बयान के अनुसार सहस्रधारा रोड पर एटीएस कॉलोनी के निवासी बिल्डर को अपना जवाब दाखिल करने के लिए सात दिन का समय दिया गया है। ऐसा करने में विफल रहने पर उसे औपचारिक रूप से जिला बदर (देहरादून जिले में प्रवेश पर पाबंदी) करने की कार्रवाई शुरू की जाएगी। दोस्तो बिल्डर पुनीत अग्रवाल के खिलाफ ये कार्रवाई हाल में हुई एक घटना के बाद की गई है, जिसमें पुनीत अग्रवाल पर डीआरडीओ के वैज्ञानिक अनिरुद्ध शर्मा पर हमला करने का आरोप है। इस हमले में वैज्ञानिक बुरी तरह घायल हो गए। बताया जा रहा है कि उनके एक कान का पर्दा फट गया। दोस्तो इस पूरे घटनाक्रम के अनुसार नगर निगम की भूमि पर अवैध निर्माण के दौरान मलबा वैज्ञानिक अनिरुद्ध शर्मा के के मकान में गिर रहा था। इसका विरोध करने पर पुनीत अग्रवाल ने शर्मा से कथित रूप से अनिरुद्ध शर्मा के साथ मारपीट की। फलस्वरूप अनिरुद्ध शर्मा के कान में गंभीर चोटें आयीं। दोस्तो यहां चौकाने वाली बात ये है कि अग्रवाल पर वर्तमान मे भारतीय न्याय संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत पांच प्राथमिकी दर्ज हैं. इनमें धाराएं 115(2) (जानबूझकर चोट पहुंचाना), 351(2) (आपराधिक धमकी देना), 74 (गरिमा पर हमला करना) और 126(2) (गलत तरीके से रोकना) शामिल हैं।
दोस्तो खबर ये भी कि दीवाली समारोह के दौरान नाबालिगों पर पिस्तौल लहराने के आरोप में जिलाधिकारी ने पहले ही अग्रवाल का शस्त्र लाइसेंस निलंबित कर दिया था। साथ ही दोस्तो यह भी बताया गया है कि बिल्डर के खिलाफ अन्य आरोपों में लोगों को अपने वाहन से टक्कर मारने का प्रयास करना, एटीएस कॉलोनी रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशन (आरडब्ल्यूए) की बैठकों के दौरान अपशब्दों का प्रयोग करना और जाली दस्तावेजों के माध्यम से एक विधवा की जमीन पर अनाधिकृत कब्जा करना शामिल है। अब दोस्तो जिला प्रशासन के अनुसार, रायपुर पुलिस को नोटिस तामील करवाने और पांच मई को सुनवाई से पहले उसका अनुपालन दर्ज करवाने के निर्देश किए हैं. बिल्डर के खिलाफ कार्रवाई की मांग को लेकर एटीएस कॉलोनी के लोगों ने शनिवार को धरना प्रदर्शन भी किया था तो सवाल साफ है। क्या इस बार कार्रवाई अंजाम तक पहुंचेगी या फिर मामला पहले की तरह ठंडे बस्ते में चला जाएगा?क्या गुंडा एक्ट और तड़ीपार की तैयारी वाकई सिस्टम की सख्ती दिखाएगी या ये भी सिर्फ कागज़ी कार्रवाई बनकर रह जाएगी?देहरादून में उठे इस मामले ने एक बार फिर कानून-व्यवस्था और प्रभावशाली लोगों पर कार्रवाई को लेकर कई बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं।फिलहाल निगाहें प्रशासन की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं क्या पीड़ित को मिलेगा पूरा न्याय? और क्या ये केस बनेगा एक मिसाल?