Dehradun Nursing कर्मियों का सब्र टूटा! | Protest | Subodh Uniyal | Congress | Uttarakhand News

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जी हां दोस्तो अपने उत्तराखंड की राजधानी में जब नर्सिंग कर्मियों का सब्र टूटा तो हंगामा खूब मचा, जहां पुलिस से हो गई बड़ी टक्कर वहीं उत्तराखंड के इन कर्मचारियों पूछ लिया स्वास्थ्य मंत्री और मुख्यमंत्री से वाया या हमारे साथ किया बड़ा विश्वास घात, कैसे सीएम आवास पर हुआ हाई वोल्टेज ड्रामा और क्या ये बवाल मचाने वाला मामला बताऊंगा आपको पूरी खबर। दोस्तो इन तस्वीरों को देख कर लगा कि सरकार के वादों पर भरोसा करने वाले नर्सिंग कर्मियों का सब्र अब जवाब देने लगा है। पहले स्वास्थ्य मंत्री के आवास के बाहर विरोध प्रदर्शन के दौरान एक महिला कर्मी ने फिनायल पीकर अपनी जान देने की कोशिश की और अब मुख्यमंत्री आवास घेराव के दौरान एक और नर्सिंग कर्मी ने खुद को घायल करने की कोशिश की। आखिर भर्ती की मांग कर रहे युवाओं को बार-बार सड़क पर उतरने की नौबत क्यों आ रही है? क्या सरकार अपने ही वादों से पीछे हट गई है, या फिर आंदोलन को टालने की कोशिश हो रही है? उधर, महिला कांग्रेस ने भी सरकार पर वादाखिलाफी का आरोप लगाया है। आखिर भर्ती को लेकर यह टकराव क्यों बढ़ता जा रहा है? दोस्तो, सवालों के जवाब देगा कौन। कई महीनों से वर्षवार भर्ती की मांग को लेकर आंदोलन कर रहे नर्सिंग एकता मंच का विरोध अब लगातार उग्र होता जा रहा है।

दोस्तो कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने सरकार और और सिस्टम सवाल कर दिए। कह दिया कि  सवालोंसंविदा नर्सें जहर मांग रही थीं, अब छात्र सड़क पर हैं। ये सरकार वादा करके मुकर जाती है। कैबिनेट में नियमितीकरण का फैसला पास किया, फिर U-turn ले लिया। दोस्तो  नर्सिंग भर्ती की मांग को लेकर शुरू हुआ आंदोलन अब निर्णायक दौर में पहुंचता दिखाई दे रहा है। कई महीनों से लगातार धरना-प्रदर्शन कर रहे नर्सिंग एकता मंच के सदस्यों का कहना है कि सरकार ने वर्षवार भर्ती का भरोसा दिया था, लेकिन अब परीक्षा तिथि घोषित कर अपने ही वादे से पीछे हट गई है। प्रदर्शन के दौरान पहले स्वास्थ्य मंत्री के आवास के बाहर चार महिला नर्सिंग कर्मियों ने फिनायल पीकर आ’त्महत्या का प्रयास किया। इसके बाद मुख्यमंत्री आवास घेराव के दौरान एक अन्य नर्सिंग कर्मी ने खुद को घायल करने की कोशिश की। इन घटनाओं के बाद आंदोलन और तेज हो गया है। दोस्तो आंदोलनकारियों का आरोप है कि सरकार के साथ कई दौर की वार्ता हुई। आश्वासन भी मिले, लेकिन ज़मीनी स्तर पर कोई ठोस फैसला नहीं हुआ। उनका कहना है कि अगर सरकार पहले वर्षवार भर्ती पर सहमत थी, तो अब परीक्षा की तारीख घोषित करने की क्या मजबूरी थी? इधर दोस्तो पहले दिन से आंदोलन का समर्थन कर रही महिला कांग्रेस की प्रदेश अध्यक्ष ज्योति रौतेला ने भी सरकार पर वादाखिलाफी का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि नर्सिंग कर्मियों की मांग जायज़ है और सरकार को अपने वादे पर कायम रहना चाहिए। दोस्तो इस पूरे घटनाक्रम ने सरकार की भर्ती नीति और संवाद प्रक्रिया पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। प्रदर्शनकारी साफ कह रहे हैं कि जब तक वर्षवार भर्ती पर स्पष्ट निर्णय नहीं लिया जाता, तब तक आंदोलन जारी रहेगा। वहीं दूसरी ओर, सरकार का कहना है कि भर्ती प्रक्रिया को नियमों और पारदर्शिता के साथ आगे बढ़ाया जा रहा है। हालांकि, आंदोलनकारी इस दलील से संतुष्ट नहीं हैं और इसे अपने साथ अन्याय बता रहे हैं। दोस्तो भर्ती की मांग से शुरू हुआ यह आंदोलन अब सरकार और नर्सिंग कर्मियों के बीच भरोसे की लड़ाई बनता जा रहा है। एक तरफ प्रदर्शनकारी अपने भविष्य को लेकर सड़क पर हैं, तो दूसरी तरफ सरकार नियमों और प्रक्रिया का हवाला दे रही है।क्या सरकार और आंदोलनकारियों के बीच कोई सहमति बनेगी? क्या वर्षवार भर्ती की मांग पर नया फैसला होगा? या फिर यह आंदोलन आने वाले दिनों में और उग्र रूप लेगा?