दोस्तो क्या जिन कंधों पर महिलाओं की सुरक्षा की जिम्मेदारी होती है, वही अगर कटघरे में खड़े दिखाई दें तो जनता किस पर भरोसा करे? क्या खाकी की वर्दी का मतलब कानून की रक्षा है या फिर कुछ लोग उसकी आड़ में उसकी गरिमा को भी दागदार कर रहे हैं? और अगर ड्यूटी पर तैनात पुलिसकर्मियों पर ही युवती से छेड़छाड़ जैसे गंभीर आरोप लग जाएं, तो सवाल सिर्फ दो सिपाहियों पर नहीं बल्कि पूरी व्यवस्था पर खड़े होते हैं। कैसे नैनीताल में पुलिस वालों ने कर दी हदें पार बताउँगा आपको। दोस्तो नैनीताल से सामने आई यह खबर पुलिस महकमे की छवि पर बड़ा सवाल खड़ा कर रही है। आरोप है कि ड्यूटी पर तैनात दो कांस्टेबलों ने एक युवती के साथ अभद्र व्यवहार और छेड़छाड़ की। मामला सामने आते ही स्थानीय लोगों का गुस्सा फूट पड़ा और पुलिस प्रशासन को तत्काल कार्रवाई करनी पड़ी। दोस्तो सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि जिन पुलिसकर्मियों पर आरोप लगे, वे कानून-व्यवस्था बनाए रखने की जिम्मेदारी निभा रहे थे। लेकिन अब उन्हीं पर कानून तोड़ने और महिला की गरिमा से खिलवाड़ करने के आरोप लग रहे हैं। मामले की गंभीरता को देखते हुए दोनों सिपाहियों को निलंबित कर दिया गया है और जांच शुरू कर दी गई है। उत्तराखंड के विश्व प्रसिद्ध कैंची धाम के वार्षिक स्थापना दिवस से पहले नैनीताल जिले में भारी बवाल देखने को मिला।
दरअसल बवाल की वजह कोई और नहीं बल्कि दो पुलिस कांस्टेबल रहे ,जिन पर मेले की ड्यूटी पर तैनात रहने के दौरान एक लड़की के साथ छेड़छाड़ करने का आरोप लगा। मामले की पूरी जांच पड़ताल के बाद दोनों कांस्टेबलों पर गाज गिरी है। लोगों का कहना है कि जब रक्षक ही भक्षक बन बैठे हैं तो अन्य लोगों से क्या ही उम्मीदें रखी जा सकती हैं। दरअसल दोस्तो नैनीताल जिले में एक होम स्टे मालिक की बेटी के साथ कथित तौर पर छेड़छाड़ करने का आरोप दो पुलिस कांस्टेबल पर लगा था। इस घटना की जानकारी जैसे ही अन्य लोगों को मिली तो उन्होंने दोनों पुलिसकर्मियों को पकड़कर खूब धूना। इतना ही नहीं बल्कि दोनों पुलिसकर्मियों को लोग पुलिस चौकी लेकर पहुँचे। इस दौरान भारी संख्या में भीड़ इकट्ठा हो गई और उन्होंने प्रदर्शन शुरू किया। स्थानीय लोगों और व्यापारियों ने आरोपी अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्यवाही की मांग की। पीड़िता के पिता की तहरीर के आधार पर पुलिस ने सहायक उप निरीक्षक जितेंद्र प्रसाद और मुख्य आरक्षी जितेंद्र कुमार के खिलाफ मामला दर्ज किया।
दोनों आरोपी अधिकारी उधम सिंह नगर में तैनात है जिन पर छेड़छाड़ का आरोप लगा है, लेकिन दोस्तो वहीं पुलिस और प्रशासन की हालिया कई कार्रवाई को लेकर सवाल उठ रहे हैं। दोस्तो इस खबर थोड़ा और गौर कीजिएगा, लड़की के पिता का कहना था, कि जब उनकी बेटी अपनी बहन के साथ मंदिर से वापस लौट रही थी तभी इस दौरान दोनों पुलिस वाले पास के होम स्टे में रुके थे जो नशे में धुत थे। इतना ही नहीं बल्कि उन्होंने लड़की के साथ छेड़छाड़ की। इतना ही नहीं दोस्तो लोगों के विरोध के बाद भवाली कोतवाल ने दोनों पुलिस कर्मियों को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पहुँचाया, जहां पर दोनों के शराब के नशे में होने की पुष्टि हुई। इधर SSP डॉक्टर मंजूनाथ टीसी ने मामले की गंभीरता को देखते हुए दोनों पुलिस कर्मियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने के आदेश दिए। इतना ही नहीं बल्कि मामले के संज्ञान में आते ही उधम सिंह नगर जिले के SSP अजय गणपति ने दोनों पुलिस कर्मियों को पद से निलंबित कर दिया है।
लेकिन दोस्तो सवाल यह है कि क्या सिर्फ निलंबन ही काफी है? क्या खाकी की साख को नुकसान पहुंचाने वालों पर और सख्त कार्रवाई होगी? और क्या इससे यह संदेश जाएगा कि कानून के रखवालों के लिए भी कानून एक समान है?तो दोस्तों, कैंची धाम जैसे आस्था के केंद्र में सामने आई इस घटना ने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जिस पुलिस पर श्रद्धालुओं और महिलाओं की सुरक्षा की जिम्मेदारी थी, अगर उसी पर ऐसे आरोप लग जाएं तो लोगों का भरोसा कैसे कायम रहेगा?मेडिकल जांच में दोनों पुलिसकर्मियों के नशे में होने की पुष्टि हुई, एफआईआर भी दर्ज हो गई और निलंबन की कार्रवाई भी हो गई। लेकिन क्या सिर्फ इतना ही काफी है? क्या खाकी की गरिमा को दागदार करने वालों के खिलाफ उदाहरण पेश करने वाली कार्रवाई होगी? और क्या भविष्य में ऐसी घटनाएं रोकने के लिए पुलिस विभाग कोई बड़ा कदम उठाएगा फिलहाल जांच जारी है और कानून अपना काम कर रहा है। लेकिन इस घटना ने एक बार फिर यह साफ कर दिया है कि वर्दी सम्मान जरूर देती है, लेकिन उससे बड़ी जिम्मेदारी भी मांगती है। अब देखना होगा कि इस मामले में आगे क्या कार्रवाई होती है और क्या पीड़ित परिवार को पूरा न्याय मिल पाता है। फिलहाल इस खबर में इतना ही। आप इस पूरे मामले पर क्या सोचते हैं, हमें कमेंट करके जरूर बताइए।