दोस्तो उत्तराखंड में कई क्षेत्रों में भारी तनाव दिखाई दे रहा है, विकासनगर के बैरागीवाला ने बीते कुछ दिनों में बहुत कुछ देखा है जहां जनआक्रोश शांत होता नहीं दिखाई दे रहा है। वहीं बीजेपी के नेता विनोद कश्यप की जान लेने वाले सीधे लोगों के निशाने पर हैं, लेकिन अब जो खबर है वो कि गलियां सूनी हो चली है और घरों पर ताले लटकने लगे हैं। कैसे दोस्तो रातों-रात घर छोड़कर चले गए परिवार इलाके का सन्नाटा क्या कहता है बताउंगा आपको पूरी खबर। दोस्तो विकासनगर के सहसपुर के बैरागीवाला में बीजेपी नेता विनोद कश्यप की हत्या के बाद पूरे इलाके में सांप्रदायिक तनाव है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक बैरागीवाला में 25 से ज्यादा मुस्लिम परिवारों ने रातों रात अपना घर छोड़ अपने रिश्तेदारों के घर चले गए हैं। हत्या और हत्या के बाद हुए हंगामे, आगजनी और तोड़फोड़ की घटना के बाद से हालात ये हैं कि अब इस इलाके कि गलियों में बस सन्नाटा पसरा हुआ है। दोस्तो विकासनगर के बैरागीवाला में बीजेपी नेता विनोद कश्यप हत्या के बाद पूरे इलाके में ऐसा बवाल हुआ जिसने बैरागीवाला की पूरी तस्वीर ही बदलकर रख दी। खेत में पानी लगाने को लेकर हुई विनोद कुमार की हत्या के बाद बैरागीवाला में सांप्रदायिक ताना बाना झुलस गया। आरोपियों के घरों में आगजनी हुई। प्रशासन की ओर से आरोपियों के घर पर बुलडोजर चलाया गया। पुरानी रंजिश ने विनोद कश्यप की जान ले ली और इसी मौत से उपजी नफरत ने पूरे इलाके का सुख चैन छीन लिया।
दोस्तो खबर ये है कि विनोद की हत्या के मुख्य आरोपी मासूम अली के परिवार के कई लोगों ने बैरागीवाला की सरकारी जमीनों पर कब्जा किया था। जिसकी शिकायत विनोद कश्यप ने पुलिस से लेकर स्थानीय प्रशासन से भी की थी। विवाद के एक वजह ये भी थी। जिस वजह से विनोद कश्यप की हत्या कर दी गई। बीजेपी नेता विनोद कश्यप की हत्या के बाद लोगों के अंदर इतना गुस्सा भर गया कि बजरंग दल, विश्व हिंदू परिषद जैसे कई संगठनों के साथ ही स्थानीय लोग भी सड़कों पर उतर आए। दोस्तो प्रदर्शनकारियों की मांग थी कि आरोपियों के घरों पर कार्रवाई होनी चाहिए। जब प्रशासन ने हिंदूवादी नेताओं की बात अनसुनी की तो नाराज हिंदूवादी संगठनों के कार्यकर्ताओ ने खुद ही दो आरोपियों के घरों में आग लगा दी। जिसके बाद पूरे इलाके में दहशत फैल गई और सांप्रदायिक तनाव ऐसा फैला कि मुस्लिम परिवार रात के अंधेरे में ही अपने घरों पर ताले लगाकर अपने रिश्तेदारों के घर चले गए। डर का आलम ये था कि कुछ परिवार तो जल्दबाज़ी में घर का दरवाजा तक खुला छोड़ गए।
इधर दोस्तो विधायक मुन्ना सिंह चौहान ने मामला शांत कराने के लिए बयान दिया कि जो भी कार्रवाई हो कानून के दायरे में हो और कानून सख्त से सख्त एक्शन ले। लेकिन कानून के दायरे से बाहर कुछ भी नहीं किया जाए। उनके इस बयान के बाद वो भी इन हिंदूवादी संगठनों के निशाने पर आ गए। दोस्तो इलाके में तनाव अभी साफ दिखाई दे रहा है पुलिस कहती है कि एसपी सिटी प्रमोद कुमार ने बताया है कि बैरागीवाला में कई घंटो तक आगजनी और तोड़फोड़ के साथ-साथ देहरादून यमुनोत्री मार्ग को बाधित करने वाले 150 अज्ञात लोगों के खिलाफ बलवा, सरकारी कार्य में बाधा, लोक सेवकों पर हमला, आगजनी, संपत्ति को नुकसान पहुंचाने और अन्य गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज किया है। साथ ही वीडियो को खंगालने के बाद उपद्रवियों को चिन्हित कर गिरफ़्तारी के प्रयास शुरू कर दिए हैं..तो दोस्तों, बैरागीवाला की ये कहानी सिर्फ एक हत्या की कहानी नहीं है। यह उस डर, गुस्से और तनाव की कहानी भी है जिसने पूरे इलाके की तस्वीर बदलकर रख दी है। एक तरफ बीजेपी नेता विनोद कश्यप की हत्या को लेकर लोगों में भारी आक्रोश है, तो दूसरी तरफ आगजनी, तोड़फोड़ और तनाव के बाद कई परिवारों के घर छोड़ने की खबरें भी सामने आ रही हैं। सवाल यह है कि आखिर किसी एक आपराधिक घटना की सजा पूरे इलाके को क्यों भुगतनी पड़ रही है?क्या कानून अपना काम करेगा या फिर भीड़ ही न्याय तय करेगी? क्या बैरागीवाला का सामाजिक सौहार्द फिर पहले जैसा लौट पाएगा? और सबसे बड़ा सवाल, क्या प्रशासन लोगों के मन में बैठ चुके डर को खत्म कर पाएगा?फिलहाल पुलिस उपद्रवियों की पहचान करने और आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई की बात कह रही है। लेकिन बैरागीवाला की सूनी गलियां, बंद दरवाजे और ताले लगे घर इस बात की गवाही दे रहे हैं कि हालात अभी पूरी तरह सामान्य नहीं हुए हैं। उम्मीद की जानी चाहिए कि दोषियों को कानून के मुताबिक सजा मिले, निर्दोष लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित हो और बैरागीवाला एक बार फिर अमन, भाईचारे और विश्वास के रास्ते पर लौट सके। फिलहाल इस मामले में आप क्या सोचते हैं? अपनी राय हमें कमेंट बॉक्स में जरूर बताइए।