दोस्तों, क्या उत्तराखंड की सियासत में एक और बड़ा तूफान आने वाला है? क्या आय से अधिक संपत्ति के मामले में कोर्ट का नोटिस एक मंत्री की राजनीतिक मुश्किलें बढ़ा सकता है? और क्या चुनाव से पहले आया यह घटनाक्रम सत्ता के गलियारों में नई हलचल पैदा करने वाला है? कैसे केंद्र में धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद उत्तराखंड के मंत्री पर बढ रहा इस्तीफे का दबाव बताउंगा आपको पूरी खबर। दोस्तो दरअसल, दोस्तो उत्तराखंड सरकार के कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी को आय से अधिक संपत्ति मामले में विजिलेंस कोर्ट ने नोटिस जारी किया है। अदालत ने उन्हें 3 सितंबर को अपना पक्ष रखने के लिए बुलाया है। इस नोटिस के बाद प्रदेश की राजनीति में चर्चाओं का दौर तेज हो गया है। हालांकि मामला अभी न्यायालय के विचाराधीन है और अदालत ने केवल मंत्री का पक्ष सुनने के लिए नोटिस जारी किया है, लेकिन इस पूरे मामले जहां बीजेपी वाले अभी से कुछ कहने बचते कतराते फिर रहे हैं तो वहीं कांग्रेस कह रही है कि अब आया ऊंठ पहाड़ के नीचे। आखिर क्यों बीजेपी वाले या कहूं पार्टी मंत्री गणेश जोशी को मिले विजिलेंस कोर्ट के नोटिस के बाद उनसे किनारा कर रही है। क्या बीजेपी को ये लगने लगा है कि जिस मामले को सालों से उछलने रोका गया, जिस मामले को लेकर कोर्ट सरकार के सयहोग की उम्मीद लगा रहा था कि मंत्री गणेश जोशी की आय से संपत्ति की जांच की अनुमति दी जाए। उस ममाले में कोर्ट सीधे दखल देने का मन बना चुका है। जी हां दोस्तो सुना आपने उत्तराखंड सरकार के कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी एक बार फिर आय से अधिक संपत्ति मामले को लेकर सुर्खियों में हैं।
देहरादून की विजिलेंस कोर्ट ने इस मामले में उन्हें नोटिस जारी किया है। कोर्ट ने गणेश जोशी को 3 सितंबर 2026 को अपना पक्ष रखने के लिए बुलाया है, कोर्ट के इस कदम ने चुनावी माहौल से पहले सियासी चर्चा तेज कर दी है। दोस्तो विधानसभा चुनाव से कुछ महीने पहले आए इस नोटिस ने प्रदेश की राजनीति में नई बहस छेड़ दी है। फिलहाल मामला कोर्ट में है, लेकिन इसके कानूनी और राजनीतिक दोनों मायने निकाले जा रहे हैं। दरअसल, 25 जुलाई को देहरादून स्थित विशेष न्यायाधीश (विजिलेंस) की अदालत में इस मामले की सुनवाई हुई। शिकायतकर्ता पंकज सिंह क्षेत्री की ओर से उनके वकील ने कोर्ट में अपना पक्ष रखा। सुनवाई के बाद अदालत ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) के प्रावधानों के तहत गणेश जोशी को नोटिस जारी करने का आदेश दिया। कोर्ट ने कहा कि किसी भी आदेश से पहले दूसरे पक्ष को अपनी बात रखने का पूरा मौका दिया जाना जरूरी है। इसी के तहत तीन सितंबर की तारीख तय की गई है। अब दोस्तो ये मामला तूल पकड़ रहा है, गणेश जोशी की आय से अधिक संपत्ति की जांच का मामला सरकार और बीजेपी की टेंशन को बढा रहा है क्योकि इस मामले में बीजेपी का रहा ये रिएक्शन बहुत कुछ कहता है। अब दोस्तो बीजेपी इस पूरे मामले पर संयमित प्रतिक्रिया दी है। पार्टी के प्रदेश संविधान के तहत हर व्यक्ति जांच के दायरे में आता है और इस मामले में मंत्री खुद अपनी बात रखेंगे, लेकिन कांग्रेस ने तो सरकार के साथ पार्टी को भी लपेटना शुरू कर दिया- कैसे कांग्रेस वाले ये कहने लगे हैं कि अब आया ऊंठ पहाड़ के नीचे देखिए।
दोस्तो कांग्रेस ये कहती भी दिखाई दे रही है कि विजलेंस वाले सरकार से संपत्ति की जांच के आदेश देने के लिए कहते रहे और इधर गणेश जोशी के मामले को हल्का बता कर किनारे कर दिया गया। दोस्तो यहां आपको ये भी बता दूं कि बता दें कि यह मामला कोई नया नहीं है। पिछले कुछ वर्षों से गणेश जोशी के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति के आरोपों को लेकर कानूनी लड़ाई चल रही है। शिकायतकर्ता का दावा है कि मंत्री गणेश जोशी की घोषित आय और उनके पास मौजूद संपत्तियों के बीच बड़ा अंतर है और इसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। इसी शिकायत के आधार पर मामला विजिलेंस और अदालत तक पहुंचा था, लेकिन इधर कांग्रेस और अन्य विपक्षी दल पहले भी सरकार को भ्रष्टाचार और जवाबदेही के मुद्दे पर घेरते रहे हैं। ऐसे में इस मामले को भी चुनावी मंचों पर उठाया जाना तय माना जा रहा है। दूसरी ओर भाजपा की रणनीति भी लगभग साफ है। पार्टी लगातार यह कहती रही है कि जब तक अदालत का अंतिम फैसला नहीं आ जाता, तब तक किसी भी व्यक्ति को दोषी नहीं माना जा सकता।