16 हजार फीट पर स्वदेशी GLOF अलर्ट सिस्टम!₹8 करोड़ का काम सिर्फ ₹61 लाख में तैयार! | Uttarakhand News

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भारत ने आपदा प्रबंधन और विज्ञान के क्षेत्र में एक अभूतपूर्व उपलब्धि हासिल करते हुए उत्तराखंड के चमोली जिले में स्थित वसुंधरा ताल पर करीब 16,000 फीट की ऊंचाई पर देश का पहला स्वदेशी ग्लेशियल लेक आउटबर्स्ट फ्लड (GLOF) अर्ली वार्निंग सिस्टम सफलतापूर्वक स्थापित कर दिया है। इस बेहद आधुनिक और जीवनरक्षक सिस्टम को CSIR-CBRI (केंद्रीय भवन अनुसंधान संस्थान), रुड़की के वैज्ञानिकों ने तैयार किया है। इस परियोजना की सबसे बड़ी खूबी इसका बेहद किफायती होना है; जहां विदेशी व निजी कंपनियों ने इस काम के लिए करीब ₹8 करोड़ का भारी-भरकम बजट अनुमानित किया था, वहीं भारतीय वैज्ञानिकों ने अपनी स्वदेशी तकनीक के दम पर इसे महज ₹61 लाख की लागत में तैयार कर आत्मनिर्भर भारत की ताकत का लोहा मनवाया है।

यह हाई-टेक सिस्टम करीब 38.5 मीटर गहरी झील के जलस्तर, बर्फीले तूफानों (एवलांच) और भूस्खलन जैसी गतिविधियों पर चौबीसों घंटे पैनी नजर रखेगा। इसमें लगाए गए 8 आधुनिक सेंसर हर दो घंटे में सैटेलाइट के जरिए सीधे सरकारी और वैज्ञानिक डैशबोर्ड पर सटीक डेटा भेजेंगे। यदि झील का जलस्तर अचानक बढ़ता है या कोई प्राकृतिक आपदा आती है, तो यह प्रणाली निचले इलाकों में रहने वाले समुदायों को करीब 2 घंटे पहले ही ऑटोमैटिक अलर्ट जारी कर देगी। CBRI रुड़की के 15 वैज्ञानिकों की टीम ने आईटीबीपी (ITBP) के सहयोग से 16 किलोमीटर की बेहद दुर्गम और बर्फीली चढ़ाई पार करके इस मिशन को अंजाम दिया है। पायलट फेज की सफलता के बाद हिमालयी क्षेत्र की अन्य संवेदनशील झीलों पर भी ऐसे ही किफायती और स्वदेशी सिस्टम लगाए जाएंगे, जो भविष्य में केदारनाथ या चमोली जैसी आपदाओं से सैकड़ों मासूम जिंदगियां बचाने में मील का पत्थर साबित होंगे।