Chamoli में हाहाकार! | Narayanbagar | Tharali | Heavyrain | Landslide | Uttarakhand News

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दोस्तो, पहाड़ों पर बरस रहा पानी और बढ़ रही लोगों की परेशानी! बारिश नहीं, आफत बरस रही है। मलबे की मार हर रास्ते पर पड़ रही है। डराने और सहमा देने वाला मंदर आप ने देखा क्या मै दिखाउंगा आपको हर एक वो तस्वीर जिसने को खौफ से भर दिया है। दोस्तो बात उत्तराखंड के पहाड़ी जिले चमोली कर रहा हूं यहां मूसलाधार बारिश ने ऐसा कहर बरपाया कि रातों-रात बाजार मलबे में बदल गया, हाईवे थम गया, सड़कें जाम हो गईं और गांवों में डर फिर से लौट आया। दोस्तो जैसा की आप सब जानते हैं उत्तराखंड में जब भी बारिश बरसती है, तो हाल कैसे बेहाल होता है। ऐसा ही कुछ इस बार भी देखने को मिल रहा है जहां उत्तराखंड में मानसून लगातार अपना रौद्र रूप दिखा रहा है। सबसे ज्यादा असर चमोली जिले में देखने को मिल रहा है, जहां लगातार हो रही मूसलाधार बारिश ने जनजीवन अस्त-व्यस्त कर दिया है। कई सड़कें प्रभावित हुईं, बाजारों में मलबा घुस आया और लोगों की मुश्किलें एक बार फिर बढ़ गई है। दोस्तो चमोली में हुई तेज बारिश के बाद नारायणबगड़ बाजार में अचानक भारी मात्रा में मलबा और बरसाती पानी घुस आया। देखते ही देखते सड़कें कीचड़ और पत्थरों से भर गईं। मलबे की वजह से सिमली-ग्वालदम राष्ट्रीय राजमार्ग भी बाधित हो गया, जिससे वाहनों की लंबी कतारें लग गईं। यहां तक की बारिश का पानी कई दुकानों में घुस गया, जिससे व्यापारियों को आर्थिक नुकसान झेलना पड़ा। कई दुकानदार पूरी रात पानी और मलबा निकालने में जुटे रहे। इधर दोस्तो थराली-देवाल मोटर मार्ग भी घाघली गधेरे के पास भारी मलबा आने से बंद हो गया। हालांकि लोक निर्माण विभाग की टीम ने तुरंत मौके पर पहुंचकर जेसीबी की मदद से मलबा हटाया और कुछ समय बाद यातायात फिर से शुरू करा दिया, लेकिन हर बार की तरह इस बार भी सवाल वही है। आखिर कब तक हर बारिश के बाद सड़कें बंद होती रहेंगी? सबसे ज्यादा चिंता राड़ीबगड़ गांव के लोगों को सता रही है।

ग्रामीणों का कहना है कि घाघली गधेरे में हर बरसात के दौरान भारी मात्रा में मलबा आता है। इससे उनके मकानों पर लगातार खतरा बना रहता है। दोस्तो पहाड़ी ग्रामीण बताते हैं कि मानसून शुरू होते ही उनका डर भी शुरू हो जाता है। हर तेज बारिश की रात बेचैनी में गुजरती है, क्योंकि उन्हें डर रहता है कि कहीं मलबा उनके घरों तक न पहुंच जाए। दोस्तो फिलहाल प्रशासन हालात पर नजर बनाए हुए है और प्रभावित मार्गों को खोलने का काम जारी है। लेकिन स्थानीय लोगों की मांग है कि हर साल राहत कार्य करने के बजाय अब स्थायी समाधान निकाला जाए, ताकि हर मानसून में जान और माल पर मंडराने वाला खतरा हमेशा के लिए खत्म हो सके। क्योंकि सवाल सिर्फ सड़क खुलने का नहीं, बल्कि उन लोगों की सुरक्षा का है जो हर बारिश में डर के साये में जीने को मजबूर हैं। दोस्तो चमोली में बारिश अभी थमी नहीं है और मौसम विभाग ने आने वाले घंटों के लिए भी सतर्क रहने की सलाह दी है। ऐसे में प्रशासन और स्थानीय लोगों की नजर अब आसमान पर टिकी है, क्योंकि पहाड़ों में अगली बारिश कहीं नई मुसीबत लेकर न आ जाए।