कैंची धाम में जाम ने अब गुस्से की आग भड़का दी है!टैक्सी चालकों का आरोप—सड़क पर घंटों जाम, ऊपर से सरकारी नोटिस और भुगतान का संकट!ढाई घंटे का सफर 8 घंटे में बदल गया तो चालकों का सब्र भी जवाब दे गया!अब चेतावनी साफ है—मांगें नहीं मानी गईं तो हाईकोर्ट से लेकर चुनावी मैदान तक सरकार को घेरेंगे! क्या सरकारें सिर्फ चुनाव से पहले बड़े-बड़े शिलान्यास के पत्थर लगाने के लिए होती हैं? क्या विकास की बड़ी-बड़ी बातें सिर्फ कागजों और विज्ञापनों तक सीमित हैं? जी हां, आज हम आपको बाबा नीब करोरी के विश्व प्रसिद्ध कैंची धाम की वो कड़वी हकीकत दिखाने जा रहे हैं, जिसे देखकर आपका खून खौल उठेगा! जहाँ देश-विदेश से श्रद्धालु बाबा के दर्शन के लिए आ रहे हैं, वहीं स्थानीय प्रशासन के निकम्मेपन की वजह से यह पूरा इलाका भीषण जाम के नरक में तब्दील हो चुका है! दोस्तो यहां इस अव्यवस्था की सबसे बड़ी मार झेल रहे हैं हमारे स्थानीय टैक्सी चालक। गाड़ियों की किस्तें टूट रही हैं, धंधा चौपट हो चुका है और ऊपर से बेरहम सरकार टैक्स रिकवरी के नोटिस भेज रही है! आज टैक्सी यूनियन के अध्यक्ष शंकर ठाकुर का दर्द और गुस्सा सरेआम फूट पड़ा है। उन्होंने दो-टूक कह दिया है कि अगर आचार संहिता लगने से पहले चालकों का पूरा भुगतान नहीं हुआ, तो वो गाड़ियों को चुनाव ड्यूटी में नहीं भेजेंगे और सीधे माननीय उच्च न्यायालय की शरण में जाएंगे! सरकार कान खोलकर सुन ले—टैक्सी चालकों का यह परिवार अब चुप नहीं बैठेगा! दोस्तो बाबा नीब करोरी का कैंची धाम, जहाँ लोग मानसिक शांति के लिए आते हैं, लेकिन भवाली-अल्मोड़ा हाईवे पर पहुंचते ही उनका सामना मानसिक प्रताड़ना से होता है! बदहाल ट्रैफिक व्यवस्था और प्रशासन के फेलियर की वजह से पूरा नैनीताल जनपद और कैंची धाम जाम के झाम से कराह रहा है। जो सफर पहले महज ढाई घंटे में पूरा हो जाता था, आज उसी सफर में टैक्सी चालकों और यात्रियों के 8 से 9 घंटे बर्बाद हो रहे हैं। गाड़ियों का तेल पानी की तरह बह रहा है, क्लच और ब्रेक शू घिस रहे हैं, और पहाड़ों की लाइफलाइन कहे जाने वाले इस रूट पर गाड़ियाँ रेंगने को मजबूर हैं! दोस्तो इस तबाही और सरकारी अनदेखी के खिलाफ अब टैक्सी चालकों का सब्र का बांध पूरी तरह टूट चुका है। टैक्सी यूनियन के अध्यक्ष शंकर ठाकुर ने सरकार की नीतियों को आड़े हाथों लेते हुए सीधा हमला बोला है।
दोस्तो दर्द सिर्फ जाम का नहीं है, दर्द पेट पर लात पड़ने का भी है। एक तरफ चालकों की कमाई आधी हो गई है, तो दूसरी तरफ सरकार की तानाशाही देखिए! आज की डेट में सरकार गरीब टैक्सी चालकों को टैक्स रिकवरी के नोटिस भेज रही है। कई चालक जो इस दुनिया को छोड़ चुके हैं, उनके पीछे उनके बेसहारा घरवालों को प्रताड़ित किया जा रहा है। इसी आक्रोश के बीच शंकर ठाकुर ने आने वाले उत्तराखंड विधानसभा चुनाव को लेकर सरकार को खुली चेतावनी दे दी है। दोस्तो टैक्सी व्यवसायियों का गुस्सा इस बात पर भी है कि सरकार उनके पेट पर लात मारकर प्राइवेट वाहनों को बढ़ावा देने की सोच रही है। केंद्रीय परिवहन मंत्री के उस बयान पर भी रोष है जिसमें कहा गया कि राज्य सरकारें चाहें तो प्राइवेट वाहनों को भी टैक्सी के रूप में चलाने की अनुमति दे सकती हैं। दोस्तो सियासी मंचों से देवभूमि में पर्यटन और विकास की बड़ी-बड़ी डींगें हांकना बहुत आसान है, लेकिन जमीन पर उतरकर देखिए कि बाबा के धाम में रोजी-रोटी कमाने वाले ये टैक्सी चालक किस कदर खून के आंसू रो रहे हैं। किस्तें चुकाने के लिए कर्जदार हो चुके इन चालकों को जब सरकार टैक्स का नोटिस थमाती है, तो लोकतंत्र शर्मसार हो जाता है। टैक्सी यूनियन वाले साफ कर दिया है कि आचार संहिता से पहले अगर इनका पूरा भुगतान नहीं हुआ और जाम से मुक्ति नहीं मिली, तो चुनाव में नेताओं को गाड़ियाँ मिलना तो दूर, वोट मांगना भी भारी पड़ जाएगा। अब देखना यह है कि सोई हुई सरकार और कुंभकर्णी नींद में सोया प्रशासन कब जागता है! इस पूरी अव्यवस्था पर और चालकों के इस बड़े कदम पर आपकी क्या राय है? कमेंट बॉक्स में अपनी बात जरूर रखें।