Ketan Murdercase न्याय या राजनीति? | Chandra Shekhar Azad | Umesh Kumar | Uttarakhand News

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जी हां दोस्तो केतन लाल के घर जा रहे थे सांसद चंद्रशेखर और विधायक उमेश कुमार, लेकिन रास्ते में पुलिस ने रोक दिया। इसके बाद जो हुआ, उसने पूरे इलाके में सियासी गर्मी बढ़ा दिया। सवाल उठा कि ये मामला न्याय की लड़ाई है या फिर सियासत का नया मोड़? आखिर सियासी लोगों को केतन के लाल के परिवार से मिलने से क्यों रोका गया बताउंगा आपको पूरी खबर। दोस्तो ये टिहरी के 18 साल के केतन लाल की की कहानी का दूसरा अध्याय है, जिसमें सियासी संघर्ष तमाम है। अब ये न्याय के लिए है या राजनीति के लिए तो बता नहीं, लेकिन यहां कुछ सवाल हैं जिनका जवाब अभी तक मिला नहीं है। दोस्तो ये वो तस्वीर हैं, जहां उत्तराखंड के नेता खास कर दलित नेता केतन लाल केस में दूरी बनाते दिखाई दे रहे हैं या कहूं उस तरह से आक्रोश या न्याय का आवाज नहीं उठा रहे हैं। जैसा जोर वो वोट के लिए लगाते हैं, मांगने के लिए लेकिन ये जो तस्वीर आप देख रहे हैं ये नगीना सांसद की है चंद्रशेखर की और साथ में थे हरिद्वार के खानपुर विधायक उमेश कुमार लेकिन जो चाहते थे वो हुआ  नहीं हा आश्वासन जरुर मिला। टिहरी जिले में हुए केतन लाल ह’त्याकांड मामले में आजाद समाज पार्टी के चीफ और नगीना से सांसद चंद्रशेखर आजाद पीड़ित परिवार से मिलने जा रहे थे। उनके साथ खानपुर के विधायक उमेश कुमार और भीम आर्मी के सैकड़ों कार्यकर्ता भी मौजूद थे, लेकिन पुलिस ने उन्हें हरिद्वार के शंकराचार्य चौक ही रोक दिया। इस दौरान प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए पुलिस को हल्के बल का प्रयोग भी किया, जिसके बाद प्रदर्शनकारी हाईवे पर ही धरने पर बैठ गए। आरोप है कि पुलिस की तरफ से किए गए बल प्रयोग में नगीना के सांसद चंद्रशेखर आजाद के कपड़े फट गए और कई कार्यकर्ताओं को लाठियां भी लगीं। इस घटना के विरोध में सांसद चंद्रशेखर आजाद और विधायक उमेश कुमार अपने सैकड़ों कार्यकर्ताओं के साथ वहीं बीच सड़क पर बैठ गए, जिससे हाईवे पर लंबा जाम लग गया।

हाईवे पर धरने पर बैठे चंद्रशेखर आजाद ने घोषणा की है कि जब तक जिले के डीएम और एसएसपी खुद मौके पर आकर यह नहीं बताते कि केतन के हत्यारों और लापरवाह पुलिसकर्मियों के खिलाफ क्या कार्रवाई की गई है, तब तक वे सड़क से नहीं हटेंगे. उन्होंने चेतावनी दी कि यदि प्रशासन का कोई जिम्मेदार अधिकारी बात करने नहीं आता है, तो वे जबरन आगे के लिए कूच करेंगे. सांसद ने सरकार से इस पूरे हत्याकांड में सख्त से सख्त कार्रवाई की मांग की है। दोस्तो चंद्रशेखर ने सवाल उठाया कि क्या देवभूमि में न्याय की आवाज उठाना अब अपराध हो गया है। उन्होंने सरकार से अपराधियों को रोकने में अपनी ताकत लगाने को कहा, वहीं दोस्तो दूसरी ओर खानपुर विधायक उमेश कुमार ने दो टूक शब्दों में कहा कि जब तक उच्च अधिकारी मौके पर आकर कार्रवाई की ठोस जानकारी नहीं देते, वे मार्ग से नहीं हटेंगे। उन्होंने प्रशासन को चुनौती देते हुए कहा कि अगर अधिकारी नहीं आते हैं तो वे आगे की ओर कूच करेंगे इस पूरे हंगामे और हाईवे जाम होने के कारण वाहनों की लंबी कतारें लग गई हैं और मौके पर तनावपूर्ण स्थिति बनी हुई है, हालांकि बाद में ये खबर आई कि 30 तारीख को मिलने दिया जाएगा, लेकिन केतन लाल केस में अब सियासत गर्माती दिखाई दे रही है और दोस्तो यहां आपको ये भी बता दूं कि ये सियासी जंग क्यों हो रही है। दरअसल, दोस्तो  टिहरी जिले में 18 वर्षीय दलित युवक केतन लाल की पड़ोसी गांव खोलगढ़ की एक सामान्य वर्ग की युवती से दोस्ती थी और दोनों अक्सर फोन पर बात करते थे. जब युवती के परिजनों को इसकी जानकारी मिली तो उन्होंने दोनों के रिश्ते का विरोध किया। 7 जून 2026 की रात परिवार के दबाव में युवती ने केतन को गांव बुलाया, जिसके बाद रात करीब 11:30 बजे केतन अपने दोस्त दिवाकर डिमरी के साथ मोटरसाइकिल से खोलगढ़ पहुंचा. वहां पहले से घात लगाए बैठे युवती के परिजनों ने दोनों पर लाठी-डंडों से हमला कर दिया और उन्हें एक कमरे में बंद कर दिया। आरोप है कि केतन को उसकी प्रेमिका के सामने ही बेरहमी से पीटा गया। सुबह आरोपियों ने केतन के पिता को बेटे को ले जाने के लिए बुलाया, लेकिन गंभीर रूप से घायल केतन ने अस्पताल ले जाते समय रास्ते में ही दम तोड़ दिया, जबकि उसका दोस्त दिवाकर भी घायल हो गया था। वहीं दोस्तो इस मामले में हैरानी की बात ये है कि अब तक मुख्य आरोपी पुलिस की गिरफ्त से बाहर बताया जा रहा है। अब दोस्तो केतन केस में उठती इन सियासी आवाजों को आप कैसे देखते हैं क्या न्याय की लड़ाई है या फिर राजनीति।