किच्छा के दंगल में अब सियासत के दो-दो हाथ! एक तरफ हार की बौखलाहट का दावा,तो दूसरी तरफ स्ट्रॉन्ग रूम में एंट्री पर तीखा तंज!आरोप-प्रत्यारोप के इस खेल में सियासत के नए-नए पैंतरे सामने आ रहे हैं।सवाल ये है—इन पैंतरों से किसको कितना फायदा?और किच्छा का ये सियासी क्लेश आखिर किस करवट बैठेगा?देखिए पूरा नया सियासी क्लेश! किच्छा नगर पालिका चुनाव का ‘पॉलिटिकल ड्रामा’ अब अगले सीजन में एंटर कर चुका है! पहले हाथापाई, फिर आधी रात को मतपेटियां बदलने का सस्पेंस, और अब एंट्री हुई है स्टेट लेवल के हैवीवेट्स की! कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल सीधे बाजपुर पहुंचे और उन्होंने बीजेपी पर ऐसा पंच मारा कि ‘बीजेपी चुनाव हार चुकी है, और इसी बौखलाहट में विधायक तिलकराज बेहड़ से हाथापाई की गई। लेकिन रुकिए ट्विस्ट अभी बाकी है! बीजेपी के फायरब्रांड प्रवक्ता और विधायक विनोद चमोली ने कांग्रेस के इस विक्टिम कार्ड को सार्केज्म के साथ हवा में उड़ा दिया। चमोली जी का कहना है— ‘भाईसाहब, जब स्ट्रॉन्गरूम ‘नो-एंट्री ज़ोन’ है। दोस्तो किच्छा के लोकल चुनाव की आंच अब पूरे उत्तराखंड की सियासत को झुलसाने लगी है। बाजपुर पहुंचे कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने सीधे-सीधे बीजेपी की नियत पर सवाल दाग दिए हैं। गोदियाल का साफ कहना है कि बीजेपी किच्छा का चुनाव बुरी तरह हार चुकी है। और जब हार सामने दिखने लगती है, तो सत्ताधारी दल बौखला जाता है। उसी बौखलाहट का नतीजा है कि कांग्रेस विधायक तिलकराज बेहड़ के साथ अभद्रता और हाथापाई की गई। गोदियाल ने दो टूक चेतावनी दे दी है कि जनप्रतिनिधि का अपमान बर्दाश्त नहीं होगा, लेकिन कांग्रेस के इस आक्रामक हमले पर बीजेपी ने जो काउंटर-अटैक किया है, वो देखने लायक है! बीजेपी विधायक और प्रवक्ता विनोद चमोली ने इस पूरे ड्रामे की हवा निकालते हुए सीधे ‘रूल्स’ का हवाला दे दिया। चमोली जी का तंजिया अंदाज देखिए, वो कहते हैं— ‘माना आप माननीय हैं, पूर्व मंत्री हैं, लेकिन स्ट्रॉन्गरूम में घुसने का अधिकार आपको किसने दिया?’ जब वो प्रतिबंधित क्षेत्र है, सुरक्षा के घेरे में है, तो आखिर वहाँ जाने की नौबत ही क्यों आई? चमोली ने कांग्रेस विधायक को सीधे-सीधे संयम बरतने और व्यवस्थाएं न भंग करने की नसीहत दे डाली है।
दोस्तो अब ज़रा इस सिचुएशन के मजे लीजिए। एक तरफ कांग्रेस कह रही है कि हमारे विधायक के साथ बदतमीजी हुई, लोकतंत्र खतरे में है। दूसरी तरफ बीजेपी कह रही है कि जब नो-एंट्री का बोर्ड लगा है, तो वहाँ रील बनाने या बवाल काटने गए ही क्यों थे? आज की जेनजी पीढ़ी जो लॉजिक और फैक्ट्स पर चलती है, वो यहाँ सोचेगी— ‘दोनों अपनी जगह गेम खेल रहे हैं!’ कांग्रेस विक्टिम कार्ड खेल रही है ताकि सहानुभूति मिले, और बीजेपी प्रोटोकॉल का कार्ड खेलकर कांग्रेस को ही कटघरे में खड़ा कर रही है। इसे कहते हैं ‘पॉलिटिकल मास्टरस्ट्रोक’ के बदले ‘काउंटर-स्ट्रोक’! दोस्तो जनता के नजरिए से देखें तो यह पूरा मामला इस बात का क्लासिक उदाहरण है कि राजनीति में नियमों को अपनी सहूलियत के हिसाब से कैसे तोड़ा-मरोड़ा जाता है। अगर स्ट्रॉन्गरूम प्रतिबंधित क्षेत्र है, तो किसी भी नेता को कानून हाथ में लेने का हक नहीं होना चाहिए। लेकिन जब साख दांव पर लगी हो, तो फिर प्रोटोकॉल खिड़की से बाहर कूद जाता है! युवाओं के लिए यह तमाशा मनोरंजन से ज्यादा यह सोचने पर मजबूर करता है कि क्या हमारे लीडर्स सचमुच नियमों का सम्मान करते हैं या सिर्फ कैमरे के सामने ज्ञान बांटते हैं? इस पूरे मामले गोदियाल के इस बयान के बाद कांग्रेस कार्यकर्ताओं में नया जोश है, वहीं बीजेपी भी आक्रामक मोड में आ गई है। स्थानीय प्रशासन ने स्ट्रॉन्गरूम के चारों तरफ सुरक्षा और कड़ी कर दी है ताकि कोई भी ‘माननीय’ नियमों को ओवरटेक न कर सके, तो भाईयो और बहनो बड़े बुजुर्गो, किच्छा का ये मुकाबला अब लोकल से ग्लोबल सॉरी, स्टेट लेवल का हो चुका है। गोदियाल का गुस्सा बनाम बीजेपी का पलटवार, ये लड़ाई अब लंबी खिंचने वाली है लेकिन असल सवाल वही है: क्या चुनाव जीतने के लिए नियमों की बलि चढ़ाना सही है? आपको क्या लगता है, बीजेपी का तंज सही है या गोदियाल का गुस्सा जायज? कमेंट बॉक्स में अपनी राय जरूर