उत्तराखंड में Teacher Transfer पर बवाल! | Chamoli | Kalgot | CM Dhami | Uttarakhand News

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दोस्तो, चमोली के कलगोठ में रिटायरमेंट से ठीक पहले एक शिक्षक के तबादले ने ऐसा बवाल खड़ा कर दिया कि स्कूल में तालाबंदी तक की नौबत आ गई!26 साल तक इसी स्कूल में बच्चों का भविष्य संवारने वाले गुरुजी को हटाने पर ग्रामीणों का गुस्सा फूट पड़ा है।नारे गूंज रहे हैं—“हमारे गुरुजी को वापस लाओ!”सवाल ये है—रिटायरमेंट से ठीक पहले आखिर ऐसा कौन-सा फरमान आया कि 40 नौनिहालों का भविष्य अधर में पड़ गया? पूरी खबर देखिए दोस्तो हैरान रह जाएंगे आप भीकैसे-कैसे लोग बैठे हैं हमारे सिस्टम में। जी हां दोस्तो 26 साल पढ़ाया। अब गुरुजी को ही पहाड़ से हटाया! बच्चों के भविष्य पर फैसला लिया कि अब ग्रामीणों का सिस्टम को सीधा अल्टीमेटम!आखिर बच्चों के शिक्षक पर क्यों चला ट्रांसफर का हथौड़ा? दोस्तो पहाड़ की शिक्षा व्यवस्था पर आज एक ऐसा तमाचा पड़ा है, जिसने चमोली के कलगोठ गांव के लोगों को सड़कों पर उतरने के लिए मजबूर कर दिया है! दावों और वादों की सरकारें कहती हैं कि पहाड़ में शिक्षा का स्तर सुधर रहा है, लेकिन चमोली के इस सरकारी स्कूल की हकीकत सुनेंगे तो आपका खून खौल उठेगा! दोस्तो मामला है चमोली के दूरस्थ कलगोठ विद्यालय का। जहाँ एक शिक्षक ने अपनी जिंदगी के 26 साल लगा दिए, बच्चों को ककहरा सिखाया, विज्ञान के गूढ़ रहस्य समझाए। आज जब उनका रिटायरमेंट सिर्फ डेढ़ साल दूर है, तो ब्यूरोक्रेसी ने एसी कमरों में बैठकर एक ऐसा तुगलकी फरमान जारी कर दिया जिसने पूरे गांव को हिला कर रख दिया है! सहायक अध्यापक विज्ञान, बिरजू राम पटेल को ‘व्यवस्था’ के नाम पर उर्गम भेज दिया गया है।

दोस्तो गांव के लोग और स्कूली बच्चों का साफ तौर पर कहना है कि बिरजू राम पटेल सिर्फ एक शिक्षक नहीं, बल्कि कलगोठ के 40 बच्चों के भविष्य की रीढ़ की हड्डी हैं। पिछले चार सालों से वो कक्षा छह से आठ तक के बच्चों को न सिर्फ विज्ञान पढ़ा रहे थे, बल्कि शिक्षकों की कमी के कारण दूसरे विषय भी संभाल रहे थे। अब जब बोर्ड परीक्षाएं और छमाही परीक्षाएं सिर पर हैं, तो उन्हें उर्गम भेजकर क्या शिक्षा विभाग बच्चों के भविष्य का कत्ल नहीं कर रहा? दोस्तो जनता पूछ रही है कि जब नेता और अधिकारी अपने बच्चों को देहरादून और दिल्ली के बड़े-बड़े कॉन्वेंट स्कूलों में पढ़ाते हैं, तो पहाड़ के इन गरीब नौनिहालों के साथ ऐसा सौतेला व्यवहार क्यों? कलगोठ के ग्रामीणों और अभिभावकों का सब्र का बांध अब टूट चुका है। 23 सितंबर से स्कूल परिसर में तालाबंदी और क्रमिक अनशन शुरू हो चुका है। ग्रामीण आर-पार की लड़ाई के मूड में हैं। उनका साफ कहना है—जब तक हमारे गुरुजी कलगोठ वापस नहीं आते, स्कूल का ताला नहीं खुलेगा! दोस्तो अब बात करते हैं उस सरकारी दलील की, जो हर नाकामी को छुपाने के लिए ढाल बनाई जाती है। जिला शिक्षाधिकारी बेसिक चमोली, पंकज उप्रेती का कहना है कि यह कोई ‘ट्रांसफर’ नहीं है, बल्कि उर्गम में शिक्षकों की कमी को पूरा करने के लिए एक ‘अस्थायी व्यवस्था’ है। इतना ही नहीं अधिकारी कहते हैं कि कलगोठ स्कूल साल 2015 में हाईस्कूल बन चुका है और वहां फिलहाल चार शिक्षक तैनात हैं, इसलिए पढ़ाई प्रभावित नहीं होगी। लेकिन दोस्तो हुक्मरानों से सवाल यह है कि अगर वहां चार शिक्षक हैं भी, तो क्या वो विज्ञान के विशेषज्ञ हैं? एक शिक्षक जो 26 साल से उस क्षेत्र की भौगोलिक और सामाजिक परिस्थितियों को समझकर बच्चों को तराश रहा था, उसे ऐन परीक्षा के वक्त हटाना किस नियम की किताब में जायज है? क्या ‘अस्थायी व्यवस्था’ के नाम पर पहाड़ के सरकारी स्कूलों को सिर्फ प्रयोग की प्रयोगशाला बना दिया गया है? दोस्तो चमोली के कलगोठ की जनता का यह आक्रोश सिर्फ एक शिक्षक के तबादले के खिलाफ नहीं है, बल्कि यह उस पूरी लचर शिक्षा व्यवस्था के खिलाफ एक बिगुल है जो हर दिन पहाड़ के बच्चों के सपनों का गला घोंटती है। अब देखना यह होगा कि क्या चमोली का शिक्षा महकमा नींद से जागता है या फिर इन मासूम बच्चों की पढ़ाई इस क्रमिक अनशन की भेंट चढ़ जाती है।