Haridwar शादी विवाद पर सफाई जांच के घेरे में मंत्री | Khajan Das | Investigation | Uttarakhand News

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दोस्तो रिजर्व फॉरेस्ट में हुई एक शादी अब बड़े विवाद का कारण बन गई है, मामला इतना बढ़ गया है कि कैबिनेट मंत्री खुद सवालों के घेरे में आ गए हैं। जैसे ही मामला तूल पकड़ता दिखा, मंत्री की ओर से सफाई दी गई है और उन्होंने पूरा ठीकरा वन विभाग पर फोड़ दिया है। वहीं कैसे दूसरी ओर विपक्ष और पर्यावरण से जुड़े संगठनों ने इस पूरे आयोजन को नियमों का उल्लंघन बताते हुए जांच की मांग तेज कर दी है। आखिर इतने संवेदनशील क्षेत्र में ये आयोजन कैसे हुआ—और क्या इसमें किसी स्तर पर लापरवाही या मिलीभगत हुई? बताउंगा आपको पूरी खबर अपनी इस रिपोर्ट के जरिए। दोस्तो ये मामला हरिद्वार का है और उत्तराखंड के मंत्री के बेटी की शादी का है। दोस्तो राजाजी टाइगर रिजर्व के रिजर्व फॉरेस्ट में उत्तराखंड के कैबिनेट मंत्री के बेटे की शादी विवादों में आ गई। हरिद्वार रेंज स्थित सुरेश्वरी देवी मंदिर में शादी के बड़े स्तर पर आयोजन को लेकर विवाद खड़ा हुआ। शनिवार को आयोजन की भव्य तैयारियां की गई थी और पंडाल, स्टेज, कूलर और जेनरेटर इत्यादि लगाए गए थे। परमिशन को लेकर मामले ने तूल पकड़ा तो आनन फानन में पंडाल समेत सारा सामान हटाया गया और पार्क प्रशासन की ओर से मंदिर समिति के पदाधिकारियों के खिलाफ वन अधिनियम के तहत मुकदमा दर्ज कराया गया। दोस्तो कैबिनेट मंत्री भी सुरेश्वरी देवी मंदिर पहुंचे। उनके बेटे के साथ वधू पक्ष भी आए और सीमित रूप से केवल पूजा अर्चना और फेरों की रस्म अदा की गई। कैबिनेट मंत्री ने बताया कि, वो कई सालों से सुरेश्वरी देवी मंदिर आ रहे हैं। बेटे की तबीयत भी मां सुरेश्वरी देवी के आशीर्वाद से ठीक हुई तो, उनकी इच्छा थी कि मंदिर परिसर में ही शादी की जाए, लेकिन अधिकारियों ने जानकारी नहीं दी थी कि मंदिर में शादी के आयोजन की परमिशन लेनी पड़ेगी। कुछ दिन पहले भी वो मंदिर आए थे, उस समय राजाजी के अधिकारी भी उनके साथ थे, वन निदेशक ने शादी के आयोजन की हामी भी भरी ही लेकिन ऐसा नहीं है कि मंदिर समिति की अनुमति से उनके द्वारा शादी की तैयारी की जा रही थी, निदेशक वन ने भी हामी भरी थी।

दोस्तो मंत्री खजान दास ने आरोप प्रत्यारोप को राजनीतिक साजिश बताया और कहा कि, यह दुखद और चिंताजनक विषय है। वो वन नियमों के बारे में सब जानते हैं कि वन्यजीवों को किसी प्रकार की परेशानी न हो यदि वन निदेशक उन्हें पहले ही बता देते तो वो कहीं और शादी का आयोजन कर लेते दूसरी ओर दोस्तो वहीं सुरेश्वरी देवी मंदिर समिति का कहाना है कि मंत्री खजान दास की इच्छा थी कि मां भगवती के दरबार में वह अपने बेटे की शादी पूजा और भंडारे का आयोजन करें। बड़े स्तर पर कुछ नहीं किया जा रहा था। राजाजी टाइगर रिजर्व प्रशासन द्वारा यदि कोई कार्रवाई की गई है तो वो कर सकते हैं उनका जंगल है लेकिन शादी के आयोजन को लेकर गलत प्रचार किया गया यह कार्यक्रम इतने बड़े स्तर पर नहीं था। वहीं दोस्तो इस मामले के सामने आने के तुरंत बाद प्रिंसिपल चीफ कंजरवेटर ऑफ फॉरेस्ट (हॉफ) का बयान भी सामने आया था। उन्होंने कहा कि, पार्क का कोर होने के कारण मंदिर में किसी तरह का कोई आयोजन नहीं हो सकता. इसकी जांच की जा रही है। दोस्तो गौर करने वाली बात ये कि मामले के तूल पकड़ते ही राजाजी टाइगर रिजर्व प्रशासन द्वारा पंडाल हटा लिया गया और अन्य सारा सामान भी नहीं लगाया गया। केवल मंदिर परिसर में मंडप में सात फेरे, पूजन और भंडारे का आयोजन हुआ हालांकि पार्क प्रशासन ने रविवार सुबह गेट बंद कर दिए थे, जिसके चलते श्रद्धालुओं को परेशानी का सामना करना पड़ा। दोपहर करीब 12 बजे फिर से पार्क के गेट खोले गए और श्रद्धालुओं ने मंदिर में जाकर पूजा अर्चना की तो दोस्तों, सवाल अब सिर्फ एक शादी का नहीं रह गया है। सवाल है नियमों की पारदर्शिता का, जिम्मेदारी तय करने का और वन क्षेत्र में सुरक्षा मानकों के पालन का।क्या सच में यह आयोजन सिर्फ “अनजाने में हुई चूक” थी?या फिर किसी स्तर पर नियमों की अनदेखी की गई?अगर अनुमति की प्रक्रिया पर भ्रम था, तो जिम्मेदारी किसकी बनती है—मंत्री की, वन विभाग की या फिर मंदिर समिति की?और सबसे बड़ा सवाल—राजाजी टाइगर रिजर्व जैसे संवेदनशील क्षेत्र में, इतने बड़े आयोजन की तैयारी आखिर कैसे शुरू हो गई?फिलहाल जांच जारी है, लेकिन इन सवालों के जवाब अभी भी अधूरे हैं।