दोस्तो आज बात एक गजब तस्वीर करने के लिए आया हूं श्मशान घाट में शादी का क्या है सच है जहां हर रिश्ते का अंत होता है। जहां आग की लपटों में जीवन की आखिरी विदाई दी जाती है उसी श्मशान घाट में अगर शादी का मंडप सज जाए, तो सवाल उठना लाज़मी है क्या ये कोई परंपरा है या फिर आस्था के नाम पर एक नई बहस?क्या श्मशान, जो शांति और वैराग्य का प्रतीक माना जाता है। अब जश्न और संगीत का गवाह बन सकता है? दोस्तो अपनी देवभूमि क्या यह आस्था का विस्तार है या मर्यादाओं की सीमा को लांघता कदम? दोस्तो जब से प्रधानमंत्री नरोंद्र मोदी ने वेड इन उत्तराखंड का नारा दिया, उत्तराखंड में वेडिंग डेस्टिनेशन का क्रेज बढ़ गया है लेकिन कई बार ये क्रेज पागलपन में बदलता भी दिख रहा है यकीन न हो ते इस खबर को पूरा देखना लेकिन दोस्तो आप खबर देंख वीडियो को अंत तक लेकिन उससे पहले प्रधानमंत्री मोदी का वो बयान देखिए, जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा वेडिंग इंडिया, वेडिंग इन उत्तराखंड। दोस्तो ख्याल तो बडिया था लेकिन तब क्या हो जब मै आपको ये खबर बताउं कि रामनगर से सटे मर्चूला क्षेत्र में एक अनोखा मामला सामने आया जब श्मसान घाट पर शादी का भव्य मंडप बनाया गया औऱ वहीं पर विवाह संस्कार संपन्न कराया गया। दोस्तो अब वीडियो सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हो रहे हैं। मर्चूला में पवित्र रामगंगा और बदनगढ़ नदी के संगम पर अंत्येष्टि स्थल है, जहां अंतिम संस्कार किया जाता है। लेकिन इसी जगह पर एक जोड़े का विवाह समारोह संपन्न कराया गया। सोचिए, जहां मृतात्मा की शांति के लिए ललोग प्रार्थना करते हैं, उसी जगह नवविवाहित जोड़े को नए जीवन की शुभकामनाएं दी जा रही हैं।
वीडियो में देख जा सकता है कि अंतिम संस्कार वाली जगह पर फूलों से सजा सेटअप तैयार किया गया है। वहां दूल्हा दुल्हन खड़े हैं औऱ उनके साथ आए लोग उनके साथ फोटो खिंचाते हुए आशीर्वाद दे रहे हैं। श्मसान घाट में हुई इस विचित्र शादी पर सोशल मीडिया में तरह तरह के सवाल उठ रहे हैं। क्या पहाड़ में वेडिंग डेस्टिनेशन के नाम पर अब परंपराएं ऐसे तोड़ी जाएंगी? दोस्तो स्थानीय सामाजिक कार्यकर्ता परम लोग इस घटना पर कड़ी आपत्ति जताते हुए कहा कि
अंत्येष्टि स्थल पर विवाह समारोह “किसी भी सूरत में स्वीकार्य नहीं” है। वहीं, अन्य लोगों ने भी पूछा कि क्या डेस्टिनेशन वेडिंग के नाम पर अब सांस्कृतिक मर्यादाएं इस तरह तोड़ी जाएंगी। इस पूरे मामले में यह साफ नहीं हो पाया है कि समारोह रिसॉर्ट प्रबंधन की अनुमति से हुआ या फिर वर-वधू पक्ष ने खुद यह स्थान चुना। रिसॉर्ट प्रबंधक राकेश शर्मा का कहना है कि उन्होंने आयोजनकर्ताओं को जानकारी दी थी, लेकिन उन्हें यही लोकेशन पसंद आई। मामले के सामने आने के बाद प्रशासन ने कड़ा रुख अपनाया है। तहसीलदार आबिद अली ने स्पष्ट कहा कि किसी भी सार्वजनिक स्थान पर आयोजन के लिए प्रशासन की अनुमति जरूरी होती है। खासकर श्मशान घाट जैसे संवेदनशील स्थान पर इस तरह का आयोजन करना गंभीर मामला है। प्रशासन ने कहा है कि रिजॉर्ट संचालक से पूछताछ की जाएगी और जरूरत पड़ने पर चालान भी किया जा सकता है। दोस्तो Marchula क्षेत्र इन दिनों साहसिक पर्यटन के लिए तेजी से विकसित हो रहा है और यहां बड़ी संख्या में पर्यटक पहुंच रहे हैं। इसी कारण लोग डेस्टिनेशन वेडिंग के लिए भी इस क्षेत्र को चुन रहे हैं, लेकिन इस घटना ने पर्यटन के साथ-साथ सामाजिक जिम्मेदारी पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। दोस्तो प्रशासन ने मामले की जांच शुरू कर दी है और यह पता लगाया जा रहा है कि आयोजन कैसे और किन परिस्थितियों में हुआ। यदि नियमों का उल्लंघन पाया गया तो संबंधित लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। यह घटना साफ तौर पर संकेत देती है कि पर्यटन और आयोजन के नाम पर नियमों और परंपराओं का संतुलन बनाए रखना बेहद जरूरी है तो दोस्तों, तस्वीर आपने देखी और कहानी भी सुनी।जहां अंतिम विदाई होती है जहां मौन, शांति और श्रद्धा का माहौल होता है। उसी श्मशान घाट में जब शादी का मंडप सज जाता है, तो सवाल सिर्फ चौंकाने वाले नहीं रहते बल्कि सोचने पर मजबूर कर देते हैं।क्या ये डेस्टिनेशन वेडिंग का नया ट्रेंड है या फिर परंपराओं और मर्यादाओं से खेल?क्या पर्यटन और आधुनिकता के नाम पर हम उन स्थानों की गरिमा को भूलते जा रहे हैं, जिनकी अपनी एक गहरी आस्था और पहचान है?और सबसे बड़ा सवाल—क्या हर जगह को “इवेंट स्पेस” बना देना सही है?प्रशासन जांच की बात कर रहा है लेकिन समाज के सामने सवाल अभी भी वही है—कि विकास और परंपरा के बीच संतुलन आखिर कैसे तय होगा?फिलहाल मामला चर्चा में है और बहस जारी है।