Pauri Road Connectivity विकास के दावों की असली तस्वीर! देख कर दंग रह जाएंगे! | Uttarakhand News

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दावे करोड़ों के, विकास के बड़े-बड़े होर्डिंग्स और रैलियों में गूंजते भाषण! लेकिन साहब, ज़रा रुकिए और अपनी नजरें घुमाकर उत्तराखंड के पौड़ी गढ़वाल के इस रास्ते को देखिए! जहाँ आज भी एक पति अपनी मरती हुई पत्नी की सांसों को बचाने के लिए उसे अस्पताल नहीं, बल्कि मौत के मुहाने पर खड़े 7 किलोमीटर के पथरीले रास्ते पर अपने कंधे पर ढो रहा है! डिजिटल इंडिया और ‘अग्रणी उत्तराखंड’ के दावों के बीच, क्या यही है पहाड़ की वो कड़वी हकीकत, जिसे देखकर हर उत्तराखंडी का खून खौल उठेगा? दोस्तो ये मामला ये तस्वीर पौड़ी गढ़वाल जिले के बीरोंखाल ब्लॉक का है, गाँव का नाम है पल्ला कमलिया, यहाँ रहने वाले साहिल की पत्नी काजल अचानक गंभीर रूप से बीमार हो जाती है। घर में कोहराम मच जाता है, लेकिन लाचारी देखिए। गाँव तक एम्बुलेंस आना तो दूर, एक पक्की सड़क तक नसीब नहीं है! जब कोई रास्ता नहीं सूझा, तो इस बेबस पति ने अपनी बीमार पत्नी को पीठ और कंधे पर लादा और निकल पड़ा 7 किलोमीटर के उस सफर पर, जहाँ एक तरफ गहरी खाई थी और दूसरी तरफ दम तोड़ता हुआ उसका अपना परिवार! दोस्तो ये वीडियो सिर्फ एक लाचार पति की बेबसी नहीं है, ये उत्तराखंड के पीडब्ल्यूडी (PWD) विभाग, स्वास्थ्य विभाग और स्थानीय नेताओं के मुंह पर एक करारा तमाचा है! चुनाव आते ही हर पार्टी के नेता पहाड़ों में सड़कों का जाल बिछाने का वादा करते हैं। लेकिन चुनाव खत्म होते ही ये वादे फाइलों के मलबे में दब जाते हैं। ग्रामीणों का कहना है कि इस 7 किलोमीटर की सड़क के लिए ना जाने कितनी बार सरकारी बाबू आए, फीता नापा, सर्वे किया, लेकिन आज तक यहाँ एक गिट्टी भी नहीं रखी गई! आखिर कब तक पहाड़ों का पानी और पहाड़ों की जवानी यूँ ही घुट-घुट कर मरती रहेगी?

दोस्तो वीडियो में साहिल ने रोते हुए सीधे सूबे के मुखिया पुष्कर सिंह धामी से गुहार लगाई है। उसने कहा- ‘धामी जी, हमारे गाँव तक सड़क पहुंचा दो, सड़क ना होने की वजह से पहले भी कई लोग अस्पताल पहुँचने से पहले दम तोड़ चुके हैं, मेरी पत्नी को बचा लो!’ मुख्यमंत्री जी, आज सोशल मीडिया पर उत्तराखंड की जनता आपसे पूछ रही है। क्या इन सुदूर गांवों में रहने वाले लोगों को सम्मान से जीने और सही समय पर इलाज पाने का हक नहीं है? क्या सचिवालय में बैठकर बनने वाली नीतियां इन आखिरी छोर पर खड़े इंसानों तक कभी पहुँच पाएंगी? दोस्तो ये खबर ये कहानी सिर्फ साहिल और काजल की नहीं है, उत्तराखंड के सैकड़ों गांवों की यही दास्तान है। आज जरूरत है कि इस वीडियो को इतना शेयर किया जाए कि इसकी गूंज देहरादून के आलीशान कमरों में बैठे हुक्मरानों के कानों के पर्दे फाड़ दे! इस वीडियो को दबने मत दीजिए। कमेंट में अपनी राय लिखिए और सरकार से जवाब मांगिए!