उत्तराखंड में उफान पर नदियां, 132 सड़कें बंद, 24×7 अलर्ट मोड पर अधिकारी

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साल 2013 की भीषण आपदा के दौरान जिस तरह ऋषिकेश और हरिद्वार में गंगा का रौद्र रूप देखने को मिला था, मौजूदा हालात ने एक बार फिर लोगों की चिंता बढ़ा दी है। ऋषिकेश के कई घाट जहां हर शाम श्रद्धा और आस्था की गंगा आरती होती है, वहां नदी का जलस्तर पहुंच गया है। उधर, परमार्थ निकेतन परिसर में स्थापित भगवान शिव की विशाल प्रतिमा के चरणों तक गंगा का पानी पहुंच गया है। कई घाट जलमग्न हो चुके हैं और प्रशासन हालात पर लगातार नजर बनाए हुए हैं। मौसम विज्ञान केंद्र की ओर से जारी पूर्वानुमान के अनुसार सात अगस्त को उत्तरकाशी, देहरादून, टिहरी, रुद्रप्रयाग और बागेश्वर जिलों में कहीं-कहीं भारी बारिश का येलो अलर्ट जारी किया गया है। वहीं पर्वतीय क्षेत्रों में कुछ स्थानों पर तेज से अत्यंत तेज बारिश के दौर के साथ आकाशीय बिजली चमकने का अनुमान है।

उत्तराखंड में भूस्खलन, भूधंसाव के चलते चार एनएच, चार स्टेट हाईवे, एक मुख्य जिला मार्ग समेत 132 सड़क बंद हैं। इनमें सबसे अधिक 132 ग्रामीण सड़कें प्रभावित हैं। जिलों की बात करें तो अल्मोड़ा में 05, बागेश्वर में 11, चमोली में 24, देहरादून में 10, नैनीताल में 9 मार्ग बंद हैं। पौड़ी में 17 और पिथौरागढ़ में दो बीआरओ के एनएच (सोबला-तिदांग और तवाघाट-गुंजी) समेत 18 मार्ग बंद हैं। रुद्रप्रयाग में 07, टिहरी में 16 और उत्तरकाशी जिले में बड़कोट-विकास निगम एनएच समेत 15 मार्गों पर आवागमन ठप है। लोनिवि की ओर से सभी बंद मार्गाें को खोलने का प्रयास किया जा रहा है। मुख्य सचिव ने सचिव आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास विनोद कुमार सुमन से राज्यभर में वर्षा की स्थिति, नदियों के जलस्तर, बंद सड़कों, भूस्खलन से प्रभावित क्षेत्रों, राहत एवं बचाव कार्यों, विद्युत एवं पेयजल आपूर्ति, संचार व्यवस्था तथा अन्य आवश्यक सेवाओं की विस्तृत जानकारी ली।

मुख्य सचिव ने स्पष्ट निर्देश दिए कि जनजीवन की सुरक्षा राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है और किसी भी संभावित आपदा से प्रभावी ढंग से निपटने के लिए सभी विभाग पूर्ण समन्वय के साथ 24×7 अलर्ट मोड पर कार्य करें। उन्होंने राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र को सभी जनपदों के साथ निरंतर समन्वय बनाए रखने के निर्देश दिए। समीक्षा के दौरान उन्होंने विभिन्न जिलाधिकारियों से दूरभाष पर वार्ता कर उनके जनपदों की स्थिति की जानकारी ली तथा आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि बंद सड़कों को प्राथमिकता के आधार पर शीघ्र खोला जाए तथा भूस्खलन संभावित एवं संवेदनशील स्थानों पर पर्याप्त मशीनरी पहले से तैनात रखी जाए। जलभराव वाले क्षेत्रों में जलनिकासी की प्रभावी व्यवस्था सुनिश्चित करने के साथ-साथ पंप एवं अन्य आवश्यक उपकरण भी पर्याप्त संख्या में उपलब्ध रहें।