तो क्या दोस्तो रातभर पहाड़ों में हुई मूसलाधार बारिश ने मैदानी इलाकों में सुबह-सुबह हड़कंप मचा दिया?क्या ऋषिकेश में गंगा अब खतरे की दहलीज पर पहुंच गई है? क्या हरिद्वार की सड़कें बारिश में तालाब बन गई हैं? और क्या देहरादून से लेकर हरिद्वार-ऋषिकेश तक मानसून अब लोगों की मुश्किलें बढ़ाता जा रहा है? बारिश के कहर की सबसे बड़ी तस्वीरें जो मैदानी क्षेत्रों के लिए खतरे की घंटी बजा रही हैं बताउंगा आपको पूरी खबर। जी हां दोस्तो सुना आपने कृपया नदी में स्नान करने से बचें और सुरक्षित स्थानों पर रहें। ऋषिकेश में गंगा नदी का जलस्तर बढ़ने के कारण जन सुरक्षा की दृष्टि से पुलिस की टीम गंगा घाटों के तटीय इलाकों में मौजूद लोगों को अलर्ट कर रही है। वहीं दोस्तो एक और तस्वीर है जो पहाड़ों में भारी बारिश के बीच भारी तबाही को लेकर अलर्ट कर रही है देखिए कैसे उत्तरकाशी में लगातार हो रही बारिश का असर गंगोत्री राष्ट्रीय राजमार्ग पर भी देखने को मिल रहा है। डबरानी के पास भूस्खलन के कारण गंगोत्री हाईवे फिलहाल बंद है। श्रद्धालुओं की सुरक्षा को देखते हुए पुलिस-प्रशासन ने वाहनों को सुरक्षित स्थानों पर रोक दिया है। प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि मार्ग खुलने तक सुरक्षित स्थान पर ही रहें और पुलिस-प्रशासन के निर्देशों का पालन करें। पिथौरागढ़ में लगातार हो रही बारिश के चलते काली नदी का जलस्तर बढ़ गया है। इसे देखते हुए पुलिस और प्रशासन ने नदी किनारे रहने वाले लोगों से विशेष सतर्कता बरतने की अपील की है। लोगों से कहा गया है कि नदी के पास जाने से बचें, अनावश्यक जोखिम न लें और प्रशासन द्वारा जारी सुरक्षा निर्देशों का पालन करें। सुरक्षित रहें, सतर्क रहें। गढ़वाल मंडल में लगातार हो रही भारी बारिश के बीच श्रीनगर बांध के सभी गेट खोल दिए गए हैं, जिससे अलकनंदा और गंगा नदी का जलस्तर लगातार बढ़ रहा है। बढ़ते जलस्तर को देखते हुए देहरादून जिला प्रशासन ने ऋषिकेश के गंगा घाटों और आसपास के क्षेत्रों में लोगों को सतर्क करना शुरू कर दिया है।
प्रशासन ने स्थानीय लोगों, श्रद्धालुओं और कांवड़ियों से गंगा के किनारे जाने से बचने और सुरक्षा निर्देशों का पालन करने की अपील की है। दोस्तों, रातभर पहाड़ों में बरसे बादलों का असर सुब मैदानी उत्तराखंड में साफ दिखाई दिया। कहीं गंगा उफान पर पहुंच गई। कहीं सड़कें पानी में डूब गईं। तो कहीं लोगों को घरों से निकलना तक मुश्किल हो गया। सबसे पहले रुख करते हैं ऋषिकेश का। लगातार बारिश के बाद ऋषिकेश में गंगा का जलस्तर तेजी से बढ़ गया। त्रिवेणी घाट पर गंगा चेतावनी स्तर से ऊपर बहती नजर आई। बढ़ते जलस्तर को देखते हुए जल पुलिस, एसडीआरएफ और आपदा राहत दल को घाटों पर तैनात कर दिया गया। श्रद्धालुओं और कांवड़ियों से गंगा किनारे न जाने और सुरक्षा निर्देशों का पालन करने की अपील की जा रही है। दोस्तो रामझूला स्थित परमार्थ निकेतन में भी गंगा का जलस्तर इतना बढ़ गया कि शिव प्रतिमा तक पानी पहुंच गया। प्रशासन लगातार हालात पर नजर बनाए हुए है। पहाड़ों में जारी बारिश के कारण गंगा का जलस्तर और बढ़ने की आशंका बनी हुई है। दोस्तो धर्मनगरी हरिद्वार में रातभर हुई बारिश ने नगर निगम की तैयारियों की पोल खोल दी। शहर का व्यस्त भगत सिंह चौक पूरी तरह जलमग्न हो गया। सड़कें तालाब में बदल गईं और दोपहिया से लेकर चारपहिया वाहन रेंगते नजर आए। कई जगह लंबा जाम लग गया और लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा।
दोस्तो हालात बिगड़ते देख नगर निगम की टीम मौके पर पहुंची और मोटर पंप लगाकर पानी निकालने का काम शुरू किया। हालांकि स्थानीय लोगों का कहना है कि हर बारिश में यही हाल होता है और स्थायी समाधान अब तक नहीं निकाला गया.. इधर दोस्तो राजधानी देहरादून में भी लगातार बारिश का दौर जारी है। मौसम विभाग ने भारी बारिश की चेतावनी जारी की है और प्रशासन को सतर्क रहने के निर्देश दिए गए हैं। प्रदेश के कई जिलों में बारिश, जलभराव और भूस्खलन की आशंका को देखते हुए निगरानी बढ़ा दी गई है। ऋषिकेश में गंगा चेतावनी स्तर से ऊपर, घाटों पर SDRF और जल पुलिस तैनात, हरिद्वार में कई स्थानों पर जलभराव, नगर निगम ने शुरू की पानी निकासी, प्रशासन ने लोगों से सतर्क रहने की अपील। दोस्तो मौसम विभाग के अनुसार अगले कुछ दिनों तक प्रदेश में भारी से बहुत भारी बारिश का दौर जारी रह सकता है। ऐसे में नदी-नालों से दूरी बनाए रखने, अनावश्यक यात्रा से बचने और प्रशासन की एडवाइजरी का पालन करने की सलाह दी गई है। दोस्तों, पहाड़ों में बरस रही बारिश का असर अब मैदानी इलाकों में भी साफ दिखाई देने लगा है। गंगा का बढ़ता जलस्तर, शहरों में जलभराव और लगातार बिगड़ते हालात साफ संकेत दे रहे हैं कि आने वाले दिन चुनौतीपूर्ण हो सकते हैं। ऐसे में अगर आप हरिद्वार, ऋषिकेश या उत्तराखंड के किसी भी नदी किनारे वाले इलाके में हैं, तो सतर्क रहें, अफवाहों से बचें और केवल प्रशासन व मौसम विभाग की आधिकारिक सलाह का ही पालन करें।