Haridwar जिला योजना बैठक में बवाल! | Satpal Maharaj | Political Clash | CM Dhami | Uttarakhand News

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दोस्तो क्या विकास की बैठकों में जनप्रतिनिधियों की आवाज दबाई जा रही है?क्या योजनाओं पर चर्चा अब टकराव और नारों में बदल चुकी है? कुछ ऐसे ही सवालों के बीच हरिद्वार में जिला योजना समिति की बैठक उस वक्त हंगामे की भेंट चढ़ गई, जब कैबिनेट मंत्री सतपाल महाराज की मौजूदगी में विपक्षी विधायकों ने मोर्चा खोल दिया। टेबल पर रखी बुकलेट उठाकर फेंक दी गई, नारेबाजी हुई और “धामी सरकार मुर्दाबाद” के नारों से पूरा सभागार गूंजता दिखाई दिया। आखिर ऐसी स्थिति क्यों बनी क्यों बैठक छोड़ चले गए सब और महाराज देखते रह गए। क्या जनहित की योजनाओं पर चर्चा करने वाली जिला योजना समिति की बैठकें अब विकास का मंच रह गई हैं, या फिर राजनीतिक टकराव का नया अखाड़ा बनती जा रही हैं?क्या जनता के मुद्दों की जगह अब नारों, आरोपों और विरोध ने ले ली है? दोस्तो कुछ ऐसे ही गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं हरिद्वार में हुई जिला योजना समिति की बैठक के बाद, जहां माहौल उस वक्त पूरी तरह बिगड़ गया जब कैबिनेट मंत्री सतपाल महाराज की मौजूदगी में विपक्षी विधायकों ने तीखा विरोध दर्ज कराया। दोस्तो हरिद्वार में जिला योजना समिति की बैठक जैसे ही शुरू हुई, माहौल सामान्य नहीं रहा। कांग्रेस और बसपा के विधायकों ने बैठक की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए विरोध का मोर्चा खोल दिया। दोस्तो स्थिति उस समय और तनावपूर्ण हो गई जब कैबिनेट मंत्री सतपाल महाराज सभागार में पहुंचे। विपक्षी विधायकों ने टेबल पर रखी बुकलेट उठाकर फेंक दी और जोरदार नारेबाजी शुरू कर दी। पूरे सभागार और परिसर में नारे गूंजने लगे। कुछ ही पलों में पूरा माहौल असंतुलित हो गया और बैठक का वातावरण चर्चा से टकराव में बदल गया– सबसे पहले आप चुनिए अनुपमा रावत विधायक हरिद्वार ग्रामीण (कांग्रेस) जी हां दोस्तो कांग्रेस अपने चश्मे से विकास की बयार को देख रही है और बता रही है हो क्या रहा है।

दोस्तो जहां कांग्रेस विधायक अनुपमा रावत, रवि बहादुर और बसपा विधायक शहजाद अली सहित कई जनप्रतिनिधियों ने बैठक की प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठाए। वहीं दोस्तो विपक्ष का कहना था कि यह बैठक विकास योजनाओं पर चर्चा के लिए नहीं, बल्कि ठेकेदारों और कुछ चुनिंदा हितों को साधने का माध्यम बनती जा रही है, लेकिन शहदाज अली के आरोपों को सुनेंगे तो आप दंग रह जाएंगे। दोस्तो विपक्षी विधायकों ने आरोप लगाया कि विकास योजनाओं में पारदर्शिता का अभाव है। उनका कहना है कि स्थानीय जनप्रतिनिधियों की राय को लगातार नजरअंदाज किया जा रहा है, जिससे क्षेत्रीय जरूरतें योजनाओं में सही तरीके से शामिल नहीं हो पा रही हैं। बसपा विधायकों ने भी कांग्रेस का समर्थन करते हुए बैठक के तरीके पर सवाल खड़े किए और इसे गलत करार दिया। हंगामे के चलते बैठक की कार्यवाही कुछ समय के लिए प्रभावित रही। प्रशासनिक अधिकारियों को हालात संभालने में काफी मशक्कत करनी पड़ी। दोस्तो जहां एक ओर कैबिनेट मंत्री सतपाल महाराज की अध्यक्षता में बैठक जारी रही और भाजपा विधायक व जिला पंचायत सदस्य मौजूद रहे,वहीं दूसरी ओर कांग्रेस और बसपा के विधायक जिला कलेक्टर परिसर में धरने पर बैठ गए यानी साफ तौर पर बैठक दो हिस्सों में बंट गई—एक तरफ सत्ता पक्ष की कार्यवाही जारी रही, और दूसरी तरफ विपक्ष का विरोध प्रदर्शन। इसी बैठक में रवि बहादुर विधायक ज्वालापुर (कांग्रेस) ने भी विकास की पोल खोल दी। दोस्तो इस पूरे घटनाक्रम ने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं—क्या जिला योजना बैठकों में अब विकास योजनाओं की जगह सियासी बयानबाजी हावी हो रही है? क्या विपक्ष की आवाज को अनसुना किया जा रहा है, या फिर विरोध की शैली अब टकराव की ओर बढ़ रही है? और सबसे अहम—क्या जनता के विकास से जुड़े मुद्दे इस राजनीतिक खींचतान में पीछे छूटते जा रहे हैं?हरिद्वार की यह बैठक सिर्फ एक प्रशासनिक बैठक नहीं रही, बल्कि यह उस बड़े सवाल का प्रतीक बन गई है कि विकास की योजनाएं किस दिशा में जा रही हैं। जहां एक तरफ सरकार पारदर्शिता और विकास की बात कर रही है, वहीं विपक्ष इसे असंतुलित और पक्षपातपूर्ण बता रहा है। अब देखना यह होगा कि आने वाले समय में इस तरह की बैठकों में संवाद मजबूत होता है या टकराव और गहराता है।