उत्तराखंड में गजब का विकास देखिए| Dehradun | Maldevta | CM Dhami | Satpal Maharaj | Uttarakhand News

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दोस्तों, उत्तराखंड में इन दिनों सड़क और पुल की चर्चा ने पूरे सिस्टम को ही चकरा दिया है। कहीं पुल सालों से नहीं बनता, तो कहीं सड़क पर बना बड़ा गड्ढा घंटों में दुरुस्त हो जाता है और अब मालदेवता में नई-नवेली सड़क पर बना गुफानुमा गड्ढा हर किसी को हैरान कर रहा है। सवाल ये है कि आखिर ये कैसी इंजीनियरिंग है, जहां सड़क बनाने के साथ-साथ उसके नीचे गुफा भी तैयार हो गई और ये गुफा आखिर कहां तक जाती है, इसका जवाब फिलहाल किसी के पास नहीं! आगे चुनाव भी है। आप पूरी खबर देखिएगा तो आपको समझ आएगा की कैसे अपने उत्तराखंड में गजब का विकास हो रहा है। दोस्तो बीते कुछ महीने में आपने उत्तराखंड में सड़क और पुल की कहानियां कई सुनी और देखी होंगी। दोस्तो ज्यादा पुराने मामलों में नहीं पड़ता हूं हाल में मौसून के आने के बाद की तस्वीरों को दिखाता और बात करता हूं। दोस्तो ये पहली तस्वीर राजधानी देहरादून की है। सचिवालय मुख्यमंत्री आवास से महज कुछ किलो मीटर की दूरी पर हुआ है ये बड़ा गढ्ढा खूब चर्चा में रहा और देश के अखबारों और चैनल में विकास पड़े एस गड्ढे की खूब सुर्खियां बनी। हां वो बात अलग है कि इतने बड़े गडेढे को महज कुछ ही घंटो में सही करके सड़क मार्ग शुरु कर दिया गया।

वहीं दोस्तो दूसरी तस्वीर जो आप देख रहे हैं इस गड्ढे को तो लगता है भर माना भी मुमकिन नहीं लगता, ये देहरादून के मालदेवता का विकास है जहां बारिश बीते साल से कई सवाल सिस्टम से कर रही है, तो दोस्तो देहरादून में विकास की रफ्तार देखिए। सड़क नई है, लेकिन उसकी हालत देखकर लगता है जैसे बरसों पुरानी हो। करोड़ों की लागत से बनी सड़क अभी अपनी पहली सालगिरह भी नहीं मना पाई और जमीन में धंसने लगी। अब इसे बारिश का असर कहें, निर्माण की गुणवत्ता या फिर सिस्टम की लापरवाही, जांच के बाद ही तस्वीर साफ होगी। लेकिन तस्वीरें फिलहाल बहुत कुछ कह रही हैं। दोस्तों, उत्तराखंड में सड़क और पुलों की कहानी इन दिनों कुछ ऐसी है कि इंजीनियरिंग समझने के लिए शायद अब किताब नहीं, दूरबीन और टॉर्च की जरूरत पड़े! वैसे सियासत ने थाम ली है दूरवीन खैर दोस्तो देहरादून में पहले नंदा की चौकी की एप्रोच रोड धंसी और अब मालदेवता के आगे सौंग डैम की ओर जाने वाली नई सड़क में गहरा गड्ढा सामने आ गया, सड़क नई-नवेली लेकिन गड्ढा ऐसा कि देखकर सवाल उठना लाजिमी है—आखिर सड़क बनाई थी या जमीन के नीचे सुरंग का ट्रायल चल रहा था? दोस्तो पहली बारिश ने सड़क की चमक तो उतारी ही, साथ में निर्माण की गुणवत्ता पर भी सवाल खड़े कर दिए। ऊपर सड़क दिखाई दे रही है और नीचे गहराई। यानी विकास का ऐसा मॉडल, जिसमें सड़क के साथ-साथ गुफानुमा गड्ढा भी मुफ्त में मिल रहा है!

दोस्तो ये बात इस लिए भी कही जा सकती है क्योंकि सरकार सिस्टम लगातार भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस की बात करती है, लेकिन सवाल ये नहीं कि नारा कितना मजबूत है। सवाल ये है कि सड़क कितनी मजबूत है?अगर सड़क की उम्र साल भर भी नहीं और जमीन उसे अपने अंदर समेटने लगे, तो फिर करोड़ों रुपये खर्च करने के बाद गुणवत्ता की जांच आखिर किस स्तर पर हुई? और ये मामला सिर्फ एक गड्ढे का नहीं है। कुछ समय पहले नंदा की चौकी में पुल की एप्रोच रोड धंसने के बाद भी निर्माण गुणवत्ता को लेकर सवाल उठे थे। वहां प्रशासन ने मरम्मत शुरू कराई और जांच की बात कही।अब मालदेवता की सड़क ने फिर वही सवाल सामने ला दिया है। सवाल, नई सड़क इतनी जल्दी क्यों धंसी?, निर्माण में क्या खामी रही? जिम्मेदारी किसकी तय होगी? जी हां दोस्तो दिल्ली-देहरादून को फटाफट जोड़ने वाला ये एक्सप्रेस वे उद्घाटने के महज कुछ वक्त में ही सवालों के घेरे में आ गया। लोगों को ढाई से तीन घंटे में दिल्ली से देहरादून और देहरादून से दिल्ली पहुंचाने वाला ये एक्सप्रेस वे को लोगों ने जानलेवा बताया। इधर दोस्तो इन सब तस्वीरों से इतर एक तस्वीर और है वो दिखिए, ये तस्वीर आपको इस लिए दिखा रहा हूं क्योंकि जहां देहरादून के आस-पास महज कुछ ही घंटों में सड़क बनाकर चालू कर दी जाती है वहीं दोस्तो ये त्सवीर देखिए।

दोस्तों सीमांत पिथौरागढ़ जिले के धारचूला तहसील की सोबला-उमचिया सड़क पर नेकल नाले में पैदल आवागमन के लिए पीएमजीएसवाई ने लकड़ी के दो अस्थायी पुल बना दिए हैं। पुल बनने से ग्रामीणों को राहत मिली है, लेकिन वाहनों से आवाजाही के लिए ग्रामीणों को अभी इंतजार करना होगा। वहीं, बारिश में फिर से परेशानी बढ़ने की आशंका जताई जा रही है। गौर करने वाली बात ये है दोस्तो करीब 90 परिवारों का सड़क संपर्क पूरी तरह कट गया था। ग्रामीणों की दिक्कतों को देखते हुए ग्राम प्रधान हरेंद्र सिंह दानू की पहल पर विभाग ने नेकल गाड़ में 2 अस्थायी लकड़ी के पुल बना दिए हैं। फिलहाल, पैदल आवागमन दोनों अस्थायी पैदल पुलों और पैदल ट्रेक के माध्यम से सुरक्षित रूप से चल रहा है। अब दोस्तो जहां कुछ परेशानियों का चुटिकियों में समाधान होता है तो वहीं दूसरी एक लकड़ी के अस्थाई पुल के सहारे लोगों की जिंदगी चल रही है, लेकिन दोस्तो व्यवस्था को लेकर सवाल किया जा सकता है। क्या देरहरादून में जो दे्खने को मिल रहा है उस पर भ्रष्टाचर पर सवाल किया जा सकता है फिलहाल किसी पर भ्रष्टाचार का आरोप साबित नहीं हुआ है, इसलिए जांच का इंतजार जरूरी है। लेकिन इतना जरूर है कि जनता के पैसे से बनी सड़क अगर पहली बरसात में ही जमीन के अंदर जाने लगे, तो जवाबदेही भी जमीन के ऊपर ही तय होनी चाहिए।क्योंकि विकास सिर्फ सड़क बनाने का नाम नहीं, सड़क को टिकाऊ बनाने का नाम भी है।